गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं बढ़ती जा रही है. लेकिन अब बिल्डिंग्स में लगने वाली आग इसलिए ज्यादा खतरनाक मानी जा रही है, क्योंकि अब आग कुछ ही मिनटों में पूरा फ्लोर या पूरी बिल्डिंग आग और धुएं की चपेट में आ जाती है. ऐसे में होता क्या है कि जब तक दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचती हैं, उससे पहले ही भारी नुकसान हो चुका होता है और लोगों को बचने की संभावना कम हो जाती है. तो जानते हैं कि आखिर क्यों अब बिल्डिंग्स की आग ज्यादा भयावह होती जा रही है और क्यों कुछ ही मिनटों में खतरनाक रुप ले लेती है.
बिल्डिंग्स में आग के स्पीड से फैलने की वजह आधुनिक इमारतों की डिजाइन और उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री है. दिल्ली फायर सर्विस (DFS) के अधिकारियों के अनुसार, आधुनिक बिल्डिंग्स में कम ऊंचाई वाली छतें, फॉल्स सीलिंग, एयर कंडीशनिंग डक्ट, सिंथेटिक फर्नीचर, प्लास्टिक आधारित इंटीरियर और सील बंद खिड़कियां आग को तेजी से फैलाने में मदद करती हैं. पहले के भवनों में प्राकृतिक वेंटिलेशन अधिक होता था, जिससे गर्मी और धुआं बाहर निकल पाता था. लेकिन आजकल की इमारतों में रबर-सील वाली खिड़कियां और बंद कमरे गर्मी और धुएं को अंदर ही फंसा देते हैं.
फ्लैशओवर है सबसे बड़ा कारण
इसके अलावा सबसे अहम कारण "फ्लैशओवर" माना जाता है. यह वह स्थिति होती है जब कमरे के भीतर मौजूद लगभग सभी ज्वलनशील वस्तुएं एक साथ आग पकड़ लेती हैं और खुद आग के ईंधन में बदल जाती हैं. इस दौरान तापमान 500 से 600 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. एक्सपर्ट बताते हैं कि पुरानी बिल्डिंग्स में फ्लैशओवर की स्थिति आने में आमतौर पर 15 से 17 मिनट लगते थे, जबकि आधुनिक इमारतों में यह केवल 3 से 5 मिनट में हो सकता है. कुछ मामलों में यह एक मिनट से भी कम समय में हो जाता है.
यही वजह है कि आग लगने के शुरुआती कुछ मिनट सबसे अहम होते हैं. अगर आग आग तेजी से फ्लैशओवर तक पहुंच जाए, तो दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही पूरा कमरा या फ्लोर आग की चपेट में आ सकता है. इसके अलावा सिंथेटिक सामग्री जलने पर निकलने वाला जहरीला धुआं लोगों के लिए आग से भी बड़ा खतरा बन जाता है और कई बार मौतें जलने से नहीं, बल्कि धुएं के कारण होती हैं.
ऐसे में इस तरह की आग को बुझाने के लिए सिर्फ फायर ब्रिगेड ही नहीं, फायर अलार्म, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग और नियमित फायर ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं होना भी जरूरी हैं. कई बार आग और फ्लैशओवर के बीच का समय इतना कम होता है कि दमकल के पहुंचने तक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी होती है.
aajtak.in