कर्नाटक CM सिद्धारमैया की पत्नी को जमीन के बदले प्लॉट का क्या है पूरा मामला, जिस पर मचा हुआ है बवाल?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के पास मैसूर जिले के केसारे गांव में 3 एकड़ और 16 गुंटा जमीन थी. ये जमीन पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन ने उन्हें गिफ्ट में दी थी. इस जमीन को MUDA ने विकास के लिए अधिग्रहित किया था और इस जमीन के बदले पार्वती को 2021 में विजयनगर क्षेत्र में कुल 38,283 वर्ग फीट के प्लॉट दिए गए थे.

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2024,
  • अपडेटेड 12:34 PM IST

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया विवादों में हैं. आरोप है कि सिद्धारमैया की पत्नी को जमीन के बदले जमीन आवंटन में घोटाला किया गया है. ये पूरा विवाद तीन एकड़ जमीन से जुड़ा है. हालांकि, सिद्धारमैया ने दावा किया कि मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) ने उनसे (पत्नी) अवैध रूप से जमीन अधिग्रहित कर ली थी. सिद्धारमैया का कहना था कि उनकी पत्नी मुआवजे की हकदार थीं, इसलिए उन्हें जमीन के बदले दूसरी जगह जमीन दी गई है. अगर बीजेपी को लगता है कि हमें दी गई जमीन ज्यादा महंगी है तो वो जमीन वापस ले ली जाए और हमें हमारा हक दे दिया जाए.

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दरअसल, सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती के पास मैसूर जिले के केसारे गांव में 3 एकड़ और 16 गुंटा जमीन थी. ये जमीन पार्वती के भाई मल्लिकार्जुन ने उन्हें गिफ्ट में दी थी. इस जमीन को MUDA ने विकास के लिए अधिग्रहित किया था और इस जमीन के बदले पार्वती को 2021 में विजयनगर क्षेत्र में कुल 38,283 वर्ग फीट के प्लॉट दिए गए थे. ये प्लॉट दक्षिण मैसूर के एक प्रमुख इलाके में हैं. आरोप है कि विजयनगर के प्लॉट का बाजार मूल्य केसारे में उनकी मूल जमीन से बहुत ज्यादा है, जिसके कारण बीजेपी ने घोटाले का आरोप लगाया है. पार्वती को यह जमीन पूर्ववर्ती बीजेपी शासन के दौरान आवंटित की गई थी.

MUDA 'घोटाले' में सीएम परिवार का क्या कनेक्शन?

कर्नाटक में विधानसभा सत्र से ठीक पहले यह पूरा विवाद सामने आया है. मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण पर हजारों करोड़ रुपये की भूमि के बदले भूमि आवंटन के मामले में अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं. सीएम सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती भी जमीन के बदले जमीन पाने वालीं लाभार्थियों में से एक हैं, जिसे 'अवैध रूप से' जमीन आवंटित किए जाने का आरोप लगा है. 

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रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि, पार्वती की तीन एकड़ जमीन मैसूर जिले के केसारे गांव में थी. MUDA ने इस जमीन के अधिग्रहण के बदले मुआवजे के तौर पर विजयनगर में जो जमीन दी, वो पॉश इलाका है. इसलिए इसका बाजार मूल्य मैसूर जिले के केसारे गांव की तुलना में कहीं ज्यादा है. यही विवाद का मुख्य मुद्दा है, जो कई सवाल खड़े करता है. हालांकि, मुआवजा के तौर पर जमीन आवंटन की पूरी प्रक्रिया साल 2021 में पूरी हुई और उस समय राज्य में बीजेपी की सरकार थी.

'जमीन की कीमत से कम मुआवजा मिला'

सीएम सिद्धारमैया के कानूनी सलाहकार एएस पोन्नाना कहते हैं कि 50:50 नियम के तहत पार्वती को विजयनगर में वैकल्पिक जमीन दी गई. ये जमीन केसारे गांव में उनकी मूल जमीन की तुलना में बाजार मूल्य में बहुत कम थी. पोन्नाना आगे कहते हैं कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार, पार्वती सरकार से ₹57 करोड़ ज्यादा पाने की हकदार हैं, क्योंकि उन्हें मुआवजे के रूप में जो प्लॉट दिए गए, उनका मूल्य सिर्फ ₹15-16 करोड़ है. यानी केसारे गांव में उनकी मूल स्वामित्व वाली जमीन से बहुत कम है.

अगर कीमत वाली जमीन मिली थी तो इसे स्वीकार क्यों किया? इस सवाल पर सीएम के कानूनी सलाहकार कहते हैं कि परिवार अब और लड़ना नहीं चाहता था या उस जमीन को पाने में देरी नहीं करना चाहता था जिसके वे हकदार थे. इसलिए सरकार से मुआवजा के तौर पर विजयनगर साइट के लिए समझौता किया गया. एएस पोन्नाना ने कहा, जमीन के बदले जमीन मामले में पार्वती को नुकसान हुआ है. केसारे में पार्वती की 1,48,104 वर्ग फीट जमीन अधिग्रहित हुई है. मुआवजे के रूप में उन्हें दक्षिण मैसूर के विजयनगर में 38,284 वर्ग फीट जमीन मिली है. यह भी कहा जा सकता है कि सरकार पर पार्वती का ₹57 करोड़ बकाया हो गया.

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50:50 स्कीम क्या है?

2020 में MUDA द्वारा लाए गए 50:50 नियम के अनुसार, जिसकी भूमि अधिग्रहित होती है, वो विकसित भूमि में 50% साइट पाने के हकदार हैं. बाकी बिक्री के लिए होगा. 50:50 योजना पर विवाद बढ़ा तो शहरी विकास मंत्री बिरथी सुरेश को 2023 में इस योजना को रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा. आरोप है कि निरस्तीकरण के बाद भी जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित हुईं, उन्हें 50:50 योजना के तहत साइटें आवंटित की जाती रहीं. बीजेपी नेता आर अशोक के मुताबिक, बड़ी संख्या में जमीनें उन प्रभावशाली लोगों को आवंटित की गईं, जिन्होंने खुद की जमीन अधिग्रहित होने का दावा किया था. इससे सरकार को हजारों करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है.

बीजेपी सिर्फ झूठे आरोप लगा रही

इस संबंध में खुद सिद्धारमैया स्पष्ट करते हैं कि 2014 में जब मैं सीएम था तो पत्नी ने मुआवजे के लिए आवेदन किया था. हालांकि, मैंने अपनी पत्नी को यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि जब तक मैं सीएम हूं तब तक मुआवजे के लिए आवेदन दायर ना की जाए. बाद में 2020-21 में जब बीजेपी की सरकार थी, तब पत्नी ने मुआवजे के लिए आवेदन दायर किया था और सरकार ने उन्हें ये जमीन आवंटित की. बीजेपी सिर्फ मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाने की कोशिश कर रही है. 

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सिद्धारमैया ने कहा, MUDA ने 3 एकड़ और 16 गुंटा भूमि का अधिग्रहण किया, जिसकी कीमत 60 करोड़ रुपये है. हमारी जमीन पर भी कब्जा हो गया था और इसलिए उन्होंने (MUDA) हमें प्लॉट दिया है. MUDA को हमें जमीन के बदले जमीन देनी चाहिए. हमने कोई विशेष क्षेत्र नहीं मांगा था. हमारी जमीन को पार्क बना दिया गया है. क्या मुझे अपनी जगह छोड़ देनी चाहिए. गलती किसकी है? क्या मैं दोषी हूं? राज्य में सत्ता किसकी थी? 

जांच के लिए दो आईएएस की कमेटी गठित

सिद्धारमैया का कहना था कि MUDA चाहे तो भूमि वापस ले सकता है, लेकिन इसके लिए उसे मुआवजा देना चाहिए. मौजूदा नियम के अनुसार जमीन के बदले जमीन के लिए मूल जमीन का 50 प्रतिशत मुआवजा दिया जाना चाहिए. उन्होंने मामले की जांच का जिक्र किया और कहा, शहरी विकास मंत्री बिरथी सुरेश ने जांच कर रिपोर्ट सौंपने के लिए दो आईएएस अधिकारियों को नियुक्त किया है. सीएम ने कहा, मेरी पत्नी का मामला गड़बड़ी का केस नहीं है.

बीजेपी ने बताया है इसे बड़ा घोटाला

वहीं, अधिकारियों का कहना है कि 50:50 योजना के तहत जिस शख्स की अविकसित भूमि अधिग्रहित की जाती है, उसे बदले में करीब 11,000 वर्ग फीट विकसित भूमि मिलती है. कर्नाटक बीजेपी ने इसे 'बड़ा घोटाला' बताया और आरोप लगाया कि मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के 85,000 आवेदकों को जमीन नहीं मिली, लेकिन सीएम के परिवार को तुरंत एक जगह दे दी गई. दो बीजेपी विधायकों ने कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी अंजारिया को पत्र लिखा है और अनुरोध किया है कि वैकल्पिक भूखंड घोटाले में अदालत की ओर से स्वतः संज्ञान लिया जाए. कथित घोटाले के सिलसिले में सिद्धारमैया की पत्नी, उनके भाई मल्लिकार्जुन और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज भी कराई गई है.

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बीजेपी नेता आर अशोक और सीटी रवि ने आरोप लगाया है कि सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को उनकी अपनी जमीन के बदले मुआवजे के रूप में मैसूर के अन्य पॉश इलाके में MUDA द्वारा वैकल्पिक जमीन आवंटित की गई है. बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया है कि कई प्रभावशाली लोगों को बड़ी संख्या में जमीनें आवंटित की गईं, जो जमीन अधिग्रहित होने का दावा कर रहे हैं. सरकार को करीब ₹4000 करोड़ तक का नुकसान हुआ है. बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए इसी महीने विधानसभा सत्र में मुद्दे को उठाने का फैसला किया है.

कथित झूठे शपथ पत्र के लिए सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत

2013 के चुनाव में कथित झूठे शपथ पत्र के लिए सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत की गई है. एक्टिविस्ट और कर्नाटक भ्रष्टाचार विरोधी और पर्यावरण मंच के अध्यक्ष अब्राहम टीजे ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास शिकायत की है.  आरोप लगाया गया है कि सिद्धारमैया ने 2013 के विधानसभा चुनावों के दौरान गलत चुनावी हलफनामा प्रस्तुत किया. इसमें उन्होंने अपनी पत्नी पार्वती की 3.16 एकड़ कृषि भूमि के स्वामित्व का खुलासा नहीं किया. आरोप लगाया कि सिद्धारमैया  उस समय मैसूर जिले के वरुणा विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे. उन्होंने जानबूझकर हलफनामे के उस हिस्से को खाली छोड़ दिया था, जहां उनकी पत्नी के स्वामित्व वाली कृषि भूमि घोषित की जानी थी. शिकायत में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 125ए और धारा 8 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227, 229, 231 और 236 (पहले धारा 191, 193 और 199) के तहत कार्रवाई की मांग की गई है.

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