लेबर पेन उठा तो बेड के पास खड़ी हो गई महिला, डॉक्टर पहुंचते उससे पहले हो गई डिलीवरी, फर्श पर गिरा नवजात

तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के सरकारी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) केंद्र में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को समय पर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की मदद नहीं मिली, जिसके चलते उसने बेड के पास ही बच्चे को जन्म दे दिया. जन्म के बाद नवजात फर्श पर गिर गया, जिससे उसे चोट आई है.

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तेलंगाना के सरकारी अस्पताल में भर्ती थी महिला. (Photo: Screengrab) तेलंगाना के सरकारी अस्पताल में भर्ती थी महिला. (Photo: Screengrab)

अब्दुल बशीर

  • हैदराबाद,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

तेलंगाना के भद्राद्री कोठागुडेम जिले के सरकारी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) केंद्र में एक गर्भवती महिला को समय पर इलाज नहीं मिला. दर्द इतना बढ़ गया कि उसने अस्पताल के बेड के पास ही बच्चे को जन्म दे दिया. जन्म लेते ही नवजात फर्श पर गिर पड़ा और उसके सिर में चोट लग गई. इसके बाद अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया.

दम्मापेट की रहने वाली भवानी नाम की गर्भवती महिला को उसकी पहली डिलीवरी के लिए सरकारी मैटरनिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेबर पेन (प्रसव पीड़ा) बर्दाश्त न कर पाने के कारण वह बिस्तर के पास खड़ी हो गई और मेडिकल स्टाफ के पहुंचने से पहले ही बच्चे को जन्म दे दिया. परिवार का आरोप है कि महिला को तेज लेबर पेन होने के बावजूद डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने कोई ध्यान नहीं दिया. 

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परिजनों का कहना है कि जैसे ही बच्चे का जन्म हुआ, नवजात सीधे फर्श पर गिर पड़ा. इससे उसके सिर में चोट लगी. मेडिकल स्टाफ कुछ मिनट बाद मौके पर पहुंचा. इस बीच भवानी को भी काफी ज्यादा ब्लीडिंग हुई, जिससे वार्ड में मौजूद दूसरे मरीज और उनके परिजन भी घबरा गए.

यह भी पढ़ें: अस्पताल के बाथरूम में 14 वर्षीय लड़की ने दिया बच्चे को जन्म, टॉयलेट के होल में फंसा मिला नवजात

घटना के बाद अस्पताल में माहौल गर्म हो गया. भवानी के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को संभाला.

जिस लापरवाही का आरोप परिवार लगा रहा है, अस्पताल प्रशासन उससे साफ इनकार कर रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि महिला या उसके परिजनों ने यह नहीं बताया कि प्रसव शुरू हो चुका है. 

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अस्पताल का दावा है कि अगर समय पर सूचना मिलती, तो डॉक्टर और नर्स तुरंत पहुंचते और महिला को लेबर रूम में शिफ्ट कर सुरक्षित डिलीवरी कराई जाती. अस्पताल का यह भी कहना है कि घटना के तुरंत बाद मां और नवजात दोनों का इलाज शुरू कर दिया गया. बच्चे की हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है.

अब जांच पर टिकी हैं निगाहें

एक तरफ परिजन हैं, जो इसे सरकारी अस्पताल की गंभीर लापरवाही बता रहे हैं. दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन है, जो सभी आरोपों को खारिज कर रहा है. ऐसे में सवाल है कि अगर महिला प्रसव पीड़ा में थी, तो उसकी निगरानी क्यों नहीं हो रही थी? और अगर अस्पताल का दावा सही है, तो क्या प्रसव के करीब पहुंची मरीजों की स्थिति पर नजर रखने की व्यवस्था पर्याप्त थी? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे. फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है.

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