सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) को सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. सरकार का कहना है कि यह ऐप अपराधियों, साइबर फ्रॉड करने वालों के लिए कानून से बचने का एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है. सरकार का कहना है कि यह एक नया डार्क वेब बन गया है.
एक हलफनामे के मुताबिक, सरकार ने बताया कि टेलीग्राम का इस्तेमाल NEET जैसे महत्वपूर्ण एग्जाम पेपर्स लीक करने, साइबर धोखाधड़ी, आतंकवाद से जुड़े प्रोपेगैंडा, चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन मटेरियल, ड्रग तस्करी और वित्तीय अपराधों के लिए किया जा रहा है.
केंद्र सरकार ने बताया कि टेलीग्राम के प्राइवेसी और एनोनिमिटी (पहचान छुपाने) के फीचर्स के कारण क्रिमिनल नेटवर्क्स इसकी तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. ऐप की सेटिंग्स के जरिए यूजर्स अपने फोन नंबर और टेलीग्राम आईडी को आसानी से छुपा लेते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की असली पहचान स्थापित करना मुश्किल हो जाता है.
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के डेटा का हवाला देते हुए केंद्र ने कहा कि साइबर फ्रॉड के लिए टेलीग्राम के गलत इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतों में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है.
केंद्र ने दावा किया कि कुछ खतरनाक एंड्रॉइड एप्लिकेशन पीड़ितों का डेटा और डिवाइस की जानकारी चुराने के लिए टेलीग्राम का इस्तेमाल कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म के तौर पर करते हैं. इसमें ऐसे टेलीग्राम चैनलों के उदाहरण भी दिए गए हैं जो कथित तौर पर मैलवेयर सेवाओं, गूगल प्ले प्रोटेक्ट को बायपास करने वाले टूल्स और फाइनेंशियल एप्लिकेशन के रूप में छिपे मैलवेयर का प्रचार कर रहे थे.
हलफनामे में टेलीग्राम बॉट्स को लेकर भी चिंता जताई गई है, जो कथित तौर पर नागरिकों के पर्सनल डेटा (जैसे मोबाइल नंबर, आधार की जानकारी और पहले लीक हुए डेटाबेस से मिली अन्य संवेदनशील जानकारी) तक पहुंच आसान बनाते हैं.
साइबर अपराध से जुड़ी चिंताओं के अलावा, केंद्र ने कहा कि टेलीग्राम चैनलों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर पायरेटेड फिल्में, वेब सीरीज़ और कॉपीराइट वाला अन्य कंटेंट बांटने के लिए किया जाता है, जिससे कंटेंट क्रिएटर्स को नुकसान होता है और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़ी चिंताएं पैदा होती हैं.
यह हलफनामा दिल्ली हाई कोर्ट में दायर किया गया था और इसमें केंद्र के आरोप और इस प्लेटफॉर्म से जुड़े जोखिमों का आकलन शामिल है.
सृष्टि ओझा