मरने के बाद कितनी देर तक काम करता है दिमाग?

क्या मौत के साथ ही इंसान का दिमाग पूरी तरह काम करना बंद कर देता है? दिल की धड़कन रुकने के बाद दिमाग कितनी देर तक एक्टिव रह सकता है, मौत के बाद दिमाग में क्या बदलाव होते हैं और इस विषय पर साइंटिस्ट रिसर्च क्या कहते हैं.

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कुछ रिसर्च में संकेत मिले हैं कि मौत के तुरंत बाद कुछ समय तक सुनने की क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं होती. ( Photo: ITG) कुछ रिसर्च में संकेत मिले हैं कि मौत के तुरंत बाद कुछ समय तक सुनने की क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं होती. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो क्या उसी क्षण उसका दिमाग भी पूरी तरह काम करना बंद कर देता है? या फिर कुछ समय तक दिमाग जीवित रहता है? यह सवाल सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों को भी लंबे समय से आकर्षित करता रहा है. कई रिसर्च में इस विषय पर स्टडी की गई और उनसे कुछ रोचक जानकारियां सामने आई हैं.

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मौत के बाद शरीर में क्या होता है?
जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर देता है, तो शरीर के ऑर्गन तक ऑक्सीजन पहुंचना भी रुक जाता है. ऑक्सीजन की कमी के कारण शरीर के विभिन्न ऑर्गन धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं. हालांकि, सभी ऑर्गन एक ही समय पर बंद नहीं होते. कुछ अंग दूसरों की तुलना में अधिक समय तक एक्टिव रह सकते हैं. दिमाग शरीर का सबसे ज्यादा ऊर्जा और ऑक्सीजन उपयोग करने वाला ऑर्गन है. इसलिए ऑक्सीजन की सप्लाई रुकते ही यह बहुत जल्दी प्रभावित होने लगता है.

कितनी देर तक एक्टिव रहता है दिमाग?
वैज्ञानिकों के अनुसार, दिल की धड़कन बंद होने के लगभग 20 से 30 सेकंड के भीतर व्यक्ति बेहोश हो जाता है क्योंकि दिमाग तक पर्याप्त ब्लड और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. इसके बाद भी दिमाग की कुछ सेल तुरंत नहीं मरतीं. रिसर्च बताते हैं कि मौत के बाद कुछ मिनटों तक दिमाग में हल्की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी देखी जा सकती है. कुछ स्टडी में पाया गया है कि हार्ट रुकने के बाद लगभग 2 से 5 मिनट तक दिमाग के सेल जीवित रह सकते हैं. हालांकि इस दौरान व्यक्ति सामान्य रूप से सोचने, समझने या प्रतिक्रिया देने की स्थिति में नहीं होता.

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मौत के बाद दिमाग में क्यों दिखती है एक्टिविटी?
वैज्ञानिकों का मानना है कि जब शरीर ऑक्सीजन खोने लगता है, तब दिमाग के सेल अंतिम बार एक्टिव होने की कोशिश करती हैं. इसी वजह से कुछ समय तक इलेक्ट्रिकल साइन रिकॉर्ड किए जा सकते हैं.

साल 2022 में प्रकाशित एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने पाया कि मृत्यु के समय कुछ लोगों के दिमाग में ऐसी तरंगें दर्ज हुईं जो सपने देखने, यादें ताजा करने और गहरी सोच से जुड़ी होती हैं. इससे यह संभावना जताई गई कि मौत के आखिरी समय में व्यक्ति के दिमाग में जीवन की महत्वपूर्ण यादें चल सकती हैं. हालांकि इस विषय पर अभी और रिसर्च की जरूरत है.

क्या मौत के बाद व्यक्ति सुन सकता है?
कुछ रिसर्च में संकेत मिले हैं कि मौत के तुरंत बाद कुछ समय तक सुनने की क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं होती. यही कारण है कि कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी गंभीर मरीजों के पास मौजूद लोगों को सलाह देते हैं कि वे उनसे बात करते रहें. हालांकि यह कहना मुश्किल है कि व्यक्ति वास्तव में सुन और समझ रहा होता है या नहीं. इस विषय पर वैज्ञानिकों के बीच अभी भी मतभेद हैं.

दिमाग की कोशिकाएं कब मरती हैं?
यदि ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी तरह बंद हो जाए, तो दिमाग की कोशिकाओं को स्थायी नुकसान पहुंचना शुरू हो जाता है. आमतौर पर 4 से 6 मिनट के भीतर गंभीर क्षति होने लगती है. यदि लंबे समय तक ऑक्सीजन न मिले तो अधिकांश न्यूरॉन्स नष्ट हो जाते हैं. इसी वजह से कार्डिएक अरेस्ट के मामलों में डॉक्टर जितनी जल्दी हो सके सीपीआर  और अन्य उपचार शुरू करने की कोशिश करते हैं, ताकि दिमाग को नुकसान से बचाया जा सके.

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क्या दिमाग को फिर से एक्टिव किया जा सकता है?
हाल के वर्षों में कुछ प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने जानवरों के दिमाग की कुछ सेल को मौत के कई घंटे बाद तक सीमित स्तर पर एक्टिव करने में सफलता हासिल की है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी मृत व्यक्ति को फिर से जीवित किया जा सकता है. ये प्रयोग केवल सेल के स्तर पर किए गए थे और उनमें चेतना वापस नहीं आई थी.

साइंस के अनुसार, मौत के साथ ही दिमाग तुरंत पूरी तरह बंद नहीं होता. दिल की धड़कन रुकने के बाद कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटों तक दिमाग के कुछ सेल और विद्युत गतिविधियां मौजूद रह सकती हैं. हालांकि व्यक्ति की चेतना बहुत जल्दी समाप्त हो जाती है. दिमाग कितनी देर तक सक्रिय रहता है, यह परिस्थितियों और शरीर की स्थिति पर भी निर्भर करता है. इस विषय पर शोध अभी जारी हैं और आने वाले समय में इससे जुड़े और भी रोचक तथ्य सामने आ सकते हैं.

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