कैदियों के अच्छे दिन! SC का आदेश- खुली जेल बनवाने के लिए राज्यों से बात करे केंद्र

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि खुली जेल के प्रारूप और व्यवस्था के बारे में गृह मंत्रालय विशेषज्ञों के साथ मिलकर स्टडी कराए.

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सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 8:20 PM IST

कैदखानों और उनमें बंद कैदियों की दुर्दशा पर अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र से तेज कदम बढ़ाने को कहा है. कोर्ट ने कहा कि राज्यों के साथ बैठकर इस बारे में स्टडी कराई जाए. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कहा कि सभी राज्यों और संघशासित क्षेत्रों की जेलों के महानिदेशक फरवरी 2018 से पहले हफ्ते में ओपन प्रिजन यानी खुली जेल बनाने को लेकर मीटिंग करे. उसमें खुली जेल को लेकर राज्यों के विचार, सुझाव और आइडिया लिए जाएं.

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मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि खुली जेल के प्रारूप और व्यवस्था के बारे में गृह मंत्रालय विशेषज्ञों के साथ मिलकर स्टडी कराए. ने कहा कि ओपन प्रिजन का कांसेप्ट क्या होगा, सुरक्षा प्रारूप कैसा होगा, कैदियों को कैसे रखा जाएगा इन तमाम मुद्दों पर गहराई से अध्ययन जरूरी है.

कोर्ट ने कहा कि कोई कैदी पहली बार किसी अपराध में जेल गया है तो उसे जेल में रखना कितना सही होगा? या फिर मामूली अपराधों में जेल गए कैदियों को ओपन में रखना कितना सही होगा इन सब बातों पर गौर किया जाना जरूरी है.

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हमें आमराय से आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि जेल मैनुअल को लेकर सभी राज्य सरकारों और संघशासित क्षेत्रों की अपनी-अपनी गाइड लाइन हैं, लिहाजा कोई मुगालता ना रहे.

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सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि मॉडर्न प्रिजन मैनुअल का ड्राफ्ट सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित राज्यों को भेज दिया गया है. इससे जेलों में कैदियों की आत्महत्या की घटनाएं रोकने में आसानी होगी. ड्राफ्ट के मुताबिक सभी राज्यों और केंद्र शासित को ये बताना होगा कि जेलों में कितनी मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं और कितनी अप्राकृतिक.

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