पड़ताल: वाराणसी में हादसा चूक नहीं, साफ-साफ लापरवाही का नतीजा, गईं 15 जानें

ये अजीब सा दस्तूर होता जा रहा है कि जबतक हादसे नहीं हो जाते तबतक सरकारें एक्शन में नहीं आतीं. मगर सवाल ये है कि हादसो पर लगाम क्यों नहीं लग रही.

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हादसे की तस्वीर हादसे की तस्वीर

अमित कुमार दुबे / रोहित कुमार सिंह / कुमार अभिषेक

  • वाराणसी,
  • 16 मई 2018,
  • अपडेटेड 1:14 PM IST

ये अजीब सा दस्तूर होता जा रहा है कि जबतक हादसे नहीं हो जाते तबतक सरकारें एक्शन में नहीं आतीं. मगर सवाल ये है कि हादसों पर लगाम क्यों नहीं लग रही. सवाल ये भी है कि वाराणसी में हुए इतने बड़े हादसे का जिम्मेदार कौन है. इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 11 लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं.

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बनारस के कैंट रेलवे स्टेशन के सामने बन रहे इस ओवरब्रिज पर 6 बड़े बड़े गार्डर लगे थे, जिनमें एक तरफ के तीन गार्डर सीधे सड़क पर आ गिरे थे. जिसके नीचे कारें दब गईं, एक मिनी बस दब गई, पैदल चलते लोग दब गए, ऑटो, साइकिल और रिक्शा वाले लोग दब गए. शुरुआती जांच में पता चला है कि पुल पर पत्थर के स्लैब लगाए जा रहे थे. इसी दौरान क्रेन टूटने की वजह से गार्डर नीचे से गुजर रहे लोगों और वहां खड़ी गाड़ियों पर जा गिरा.

एक सवाल उस प्रशासन के नाम जिसने इस को बनाने का जिम्मा संभाला था. एक सवाल उस पीडब्ल्यूडी विभाग पर जिसकी देखरेख में ये पुल बन रहा था लेकिन बनना तो दूर, पहले ही मौत का परवाना लेकर आ गया.

पहली लापरवाही

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बताया जा रहा है कि पुल का अधिकतर हिस्सा पूरा हो चुका है, बस आखिरी काम चल रहा था कि अचानक वो गिर गया. अब सवाल ये है कि ओवरब्रिज बनाते समय इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हो गई? उस रोड को उस तरह से क्यों नहीं घेरा गया जैसा दिल्ली में मेट्रो लाइन के निर्माण के समय घेरा जाता है.

दूसरी लापरवाही

ओवरब्रिज निर्माण के दौरान सड़क पर ट्रैफिक क्यों चलने दी गई थी? पीडब्ल्यूडी विभाग ने ओवरब्रिज बनाने के पहले एहतियात क्यों नहीं बरता? 2019 के चुनाव के मद्देनजर पुल बनाने की जल्दबाजी में क्या काम की क्वालिटी से समझौता किया गया.

सबसे बड़ा सवाल कि इतने बड़े हादसे का आखिर जिम्मेदार कौन है? यूपी के ने घटना पर खेद जता दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खेद जता दिया. योगी ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये का और घायलों को 2 लाख रुपये के मुआवजे का भी ऐलान कर दिया. लेकिन सरकार के इस मरहम से इस हादसे पर उठते सवाल खत्म नहीं होते. इन मुआवजों से इस हादसे का हिसाब बराबर नहीं होता, इस मुआवजे से इस हादसे में गई जानें वापस नहीं आ सकतीं.

हालांकि शुरुआती दिखावे के लिए सेतु निगम के चार अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है. चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर एस सी तिवारी, प्रोजेक्ट मैनेजर के आर सूदन, एई राजेन्द्र सिंह और जूनियर इंजीनियर लाल चंद को सस्पेंड कर दिया गया है.

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