RG कर पर आवाज उठाई, अब राज्यसभा से इस्तीफा... ममता का साथ छोड़ने वाले सुखेंदु रॉय कौन

पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी आंतरिक विवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा दे दिया है.

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Sukhendu Shekhar Roy submits his resignation to Mamata Banerjee Sukhendu Shekhar Roy submits his resignation to Mamata Banerjee

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:42 PM IST

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही उथल-पुथल खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. TMC से लगातार पलायन जारी है और इस लंबी लिस्ट में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है. सामने आया है कि TMC के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा दे दिया है.

बीते दिनों सुखेंदु ने कहा था कि, विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद शुरू हुई अंदरूनी बगावत अभी शुरुआत भर है और आने वाले महीनों में यही स्थिति लोकसभा में भी देखने को मिल सकती है. रॉय ने यहां तक कहा था कि वह शारीरिक रूप से भले ही टीएमसी में हैं, लेकिन मानसिक रूप से पार्टी छोड़ चुके हैं.

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मैंने पहले ही कहा था TMC बिखर जाएगी- सुखेंदु शेखर

आजतक से खास बातचीत में 77 वर्षीय राज्यसभा सांसद रहे सुखेंदु ने कहा था कि उन्हें टीएमसी विधायकों के पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जाने पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज की चर्चित रेप और हत्या की घटना के बाद ही उन्होंने पार्टी के विघटन की भविष्यवाणी कर दी थी. रॉय ने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि टीएमसी बिखर जाएगी. अब वही हो रहा है. पार्टी ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी. जो घटनाएं आज दिखाई दे रही हैं, वे उसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं.”

रॉय का यह बयान और फिर सोमवार को उनका इस्तीफा दोनों ही ऐसे समय में आये हैं कि जब पार्टी के भीतर जारी संकट गहराता जा रहा है और बीते दिनों ही 80 में से 60 विधायकों के एक समूह ने निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपने गुट का नेता घोषित कर दिया था. 

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पार्टी लीडरशिप ने जनता को अनदेखा किया-  सुखेंदु

सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी की मौजूदा स्थिति के लिए भ्रष्टाचार और आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार और भ्रष्टाचार का चरम आरजी कर घटना के रूप में सामने आया, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने आत्ममंथन नहीं किया. उन्होंने कहा था “न तो कोई समीक्षा बैठक हुई और न ही नेताओं की राय सुनी गई. नेताओं को केवल रैलियों और कार्यक्रमों में शामिल होने के निर्देश दिए जाते रहे. विचारों के आदान-प्रदान की कोई व्यवस्था नहीं थी.”

रॉय का आरोप है कि जनता लगातार संकेत देती रही, लेकिन सरकार और पार्टी नेतृत्व ने उन्हें या तो समझा नहीं, स्वीकार नहीं किया या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया. उन्होंने कहा कि आज जो राजनीतिक संकट दिखाई दे रहा है, वह उसी का परिणाम है. टीएमसी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर ऐसा कोई मंच नहीं था जहां नेता और कार्यकर्ता खुलकर अपनी बात रख सकें.

उन्होंने कहा कि जब कोई दल सत्ता संकट का सामना करता है तो संवाद की आवश्यकता होती है, लेकिन टीएमसी में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी. उन्होंने पश्चिम बंगाल में रोजगार और उद्योगों की स्थिति को लेकर भी सरकार पर हमला बोला. रॉय ने कहा कि वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस के लंबे शासन ने राज्य को नुकसान पहुंचाया है. बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के कारण युवा राज्य छोड़ने को मजबूर हैं. 

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कौन हैं सुखेंदु शेखर रॉय?

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रहे सुखेंदु शेखर रॉय पश्चिम बंगाल की राजनीति में कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं. 77 वर्षीय रॉय लंबे समय से बंगाल की राजनीति में सक्रिय हैं और राजनीति के साथ-साथ कानूनी मामलों की गहरी समझ भी रखते हैं.

पेशे से वकील रहे सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति और वामपंथी विचारधारा से की थी. बाद में उन्होंने कांग्रेस के साथ भी काम किया. TMC की नीतियों, कानूनी रणनीतियों और संगठनात्मक मामलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. रॉय को पहली बार साल 2011 में राज्यसभा भेजा गया था. इसके बाद 2017 और 2023 में भी उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया. संसद में उन्होंने संघीय ढांचे, लोकतांत्रिक संस्थाओं, नागरिक अधिकारों और पश्चिम बंगाल से जुड़े विभिन्न मुद्दों को मुखरता से उठाया है. वे अक्सर कानूनी और संवैधानिक विषयों पर पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं.

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी नेतृत्व से उनके मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले और भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से पार्टी के कामकाज पर सवाल उठाए हैं. अपने लंबे राजनीतिक अनुभव, संसदीय सक्रियता और स्पष्टवादिता के कारण सुखेंदु शेखर रॉय आज पश्चिम बंगाल की राजनीति के सबसे चर्चित और प्रभावशाली वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं.

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