एक कमरे में अब भी किताबें करीने से रखी हैं. नोट्स के पन्नों पर बने निशान बताते हैं कि यहां कोई अपने सपनों के लिए दिन-रात मेहनत करता था. मेज पर रखी कुछ पुरानी कॉपियां, मेडिकल की तैयारी से जुड़े नोट्स और दीवारों पर टंगे लक्ष्य आज भी वहीं हैं. बदल गया है तो बस इतना कि उन सपनों को देखने वाली आंखें अब हमेशा के लिए बंद हो चुकी हैं.
देहरादून के पटेल नगर क्षेत्र की चंद्रमणि कॉलोनी में रहने वाली 23 वर्षीय रिया की मौत ने न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है. पढ़ाई में बेहद होनहार मानी जाने वाली रिया ने 12वीं बोर्ड परीक्षा में 96.7 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी उसे डॉक्टर के रूप में देखना चाहते थे. वह खुद भी सफेद कोट पहनकर मरीजों की सेवा करने का सपना देखती थी. लेकिन अब उसी घर में मातम पसरा है, जहां कभी मेडिकल कॉलेज में दाखिले की चर्चाएं हुआ करती थीं.
एक सवाल, जिसका जवाब हर कोई खोज रहा है
चंद्रमणि कॉलोनी में इन दिनों एक ही सवाल सुनाई दे रहा है आखिर ऐसा क्या हुआ कि पढ़ाई में इतनी तेज, लक्ष्य को लेकर इतनी गंभीर और परिवार की उम्मीद कही जाने वाली बेटी अचानक जिंदगी से हार गई? रिया के पिता राजेश मल्ल अपनी बेटी को याद करते हुए बार-बार भावुक हो जाते हैं. उनकी आंखों में सिर्फ आंसू ही नहीं, बल्कि अनगिनत सवाल भी हैं. परिवार वालों के मुताबिक रिया बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रही. स्कूल के दिनों से ही उसकी पहचान एक मेधावी छात्रा के रूप में थी. उसने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया. जब दूसरे बच्चे खेलने में व्यस्त रहते थे, तब वह घंटों किताबों के बीच बैठी रहती थी.
96.7 प्रतिशत अंक और डॉक्टर बनने का सपना
रिया की शैक्षणिक उपलब्धियां उसकी मेहनत की कहानी कहती हैं. 12वीं बोर्ड परीक्षा में 96.7 प्रतिशत अंक लाकर राजा राम मोहन राय एकेडमी को टॉप किया था. तभी से वह डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी. तभी से वह डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी. परिवार को उम्मीद थी कि आगे चलकर वह मेडिकल क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल करेगी. इसी सपने को पूरा करने के लिए उसने नीट परीक्षा की तैयारी शुरू की. दिन-रात की मेहनत, कोचिंग, नोट्स और लगातार पढ़ाई उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके थे. परिजनों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में प्रवेश उसका सबसे बड़ा लक्ष्य था. वह अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर रहती थी और शायद ही कभी समय बर्बाद करती हो. नीट परीक्षा में भी उसने शादनार प्रदर्शन किया था. उसे व घर वालों को भी उम्मीद थी कि इस बार उसका सलेक्शन हो जाएगा. लेकिन जब से परीक्षा में पेपर लीक की बात सामने आई तब से वह काफी परेशान चल रही थी.
नीट की तैयारी और बढ़ता दबाव
परिवार के अनुसार रिया पिछले काफी समय से नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी. हाल ही में वह परीक्षा देकर लौटी थी. घर वालों के मुताबिक पेपर देने के बाद वह खुश दिखाई दी थी. उसे उम्मीद थी कि इस बार मेहनत रंग लाएगी. लेकिन इसके बाद परिस्थितियां बदलीं. उसने दोबारा पढ़ाई शुरू तो कर दी थी, लेकिन उसके चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी. उसकी मां और पिता को यह जरूर महसूस हो रहा था कि बेटी पहले की तुलना में ज्यादा चुप रहने लगी है, लेकिन शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी बड़ी मानसिक लड़ाई अकेले लड़ रही है.
मम्मी-पापा, आई लव यू
पुलिस के अनुसार मौके से एक नोट मिला है, जिसमें उसने अपने माता-पिता के लिए 'मम्मी-पापा आई लव यू' लिखा है. यह कुछ शब्द अब परिवार के लिए सबसे बड़ी याद बन गए हैं. किसी भी माता-पिता के लिए इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई हो सकता है कि जिस बच्चे के लिए उन्होंने जीवन भर सपने देखे, उसी की आखिरी लिखी पंक्तियां उन्हें जिंदगी भर रुलाने के लिए छोड़ जाएं. रिया घर में सबसे बड़ी संतान थी. उससे छोटी एक बहन और एक भाई हैं. परिवार वालों का कहना है कि बड़ी होने के कारण वह जिम्मेदार भी थी और भाई-बहनों के लिए प्रेरणा भी. घर में पढ़ाई का माहौल बनाने में उसकी बड़ी भूमिका थी. पड़ोसियों के अनुसार जब भी किसी बच्चे को पढ़ाई में कोई परेशानी होती, वह मदद करने को तैयार रहती थी. उसका व्यवहार शांत था और वह बेवजह किसी विवाद में नहीं पड़ती थी. यही वजह है कि उसकी मौत की खबर ने पूरे मोहल्ले को झकझोर दिया.
कमरे में किताबें हैं, लेकिन पढ़ने वाली नहीं
रिया का कमरा आज भी वैसे ही है, जैसा कुछ दिन पहले था. मेज पर रखी किताबें, परीक्षा की तैयारी से जुड़े नोट्स, अधूरी योजनाएं और भविष्य के सपने सब कुछ मौजूद है. नहीं है तो सिर्फ वह लड़की, जो इन सबके बीच बैठकर अपना भविष्य लिख रही थी. परिवार के करीबी बताते हैं कि घर का वह कमरा, जो कभी उम्मीदों से भरा रहता था, आज सन्नाटे से भरा हुआ है.
अंकित शर्मा