मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कठेरिया और निहालचंद सहित 6 मंत्री कैबिनेट से आउट

राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद निहाल चंद, रामशंकर कठेरिया, सांवरलाल जाट, मनसुख बसावा, मोहन कुंडारिया और जीएम सिद्धेश्वर ने मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया. उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है.

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रामशंकर कठेरिया रामशंकर कठेरिया

केशव कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2016,
  • अपडेटेड 11:36 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो साल के कार्यकाल में मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार के बाद छह मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखा गया गया है. इनमें से पांच ने मंगलवार को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया, जिसे मंजूर भी कर लिया गया है.

राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद निहाल चंद, रामशंकर कठेरिया, सांवरलाल जाट, मनसुख बसावा, मोहन कुंडारिया ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जबकि जीएम सिद्धेश्वर बुधवार को मंत्री पद से इस्तीफा देंगे.

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दो साल के रिपोर्ट कार्ड पर फैसला
बताया जा रहा है कि सरकार के दो साल के कामकाज के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर ने पहले ही कुछ मंत्रियों की छुट्टी होने के संकेत दे दिए थे. वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी जल्द ही संगठन में कुछ नए लोगों को जोड़ने वाले हैं. इसके लिए भी उन्हें कुछ बड़े चेहरों की दरकार थी.

विवादों में थे निहाल और कठेरिया
पंचायती राज के साथ ही रसायन और उर्वरक राज्यमंत्री निहाल चंद राजस्थान के गंगानगर सीट से सांसद चुने गए थे और पहली बार में ही ही टीम मोदी में शामिल हो गए थे. वहीं, मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री राम शंकर कठेरिया यूपी के आगरा से सांसद हैं और दलित समुदाय में उनकी बेहतर पकड़ मानी जाती है. दोनों ही नेताओं पर मंत्री रहते हुए विवाद हुए थे.

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ये था मंत्रियों का प्रोफाइल
राजस्थान के अजमेर सीट से सांसद सांवर लाल जाट मोदी सरकार में जल संसाधन राज्यमंत्री थे. वहीं मनसुख बसावा केंद्र सरकार में बतौर आदिवासी कल्याण राज्य मंत्री काम देख रहे थे. वह गुजरात के भरूच से सांसद हैं. गुजरात के ही राजकोट से सांसद मोहन कुंडारिया केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री बनाए गए थे. वहीं जीएम सिद्धेश्वरा कर्नाटक के देवनगेरे से बीजेपी सांसद हैं. में वह बतौर भारी उद्योग और सार्वजनिक उद्यम राज्य मंत्री का काम देख रहे थे.

राज्यों में चुनाव को देखते हुए छुट्टी
इस्तीफा देने वाले 6 मंत्रियों में कर्नाटक और यूपी से एक-एक और राजस्थान और गुजरात से दो-दो मंत्री शामिल हैं. गुजरात, कर्नाटक और यूपी में विधानसभा का चुनाव नजदीक है. बीजेपी कर्नाटक में और यूपी में सरकार बनाना चाह रही है वहीं गुजरात में लगातार वापसी की योजना भी बना रही है. इसलिए इन सीनियर नेताओं को चुनाव के लिहाज से राज्यों में संगठन का काम बढ़ाने पर लगाया जा सकता है.

कठेरिया ने कहा- पार्टी का आदेश सिर-आंखों पर
इस्तीफा देने से पहले सोमवार को कहा, 'मैं पार्टी का कार्यकर्ता हूं और पार्टी जहां भी कहेगी मैं काम करने को तैयार हूं. पहले भी संगठन में था, अभी भी संगठन में काम करूंगा. उत्तर प्रदेश के चुनावों में और ज्यादा मेहनत करूंगा और उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनेगी. मुझे मंत्रिमंडल से हटाए जाने का कोई दुख नहीं है.'

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