अमेजन जंगल का रहस्य... वैज्ञानिक भी नहीं जान पाए आखिर कितना बड़ा है और कौन रहता है?

अमेजन जंगल दुनिया का सबसे बड़ा वनक्षेत्र माना जाता है. यह इतना घना है कि जमीन सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंच पाती है. अमेजन से जुड़े कई रहस्यों का आजतक खुलाासा नहीं हो पाया है. यहां आज भी ऐसे लोग रहते हैं, जिन्हें बाकी दुनिया ने नहीं देखा है. क्योंकि, यह जंगल इतना घना और मुश्किलों से भरा है कि लोग इसके अंदरूनी हिस्से तक पहुंच ही नहीं पाते. इसका कई इलाके आज भी अनएक्सप्लोर्ड हैं. कहा जाता है कि अमेजन के बीच एक अलग ही दुनिया बसी हुई है, जो हमारी सभ्यता से बिलकुल अलग है.

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अमेजन के जंगल में रहने वाली कई रहस्यमय जनजातियों का आजतक नहीं हो पाया है खुलासा (Photo - Pexels) अमेजन के जंगल में रहने वाली कई रहस्यमय जनजातियों का आजतक नहीं हो पाया है खुलासा (Photo - Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:27 PM IST

अमेजन का नाम सुनते ही दिमाग में एडवेंचर ख्याल आता है. अमेजन नदी और जंगल खुद में कई रहस्यों को समेटे हुए है, जो आज भी इंसानों की नजर से दूर है. इस जंगल में जीव- जंतुओं की कई ऐसी प्रजातियां पलती है, जिनके बारे में वैज्ञानिकों को भी पता नहीं है. सिर्फ जानवर या पक्षी ही नहीं अमेजन के अंदर ऐसी जनजातियों का भी घर है, जो मानव सभ्याता के इतने विकास के बाद भी बाकी दुनिया की नजरों से दूर आज भी पाषाण काल में जी रहे हैं.  

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अमेजन जंगल  कम से कम 60 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो भारत के आकार से लगभग दोगुना है. यह पृथ्वी के सबसे बड़े वर्षावन के साथ-साथ जल प्रवाह की मात्रा और जल निकासी बेसिन के आकार के हिसाब से सबसे बड़ी नदी का घर भी है. यह दक्षिण अमेरिका के लगभग एक तिहाई हिस्से को कवर करता है. यह आठ देशों और कई अन्य राज्यों और जनजातीय सीमाओं तक फैला हुआ है. इसमें परस्पर जुड़े और एक-दूसरे पर चढ़े हुए इको सिस्टम का एक जटिल जाल मौजूद है.

अमेजन में लाखों प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से अधिकांश का अभी तक वैज्ञानिक पता नहीं लगा पाए हैं. यहां दुनिया के कुछ सबसे अनोखे वन्यजीव मौजूद हैं. यह जगुआर, हार्पी ईगल और गुलाबी  डॉल्फिन के लिए पृथ्वी के अंतिम आश्रयों में से एक है.अमेजन हजारों तरह के पक्षियों और तितलियों का भी घर है. वृक्षों पर रहने वाली प्रजातियों में दक्षिणी दो-पैर वाले स्लॉथ, बौने मार्मोसेट, सैडलबैक और सम्राट टैमरिन और गोल्डी बंदर शामिल हैं.

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अमेज़न एक विशाल जैवक्षेत्र है जो आठ तेजी से विकासशील देशों - ब्राजील, बोलीविया, पेरू, इक्वाडोर, कोलंबिया, वेनेजुएला, गुयाना और सूरीनाम  और फ्रांस के एक विदेशी क्षेत्र फ्रेंच गुयाना में फैला हुआ है. अमेजन में लगभग 50,000 पौधों की प्रजातियां उगती हैं, जिनमें से कुछ आधुनिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

अमेजन मीठे पानी की मछलियों की 2,400 प्रजातियों का घर है.  इनमें पिरान्हा, मीठे पानी की ईल और पिरारुकु भी शामिल हैं. यहां रेप्टाइल के 370 प्रकार अब तक खोजे गए हैं.  बोआ से लेकर कैमन तक, हर तरह के सरीसृप अमेजन के विभिन्न इलाकों में पाए जाते हैं. इसी तरह अमेजन कई ऐसी सारी ऐसी जनजातियों का घर, जो अब तक बाकी दुनिया से कटे हुए हैं. 

कई जनजातियों और आदिवासी समाज का घर है अमेजन
ब्राजील की सरकारी एजेंसी राष्ट्रीय स्वदेशी जन फाउंडेशन (फुनाई) जो देश की जनजातिया आबादी के हितों और संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित है. उनका मानना ​​है कि अमेजन जंगल के अकेले ब्राजील वाले इलाके में ही 113 जनजातियां हैं. माना जाता है कि इनमें से एक दर्जन से अधिक पेरू में हैं, जबकि अन्य बोलीविया, कोलंबिया और इक्वाडोर में हैं. इनमें से कई की अपनी अनूठी शिकार करने की तकनीक और भाषाएं हैं. जैसे-जैसे वर्षावन का अधिक से अधिक विनाश हो रहा है, इनकी उपस्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ती जा रही है.

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अमेजन को अपना घर कहने वाली जनजातियों में कैकाटाइबो जनजाति शामिल है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे मध्य पेरू में रहती हैं और कई अन्य जनजातियां हैं जिनके बारे में माना जाता है कि वे ब्राजील में रहती हैं. इनमें कराफाव्याना और वाओरानी जनजातियां शामिल हैं, जो यासुनी राष्ट्रीय उद्यान के पास रहती हैं और नियमित रूप से तेल कंपनियों और लकड़हारों के खतरे में रहती हैं.ब्राजील की जनजातियों की जीवनशैली में अत्यधिक विविधता है - कुछ खानाबदोश शिकारी और संग्राहक हैं, जबकि अन्य किसान के रूप में रहते हैं और फल, सब्जियां और अन्य फसलें उगाते हैं.

दुनिया की अलग- थलग कई जनजातियों का घर है अमेजन 
अमेजन में ऐसी कई जनजातीय समूह रहते हैं, जिनके बारे में बाकी दुनिया को पता तक नहीं है. वैज्ञानिकों और खोजकर्ताओं ने कई तरह के संकेत और दूर से ले गई तस्वीरों के जरिये यह पता लगाया है कि जंगल के अंदरूनी हिस्सों में ऐसे लोग भी रहते हैं, जिनके बारे में हम नही जानते हैं. पूरी दुनिया में  ऐसे सभी संपर्कविहीन जनजातियों में से, अमेजन में सबसे ज्यादा जनजातियां रहती है. 

कई जनजातियों का निरंतर एकांतवास काफी हद तक उनकी स्वयं की इच्छा पर निर्भर करता है. वर्षों से बाहरी लोगों यानी बाकी दुनिया की गतिविधियों की वजह से कई सारी जनजातियां नष्ट हो चुकी हैं, इसलिए जो बची हैं, वह घने जंगलों में छुप कर रह रहे हैं. बाकी दुनिया से कटे इन लोगों के धीरे- धीरे खत्म होने का कारण हिंसा और  बीमारी है. दुनिया से अलग-थलग होने का मतलब है कि उनमें फ्लू जैसी बीमारियों से लड़ने की क्षमता नहीं विकसित नहीं होती है. इसलिए छोटी सी बीमारी होने पर भी उनकी मौत हो जाती है. 

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इसलिए ऐसी जनजातियों में से अधिकांश की खोज या उनका अवलोकन दूर से ही किए जाते हैं. जैसे हेलीकॉप्टर के जरिए या सेंसर कैमरे के माध्यम से. द गार्जियन के मुताबिक, ब्राजील के वर्षावन में लगे स्वचालित कैमरों ने मासाको जनजाति की तस्वीरें दिखाई हैं, जो पर्यावरणीय खतरों के बावजूद फल-फूल रही है.

बाहरी दुनिया को इस समुदाय की पहली झलक दिखाती हैं और इस बात का और सबूत देती हैं कि आबादी बढ़ रही है. इस समूह को उनके इलाके से बहने वाली नदी के नाम पर मासाको कहा जाता है, लेकिन कोई नहीं जानता कि वे खुद को क्या कहते हैं, जबकि उनकी भाषा, सामाजिक संरचना और मान्यताएं रहस्य बनी हुई हैं.

1990 के दशक की शुरुआत से मासाको लोगों की संख्या कम से कम दोगुनी हो गई है. अनुमानित 200 से 250 लोग - ब्राजीलियाई राष्ट्रीय स्वदेशी जन फाउंडेशन (फुनाई) के अनुसार, जो दशकों से इस क्षेत्र की रक्षा के लिए काम कर रहा है. फुनाई ने कैमरे उस स्थान पर लगाए हैं, जहां वह समय-समय पर उनलोगों को उपहार के रूप में धातु के औजार छोड़ता है. 

 मासाको बस्तियों की तस्वीरें पहले भी फुनाई के उन अभियानों के दौरान ली गई हैं, जिनकी उपग्रह इमेजरी से पुष्टि हुई थी कि वे क्षेत्र वीरान हो चुके हैं. मासाको जनजाति के लोग तीन मीटर लंबे धनुषों से शिकार करते थे और मौसम के अनुसार जंगल में अपने गांवों को शिफ्ट करते रहते है. वे जमीन में हजारों नुकीले कांटे गाड़कर बाहरी लोगों को आने से रोकते थे, जो पैरों और टायरों को छेद सकते  हैं. 

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अमेजन क्षेत्र में अलग-थलग पड़े समुदायों की जनसंख्या में वृद्धि एक आम प्रवृत्ति है.2023 में, विज्ञान पत्रिका नेचर ने पेरू और वेनेजुएला के साथ ब्राजील की सीमाओं पर बढ़ती आबादी का खुलासा किया. उपग्रह चित्रों में बड़े कृषि भूखंड और विस्तारित लंबे घर दिखाई दिए. विशेषज्ञों ने जंगल में उन खानाबदोश समुदायों में भी इसी तरह की वृद्धि के प्रमाण देखे हैं जो फसलें नहीं उगाते या अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली बड़ी संरचनाएं नहीं बनाते.

 ऐसा ही एक समूह माटो ग्रोसो राज्य में स्थित पारदो नदी का वाहिवा है. इसकी देखरेख फुनाई के लिए जैर कैंडोर करते हैं. कैंडोर ने कहा कि आज, हमारा अनुमान है कि यहां 35-40 लोग हैं. जब हमने 1999 में यहां काम शुरू किया था, तब लगभग 20 लोग थे.

इंटरनेशनल वर्किंग ग्रुप ऑफ इंडिजिनस पीपल्स इन आइसोलेशन एंड इनिशियल कॉन्टैक्ट की एक मसौदा रिपोर्ट के अनुसार, अमेजन और ग्रान चाको क्षेत्र में 61 पुष्ट समुदाय रहते हैं, जबकि 128 समुदायों की अभी तक अधिकारियों द्वारा पुष्टि नहीं की गई है. रिपोर्ट के लेखक, एंटनोर वाज, 1988 में मासाको में संपर्क निषेध नीति लागू करने वाले पहले लोगों में से एक थे. 

वहां के आसपास के आदिवासी समुदाय अपने अधिक अलग समकक्ष समुदाय की रक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं. उदाहरण के लिए  इनमें एक्रे राज्य में पेरू-ब्राजील सीमा के पास रहने वाले मंचिनेरी, रोंडोनिया में रहने वाले अमोन्डावा और पूर्वी राज्य मारानाओ में बेसिन के दूसरे छोर पर रहने वाले गुआजारारा शामिल हैं.

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जावारी घाटी में – जहां 10 ऐसे समुदाय हैं जिनका अभी तक मानव जाति से संपर्क नहीं हुआ है. वे अमेजन के किसी भी आदिवासी क्षेत्र में सबसे अधिक है. इस इलाके में आसपास लगने वाले लोग जंगल के अंदर रहने वाले इन जनजातियों को बार से प्रोटेक्ट करते हैं. ताकि आधुनिक दुनिया से अलग जंगलों के बीच इनका अस्तित्व बना रहे.  

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