जब हिटलर की 'मीन कैम्फ' प्रकाशित हुई, दो पार्ट में आई थी किताब

आज के दिन ही हिटलर की आत्मकथा मीन कैम्फ प्रकाशित हुई थी. यह किताब दो खंड में प्रकाशित हुई थी. दो साल बाद दूसरा भाग आया था.

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आज के दिन ही हिटलर की आत्मकथा मीन कैम्फ का प्रकाशन हुआ था (Photo - Pexels) आज के दिन ही हिटलर की आत्मकथा मीन कैम्फ का प्रकाशन हुआ था (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:51 AM IST

18 जुलाई, 1925 को एडॉल्फ हिटलर की दार्शनिक आत्मकथा, 'मीन कम्फ' का पहला खंड प्रकाशित हुआ. यह उनके तीसरे रैह के एजेंडे की रूपरेखा और 1939 से 1945 तक यूरोप को घेरने वाले भयावह परिदृश्य का स्पष्ट वर्णन था. पुस्तक की पहले वर्ष में कुल 9,473 प्रतियां बिकीं. हिटलर ने लैंड्सबर्ग जेल में रहते हुए अपनी इस आत्मकक्षा की रचना शुरू की थी. एक तख्तापलट की साजिश रचने के लिए हिटलर को जेल भेज दिया गया था.

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 उन्हें कुख्यात बीयर हॉल पुत्श में उनकी भूमिका के लिए राजद्रोह का दोषी ठहराया गया था, जिसमें उन्होंने और उनके साथियों ने बवेरिया में तख्तापलट करके सरकार पर कब्ज़ा करने का प्रयास किया था. यह प्रयास बुरी तरह विफल रहा, कुछ सहयोगी उनका साथ छोड़कर भाग गए और कुछ अधिकारियों के हाथ लग गए. हिटलर को पांच साल की कैद की सजा सुनाई गई. हालांकि, उन्होंने केवल नौ महीने ही जेल में बिताए. 

लैंड्सबर्ग के पुराने किले में उनका समय बिल्कुल भी कष्टदायक नहीं था. उन्हें मेहमानों से मिलने और उपहार प्राप्त करने की अनुमति थी और उन्हें एक तरह से पूजनीय नायक की तरह माना जाता था. उन्होंने अपने खाली समय का सदुपयोग करने का फैसला किया और इसलिए उन्होंने अपनी आत्मकथा लिखनी शुरू की. पहले खंड को रूडोल्फ हेस से लिखवाना शुरू किया, जो जर्मन राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी के एक वफादार सदस्य और साथी क्रांतिकारी थे.

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मीन कैम्फ का पहला भाग, जिसका उपशीर्षक 'हिसाब-किताब' है. जर्मनी को कथित तौर पर घेरने वाली समस्याओं पर 400 से अधिक पृष्ठों का एक तीखा व्यंग्य है. हिटलर के लिए, राज्य एक आर्थिक इकाई नहीं, बल्कि एक नस्लीय इकाई थी. पुनर्जीवित जर्मनी के लिए नस्लीय शुद्धता एक परम आवश्यकता थी. क्योंकि, मनुष्य युद्ध हारने के परिणामस्वरूप नहीं मरते, बल्कि शुद्ध रक्त की हानि से मरते हैं.

इसमें नेतृत्व की बात करें तो, हिटलर का तीसरा रैह पूर्ण सत्तावादी शासन के प्रशियाई आदर्श का अनुकरण करेगा. बहुमत से कोई निर्णय नहीं होना चाहिए, बल्कि केवल जिम्मेदार व्यक्ति ही निर्णय लेंगे… बेशक हर व्यक्ति के सलाहकार होंगे… लेकिन अंतिम निर्णय एक ही व्यक्ति द्वारा लिया जाएगा.

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राष्ट्रीय समाजवाद पर केंद्रित 'मीन कैम्फ' का दूसरा खंड 1927 में प्रकाशित हुआ था. 1920 के दशक में संपूर्ण कृति की बिक्री औसत दर्जे की ही रही. 1933 में, हिटलर के जर्मनी के चांसलर के रूप में कार्यकाल के पहले वर्ष में ही, इसकी बिक्री बढ़कर 10 लाख से अधिक हो गई. इसकी लोकप्रियता इस हद तक पहुंच गई कि नवविवाहित जोड़े को इसकी एक प्रति उपहार में देना एक परंपरा बन गई थी.

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