मोदी सरकार ने 2 साल बाद संसद में मानी नोटबंदी से मौत की बात

जेटली ने बताया कि एसबीआई ने नोटबंदी के दौरान तीन कर्मचारियों और एक ग्राहक की मौत होने की जानकारी दी. बैंक ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में 44.06 लाख रुपये दिये. इसमें से तीन लाख रुपये मृतक ग्राहक के परिजनों को दिये गए.

Advertisement
संसद परिसर में अरुण जेटली (फोटो- PTI) संसद परिसर में अरुण जेटली (फोटो- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 6:03 PM IST

मोदी सरकार ने कहा कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिये बैंकों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मुहैया कराया है और इसमें बैंक की लाइन में सिर्फ एक ग्राहक और बैंक के तीन कर्मचारियों की मौत हुई है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा को एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि नोटबंदी के दौरान नोट बदलने के लिये लाइन में खड़े होने से, सदमे से और काम के दबाव आदि से व्यक्तियों और बैंक के कर्मचारियों की मौत और परिजनों को दिये गये मुआवजे के बारे में एसबीआई को छोड़कर सरकारी क्षेत्र के किसी बैंक ने कोई सूचना नहीं दी है.

Advertisement

जेटली ने बताया कि एसबीआई ने नोटबंदी के दौरान तीन कर्मचारियों और एक ग्राहक की मौत होने की जानकारी दी. बैंक ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे के रूप में 44.06 लाख रुपये दिये. इसमें से तीन लाख रुपये मृतक ग्राहक के परिजनों को दिए गए.

सांसद ने सरकार से मांगा ब्योरा

सीपीएम सांसद ई करीम ने 500 रूपये और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस लेने, नष्ट करने और नये नोट जारी करने पर रिजर्व बैंक की ओर से खर्च की गयी धनराशि साथ ही नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने वालों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई पर हुआ व्यय अपनी लेखा रिपोर्ट में अलग से नहीं दर्शाया है.

Advertisement

सरकार की ओर से बताया गया कि नोटबंदी से पहले 2015-16 में नोटों की छपाई पर 34.21 अरब रुपये खर्च हुये थे जबकि 2016-17 में यह राशि 79.65 अरब रुपये और 2017-18 में 49.42 अरब रुपये थी. उन्होंने नोटबंदी से उद्योग और रोजगार पर पड़े असर का कोई अध्ययन कराने के सवाल पर कहा कि सरकार ने इस संबंध में कोई विशिष्ट अध्ययन नहीं कराया है.

बता दें कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन देते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था. इसके बाद से 1000 और 500 के नोटों की वैधता खत्म हो गई थी. फैसले के बाद बैंकों में नए कैश की काफी किल्लत रही और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटबंदी के दौरान कैश के लिए लाइनों में लगने की वजह से हुए हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »