संसद नहीं चलने देना ट्रैफिक जाम जैसा: जावेद अख्तर

जावेद अख्तर का कहना है कि एक दूसरे का सम्मान करने के साथ विश्वास किए जाने की आवश्यकता है जिससे कि सौहार्दपूर्वक साथ काम किया जा सके.

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जावेद अख्तर ने संसद में गतिरोध खड़े किए सवाल जावेद अख्तर ने संसद में गतिरोध खड़े किए सवाल

खुशदीप सहगल

  • नई दिल्ली,
  • 24 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 5:51 PM IST

संसद पर चल रहे गतिरोध पर जानेमाने गीतकार और राज्यसभा के पूर्व सदस्य जावेद अख्तर ने संसद में रूकावट की तुलना ट्रैफिक जाम से की है. जावेद के मुताबिक ट्रैफिक जाम जैसे ही संसद में रुकावट के दौरान सांसद गलत दिशा से ओवरटेक करने की कोशिश करते हैं और ट्रैफिक सिग्नल तोड़ते हैं.

का कहना है कि एक दूसरे का सम्मान करने के साथ विश्वास किए जाने की आवश्यकता है जिससे कि सौहार्दपूर्वक साथ काम किया जा सके.

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जावेद अख्तर ने ये विचार 'व्हाट आफ्टर मनी एंड फेम' में व्यक्त किए हैं. इस किताब को सोनिया गोलानी ने लिखा है. किताब में देश की कई हस्तियों से बातचीत को शामिल किया गया है.

ट्रैफिक जाम करने वाले खुद भी फंसेंगे

ने कहा, 'मैं लेफ्ट ड्राइव करता हूं. आप लेफ्ट ड्राइव करते हैं. लेकिन जब आप सिग्नल देखते हैं और गरिमा वाले व्यक्ति हैं तो रुक जाते हैं. क्या ये नैतिकता है? नहीं क्योंकि अगर आप राइट साइड ड्राइव करने लगेंगे तो आप खुद को चोट पहुंचाएंगे या दूसरे को चोट पहुंचाएंगे. या फिर आप ट्रैफिक जाम कर देंगे और उसमें खुद भी फंस जाएंगे.'

जावेद अख्तर से सवाल पूछा गया कि लोग संसद में अपने प्रतिनिधियों को चुन कर भेजते हैं लेकिन बदले में उन्हें क्या मिलता है- गतिरोध और रुकावट? इस पर जावेद का जवाब था- 'निश्चित तौर पर! ये सब ट्रैफिक जाम जैसा है. वहां अव्यवस्था है क्योंकि ये ऐसा ही है कि संसद में लोग गलत दिशा से ओवरटेक करने की कोशिश कर रहे हैं या ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.'

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जावेद ने संसद में अपने अनुभवों का भी जिक्र किताब में किया है. साथ ही ये भी बताया कि अवार्ड उनके लिए क्या मायने रखते हैं. साथ ही फिल्मों को लेकर भी जावेद ने अपनी राय साझा की. जावेद से ये सवाल भी पूछा गया कि आदमी के लिए कितना धन पर्याप्त होता है.

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