उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मॉनसून का लंबा इंतजार अब खत्म होने की ओर है. सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 20 जून के आसपास पूर्वी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के हिस्सों तक पहुंच जाता है, लेकिन इस साल करीब 10 दिन की देरी ने पूरे क्षेत्र को भीषण गर्मी और उमस की चपेट में रखा.
पिछले कई दिनों से तापमान लगातार सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे लोगों को दिन और रात दोनों समय गर्म हवाओं और उमस का सामना करना पड़ा. हालांकि अब मौसम के हालात तेजी से बदलते दिख रहे हैं.
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण (cyclonic circulation) विकसित हुआ है, जो मॉनसून की उत्तरी दिशा में प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है. इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी युक्त पूर्वी हवाएं भी इस सिस्टम को मजबूती दे रही हैं.
इन्हीं परिस्थितियों के चलते पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक वाले मौसम की शुरुआत हो सकती है. कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ बौछारें भी देखने को मिल सकती हैं.
स्काईमेट का अनुमान है कि 1 जुलाई तक यह मौसमीय सिस्टम और अधिक सक्रिय हो जाएगा. इससे बारिश का दायरा पूर्वी यूपी से आगे बढ़कर मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर भी फैलने लगेगा.
2 जुलाई तक उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों के साथ-साथ उत्तराखंड में भी व्यापक मॉनसूनी बारिश शुरू होने की संभावना है. पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन जैसी स्थितियों के लिए भी सतर्क रहने की जरूरत जताई गई है, क्योंकि कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश हो सकती है.
बारिश की शुरुआत के साथ ही तापमान में तेज गिरावट देखने को मिलेगी. कई जिलों में अधिकतम तापमान 4 से 7 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है, जिससे भीषण गर्मी से राहत मिलेगी और मौसम काफी सुहावना हो जाएगा.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. लंबे इंतजार के बाद अब खेतों में नमी बढ़ेगी, जिससे धान की रोपाई, मक्का, दलहन और तिलहन की बुवाई की प्रक्रिया तेजी पकड़ सकती है. पहले से तैयार खेतों में बुवाई का काम तेजी से शुरू होने की उम्मीद है.
मौसम वैज्ञानिकों ने यह भी संकेत दिया है कि जुलाई का पहला सप्ताह उत्तर भारत के लिए काफी सक्रिय रहने वाला है. इस दौरान लगातार बारिश के कई दौर देखने को मिल सकते हैं. कुछ स्थानों पर भारी बारिश की स्थिति भी बन सकती है, जिससे नदियों और नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी संभव है.
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