Exclusive: 22 से नहीं 23 से शुरू होगा यूपी में कांग्रेस का प्रचार अभि‍यान, दलित मुद्दे के चलते बदला प्लान

संसद में अचानक दलित मुद्दा गर्माने के चलते कांग्रेस ने यूपी में अपना प्रचार अभियान एक दिन आगे बढ़ाया दिया है. पहले खबर थी कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने प्रचार अभियान के पहले चरण के लिए 22, 23 और 24 जुलाई की तारीख की घोषणा की है.

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शीला दीक्षित शीला दीक्षित

कुमार विक्रांत

  • लखनऊ,
  • 20 जुलाई 2016,
  • अपडेटेड 4:16 PM IST

संसद में अचानक दलित मुद्दा गर्माने के चलते कांग्रेस ने यूपी में अपना प्रचार अभियान एक दिन आगे बढ़ाया दिया है. पहले खबर थी कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने प्रचार अभियान के पहले चरण के लिए 22, 23 और 24 जुलाई की तारीख की घोषणा की है.

यूपी में दलित राजनीति को लेकर राज्यसभा में मायावती और बीजेपी को कांग्रेस फ्री हैंड नहीं देना चाहती. जिसके चलते पार्टी ने प्रचार अभियान टाल दिया है. गुलाम नबी आजाद, प्रमोद तिवारी, संजय सिंह, राजबब्बर ,पीएल पूनिया, यानी सभी दिग्गज नेताओं की कांग्रेस की राज्यसभा टीम यूपी से है. ऐसे में प्रचार में मशगूल होकर इतने बड़े मुद्दे को भुनाने में कांग्रेस पीछे नहीं रहना चाहती. कांग्रेस का चुनाव प्रचार 22 जुलाई की जगह 23 से शुरू किया जाएगा और 25 जुलाई तक जारी रहेगा.

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प्रचार अभियान के कार्यक्रम में कई तबदीलियां की गई हैं. पहले कांग्रेस ने लखनऊ से चुनावी यात्रा शुरू करने की बात कही थी. लेकिन अब लखनऊ की बजाय यूपी गेट (दिल्ली-यूपी बॉर्डर) से कांग्रेस की यात्रा शुरू होगी. वहीं पहले रात में रुकने का कार्यक्रम बरेली में था जो कि अब बदलकर मुरादाबाद कर दिया गया है.

पहले ये था कांग्रेस का प्लान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपना प्रचार अभियान तय कर दिया. इस सिलसिले के पहले चरण में 22, 23 और 24 जुलाई को कई बड़े शहरों में प्रचार यात्रा पहुंचेगी. इसके बाद पार्टी की सीएम उम्मीदवार शीला दीक्षित अपने पुश्तैनी घर उन्नाव जाएंगी.

मानसून सत्र के लिहाज से बना टाइम टेबल
18 जुलाई से मानसून का सत्र शुरु हो रहा था. इसलिए पार्टी की नई टीम ने रविवार 17 जुलाई को यूपी जाकर पदभार संभाला. अब शुक्रवार को संसद में प्रइवेट मेंबर बिल रहेगा, अहम काम-काज नहीं रहेगा. इस लिहाज से पार्टी ने 22 जुलाई से अपना शुरू करने का फैसला किया है. पार्टी आगे शनिवार और रविवार की छुट्टी का भी पूरी फायदा लेगी. इसलिए 22, 23 और 24 जुलाई यानी तीन दिन कांग्रेस का ये अभियान चलेगा.

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दरअसल, यूपी कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद खुद राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं. तो कांग्रेस की सीएम उम्मीदवार शीला दीक्षित के अलावा राज बब्बर, संजय सिंह, प्रमोद तिवारी और पीएल पुनिया राज्यसभा सांसद हैं. ऐसे में पार्टी का कोई भी कार्यक्रम संसद सत्र के हिसाब के बनाया जा रहा है. आखिर पार्टी को मालूम है कि राज्यसभा में अंकगणित सरकार को परेशान करता है और वहां पर वो सरकार कोई मौका देना नहीं चाहती. रविवार को यात्रा खत्म होने के बाद कांग्रेस के जो नेता सांसद हैं, उनको 25 जुलाई यानी सोमवार को दिल्ली आकर सदन में मौजूद रहने को भी कहा गया है.

यात्रा के दौरान रात में वहीं रुकेंगे नेता
यूपी में कार्यकर्ताओं और जनता के बीच सोई दिख रही की कोशिश में पार्टी अपने नेताओं को झोंकने की तैयारी में हैं. पूरे प्रदेश में निकलने वाली यात्रा का ये पहला चरण होगा. 22 जुलाई को सभी नेता दिल्ली से लखनऊ पहुंचेंगे. लखनऊ के कांग्रेस मुख्यालय से ये यात्रा शुरू होगी. एक खास रथ में कांग्रेस के नेता निकलेंगे.

लखनऊ से निकलकर रात में पहला पड़ाव बरेली होगा. यात्रा का रूट स्थानीय नेताओं से बात करके तय किया जा रहा है. इसके बाद अगले दिन मुरादाबाद और आसपास के इलाकों में निकला जाएगा. दूसरे दिन यानी 23 जुलाई की रात शाहजहांपुर में गुजरेगी. अगले दिन 24 जुलाई को यात्रा कानपुर पहुंचेगी.

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जितिन प्रसाद और अजय कपूर करेंगे इंतजाम
बरेली और शाहजहांपुर में नेताओं के कार्यक्रम, रूट और रुकने का इंतजाम शाहजहांपुर के पूर्व सांसद और कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण नेता जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद को सौंपा गया है. वहीं, कानपुर में ये जिम्मेदारी कई बार के विधायक अजय कपूर को दी गई है.

स्थानीय नेताओं को भी दी जाएगी जगह
, राज बब्बर, प्रमोद तिवारी, संजय सिंह और गुलाम लबी आजाद यात्रा में बतौर चेहरे मौजूद रहेंगे. यानी ब्राह्मण, राजपूत और मुस्लिम के इर्द-गिर्द राज बब्बर के सियासी ग्लैमर के साथ पार्टी की रणनीति जमीन पर नजर आएगी. स्थानीय जरूरत के हिसाब से जितिन प्रसाद, श्रीप्रकाश जायसवाल, इमरान मसूद, सलमान खुर्शीद, मोहसिना किदवई, आरपीएन सिंह, पीएल पुनिया जैसे नेताओं का भी यात्रा में इस्तेमाल होगा.

शीला जाएंगी अपने पुश्तैनी गांव, खेलेंगी ब्राह्मण कार्ड
कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण नेता पंडित उमाशंकर दीक्षित की बहू शीला दीक्षित यात्रा खत्म होने के बाद उन्नाव में अपने पुश्तैनी घर जाएंगी. यूपी में सीएम उम्मीदवार घोषित होने के बाद शीला ने कहा था कि मैं हूं. अपनी ससुराल जाकर शीला अपनी सियासत की नयी पारी का आगाज इसी लिहाज से करेंगी.

कांग्रेस 1989 में जब सत्ता से बाहर हुई तब एनडी तिवारी मुख्यमंत्री थे. पार्टी 27 साल बाद शीला को आगे कर बताना चाहती है कि 27 साल पहले कांग्रेस ने ब्राह्मण मुख्यमंत्री दिया था. उसके बाद यूपी में कोई ब्राह्मण मुख्यमंत्री नहीं बना. इसलिए अब फिर एक ब्राह्मण को कांग्रेस ही मुख्यमंत्री बनाएगी. 27 सालों से सत्ता से बाहर पार्टी के लिए ये काम बंजर जमीन पर फसल उगाने जैसा है. यह नामुमकिन तो नहीं लेकिन खासा मुश्किल जरूर है.

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