देहरादून में IMA के पास इस्लामिक इंस्टीट्यूट के लिए 20 एकड़ जमीन आवंटन पर क्यों बवाल हो रहा?

देहरादून में IMA के पास 20 एकड़ जमीन ट्रांसफर का मामला विवादों में आ गया है. इस्लामिक संस्थान के लिए हुआ आवंटन, प्लॉटिंग और सुरक्षा खतरे के आरोपों के बीच जांच के घेरे में आ गया है.

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देहरादून में IMA के पास इस्लामिक इंस्टीट्यूशन की जमीन पर विवाद (File Photo: ITG) देहरादून में IMA के पास इस्लामिक इंस्टीट्यूशन की जमीन पर विवाद (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • देहरादून,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:56 AM IST

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के पास मौजूद करीब 20 एकड़ ज़मीन विवादों में आ गई है. असल में नया विवाद जमीन के ट्रांसफर को लेकर शुरू हुआ है. कथित तौर पर यह जमीन एक इस्लामिक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने के लिए आवंटित की गई थी, जो जांच के दायरे में आ गई है. यह भी आरोप लग रहे हैं कि यहां पर इंस्टीट्यूशन वाला प्लॉट काटकर लोगों को बसाया जा रहा है. 

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कथित तौर पर यह ज़मीन करीब दो दशक पहले उस वक्त की कांग्रेस सरकार ने अलॉट की थी.

एजेंसी के मुताबिक, विकासनगर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट विनोद कुमार की शुरुआती जांच के मुताबिक, IMA के पास धौलास इलाके में मौजूद ज़मीन के प्लॉट को अब रहने के मकसद से छोटे-छोटे प्लॉट में बेचा जा रहा है, जिससे मिलिट्री ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशन की सिक्योरिटी को खतरा है.

सियासी बयानबाजी तेज...

पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार इस मामले में सख्त एक्शन लेगी. उन्होंने कहा, "इस मामले से यह साफ है कि ये लोग (कांग्रेस), जो मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाने की बात करते थे, अगर सत्ता में आते तो उसी दिशा में आगे बढ़ते. हम सख्त एक्शन लेंगे."

मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह मामला 2004 का है, जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे. उन्होंने कहा, "यह 2004 का पुराना केस है, जब नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे. उसके बाद, बीजेपी कई बार सत्ता में आई और वे इस अलॉटमेंट को कैंसल कर सकते थे."

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बीजेपी विधायक और राज्य पार्टी प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि मामले से जुड़ी रिपोर्ट्स ने एक बार फिर कांग्रेस सरकारों की 'खतरनाक साज़िशों' को सामने ला दिया है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या तिवारी सरकार के दौरान दी गई ज़मीन हरीश रावत की देख-रेख में इस्लामिक यूनिवर्सिटी बनाने के लिए थी?

चमोली ने कहा, "बीजेपी के विरोध और 2022 में जनता के कांग्रेस को नकारने की वजह से यह इरादा पूरा नहीं हो सका और अब ज़मीन पर लैंड माफिया कब्ज़ा कर रहे हैं."

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