उत्तराखंड के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक बाबा नीम करौली महाराज का कैंची धाम (कैंची धाम) अब पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन को लेकर विवादों में घिर गया है. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए अधिवक्ता धर्मेंद्र बर्थवाल को न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त कर दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार, नैनीताल के जिलाधिकारी और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है तथा मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है.
पिथौरागढ़ के रहने वाले ठाकुर सिंह डसीला के पत्र पर संज्ञान लेते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है. याचिका में कैंची धाम के प्रबंधन ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया गया है. साथ ही कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि जनहित याचिका की प्रति न्याय मित्र को उपलब्ध कराई जाए.
ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल
याचिकाकर्ता का दावा है कि बाबा नीम करौली द्वारा स्थापित इस धाम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी स्थानीय प्रशासन या रजिस्ट्रार कार्यालय में स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है. ट्रस्ट का नाम, कार्यालय का पता और ट्रस्टियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है. याचिका में तर्क दिया गया है कि विदेशी श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए एफसीआरए (FCRA) के नियमों का पालन और लेखा-जोखा पारदर्शिता होना अनिवार्य है.
अन्य धामों की तरह हो प्रबंधन
हाईकोर्ट में दी गई दलील के अनुसार, बद्रीनाथ-केदारनाथ और जागेश्वर मंदिर के लिए स्पष्ट विधिक व्यवस्था लागू है. इसी आधार पर मांग की गई है कि कैंची धाम का संचालन भी भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकृत होना चाहिए.
कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि याचिका की प्रति न्यायमित्र को उपलब्ध कराई जाए. अब इस गंभीर मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की गई है.
आपको बता दें कि कैंची धाम बाबा नीम करौली महाराज (महावीर प्रसाद या नीम करौली बाबा) द्वारा स्थापित एक आश्रम है जो नैनीताल जिले के कोटाबाग क्षेत्र में स्थित है. ये स्थान न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. यहां अमेरिकी लेखक राम दास (रिचर्ड अल्पर्ट) जैसे कई प्रसिद्ध व्यक्तियों ने दर्शन किए हैं, जिससे इसकी पहचान वैश्विक स्तर पर है.
अंकित शर्मा