प्यासा हैदराबाद! रोज 20 हजार टैंकरों की मांग, पानी को तरसे लोग

भीषण गर्मी, गिरते भूजल स्तर और कमजोर मानसून ने हैदराबाद को गंभीर जल संकट की ओर धकेल दिया है. कई इलाकों में नलों का पानी दिनों तक नहीं पहुंच रहा, जबकि टैंकरों की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है. हालात ऐसे हैं कि लोगों को पानी राशन की तरह इस्तेमाल करना पड़ रहा है और विपक्ष सरकार को घेरने में जुट गया है.

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हैदराबाद में लोग सरकारी टैंकरों से पानी भरने के लिए लंबी कतारों में इंतजार कर रहे, पानी भी कई जगह गंदा आ रहा हैदराबाद में लोग सरकारी टैंकरों से पानी भरने के लिए लंबी कतारों में इंतजार कर रहे, पानी भी कई जगह गंदा आ रहा

अब्दुल बशीर

  • हैदराबाद,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:25 AM IST

बढ़ते तापमान, घटते भूजल स्तर और मानसून की देरी से हुई बारिश की वजह से हैदराबाद हाल के वर्षों में अपने सबसे गंभीर पेयजल संकटों में से एक का सामना कर रहा है. कई इलाकों में निवासी अनियमित जल सप्लाई से जूझ रहे हैं, जिसके चलते कई लोग निजी और सरकारी टैंकरों पर निर्भर होने को मजबूर हैं. शहर में रोजाना की मांग बढ़कर 20,000 टैंकर्स तक पहुंच गई है

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संकट की भयावहता से टैंकरों की मांग में तेज वृद्धि हुई है, मई के आखिर सप्ताह के दौरान रोज बुकिंग 15,000 से अधिक हो गई, जो हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (HMWS&SB) द्वारा किए गए अनुमानों से काफी अधिक है.

एचएमडब्ल्यूएस एंड एसबी के प्रबंध निदेशक के अशोक रेड्डी के अनुसार, वर्षों से चालू रहे बोरवेल के सूख जाने के कारण स्थिति और भी खराब हो गई है.

उन्होंने कहा, 'आम तौर पर जनवरी से टैंकरों की बुकिंग बढ़ने लगती है. पहले हमें हैदराबाद भर में प्रतिदिन लगभग 1,500 से 2,000 टैंकरों की बुकिंग मिलती थी. इस साल भूजल स्तर गिरने और पिछले चार-पांच वर्षों में कभी न सूखने वाले कई बोरवेल सूख जाने के कारण मांग में तेजी से वृद्धि हुई है.'

गर्मी के मौसम में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए, जल बोर्ड ने प्रतिदिन लगभग 13,000 टैंकरों को पानी की सप्लाई करने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार किया था.

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हालांकि, मांग उम्मीद से कहीं अधिक थी, जिसके चलते अधिकारियों को तीन शिफ्टों में सेवाएं चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा.

अधिकारियों ने कहा कि 24 घंटों के भीतर टैंकरों द्वारा पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है, हालांकि देरी की खबरें लगातार आ रही हैं, खासकर शहर के पश्चिमी हिस्सों में जहां भूजल का क्षरण अधिक गंभीर है.

कुछ क्षेत्रों में, नगरपालिका द्वारा पानी की सप्लाई हर चार से पांच दिनों में केवल एक बार की जाती है, जिससे परिवारों को दैनिक उपयोग के लिए पानी की राशनिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

हैदराबाद के मुशीराबाद के एक निवासी ने कहा, 'पानी की सप्लाई घटकर हर चार से पांच दिन में एक बार हो गई है. टैंकर बुक करने के बाद भी वे टाइम पर उपलब्ध नहीं होते. हमें रोजमर्रा की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में बहुत कठिनाई हो रही है.'

पानी की क्वालिटी को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं. रसूलपुरा के एक निवासी ने आरोप लगाया, 'पानी की कमी के अलावा, नलों में गंदा पानी आ रहा है. बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. लोग पीने के पानी की कमी के साथ-साथ स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी चिंतित हैं.'

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विपक्ष आक्रामक

बिगड़ती स्थिति पर राजनीति भी तेज हो गई है. तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष रामचंद्र राव ने कांग्रेस सरकार पर इस मुद्दे को हल करने में विफल रहने का आरोप लगाया है.

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने भी जल संकट को लेकर कांग्रेस सरकार पर हमला करते हुए दावा किया कि पिछली बीआरएस सरकार के दौरान हैदराबाद में पानी या बिजली की कमी नहीं थी.

शहर को मानसून से राहत का इंतजार

हैदराबाद को फिलहाल प्रतिदिन 700 से 750 मिलियन गैलन पीने के पानी की जरूरत है, और तापमान में वृद्धि के साथ यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है.

अधिकारी गोदावरी चरण-II और चरण-III पेयजल परियोजनाओं पर उम्मीदें लगाए बैठे हैं, जिनसे अगले साल तक लगभग 300 एमजीडी (प्रति वर्ष) पानी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है.

फिलहाल, शहर की तात्कालिक उम्मीदें आसमान पर टिकी हैं. जब तक पर्याप्त मानसून की बारिश नहीं होती, हैदराबाद की टैंकरों पर बढ़ती निर्भरता जारी रहने की संभावना है.

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