राजस्थान में सर्कुलर के जरिए दिया गया जाट आरक्षण, आंदोलन स्थगित

राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के दो जिलों के जाटों के आरक्षण के लिए सर्कुलर जारी कर दिया. राजस्थान सरकार की जाटों के आरक्षण के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार राज्यमंत्रीमण्डल ने जाट आरक्षण से वंचित रह गए दो जिलों के जाटों को ओबीसी में शामिल दूसरे जिलों के जाटों की तरह हीं ओबीसी आरक्षण देने का फैसला किया है.

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शरत कुमार

  • धौलपुर,
  • 23 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 11:55 PM IST

राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के दो जिलों के जाटों के आरक्षण के लिए सर्कुलर जारी कर दिया. राजस्थान सरकार की जाटों के आरक्षण के लिए जारी अधिसूचना के अनुसार राज्यमंत्रीमण्डल ने जाट आरक्षण से वंचित रह गए दो जिलों के जाटों को ओबीसी में शामिल दूसरे जिलों के जाटों की तरह हीं ओबीसी आरक्षण देने का फैसला किया है. जाटों के आरक्षण दिए जाने की अधिसूचना जारी होने के बाद भरतपुर के जाट आंदोलनकारियों ने कल से शुरु होनेवाले जाट आरक्षण आंदोलन को स्थगित करते हुए जश्न मनाया. भरतपुर के कांग्रेस विधायक और पूर्व महराजा विश्वेंद्र सिंह ने इसे जाटों की बड़ी जीत मानते हुए मिठाइयां बांटीं.

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दरअसल, 10 अगस्त 2015 को हाईकोर्ट ने धौलपुर और भरतपुर के जाटों को दिए जानेवाले लगाते हुए कहा था कि ये आरक्षण संवैधानिक तरीके से नही दिए जा रहे हैं. केंद्र में बीजेपी की अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली सरकार ने जब राजस्थान के जाटों को आरक्षण दिया था तो उसमें भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को आरक्षण का लाभ नही दिया गया था.

इसके पीछे ये दलील दी गई थी कि भरतपुर और धौलपुर में जाट राजघराने हैं और इन दो जिलों में जाट शासक जाति हैं न कि पिछड़ी जाति हैं. हालांकि, तब राज्य में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार ने दोनों जिलों के जाटों को भी आरक्षण दे दिया था. जिसे हाईकोर्ट ने रोक दिया था. इसके बाद से ही इन दो जिलों में जाट आंदोलन भड़का हुआ था. इनमें से धौलपुर के की पूर्व महारानी वसुंधरा राजे हैं. हालांकि, ऐसा माना जा रहा है कि राज्य सरकार के आरक्षण देने के ताजा सर्कुलर को भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है.

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