तमिलनाडु में DMK और AIADMK के गठबंधन की अटकलें, विजय को रोकने के लिए साथ आएंगे धुर-विरोधी?

234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं. विजय दो सीटों पर जीते हैं तो उनके एक सीट छोड़ते ही संख्याबल 107 रह जाएगा.

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विजय को रोकने साथ आएंगे धुर विरोधी डीएमके और एआईएडीएमके. (Photo: PTI) विजय को रोकने साथ आएंगे धुर विरोधी डीएमके और एआईएडीएमके. (Photo: PTI)

प्रमोद माधव

  • चेन्नई,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:05 PM IST

तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर सियासत तेज हो गई है. इस बीच राज्य में डीएमके और एआईएडीएमके जैसी धुर विरोधी पार्टियों के गठबंधन की अटकलें लग रही हैं. 

इससे पहले टीवीके प्रमुख विजय ने लोकभवन में राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था. विजय ने राज्यपाल को 112 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था. लेकिन राज्यपाल ने 118 विधायकों के समर्थन पत्र की मांग की, जिस पर विजय ने और समय मांगा. 

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वहीं, वीसीके ने डीएमके के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था. यह अटकलें लग रही थी कि TVK की सरकार बनाने के लिए VCK विजय के साथ जा सकती है. सत्ता में किसका साथ देना है इसे तय करने के लिए VCK कल बैठक करने वाली थी लेकिन अब DMK और AIADMK के गठबंधन के अटकलों के बीच VCK ने बैठक रद्द कर दी है. इससे पहले TVK के निमंत्रण के बावजूद वामपंथी दलों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने अपना समर्थन देने से इनकार कर दिया है.

AIADMK ने विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने से इनकार कर दिया है. एआईएडीएमके ने कहा कि टीवीके को समर्थन देने से जुड़ी सभी खबरें झूठी हैं.

अगर डीएमके और एआईएडीएमके के आंकड़ों पर नजर डालें तो डीएमके ने चुनाव में 59 सीटें जीती जबकि एआईएडीएमके 47 सीटों पर विजयी रही. अगर दोनों पार्टी गठबंधन करती है तो आंकड़ा 106 हो जाएगा जो बहुमत  के 118 से 12 सीट दूर है. ऐसे में दोनों धुर विरोधी पार्टियों को सरकार बनाने के लिए अन्य पार्टियों का समर्थन लेना होगा. 

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बता दें कि तमिलनाडु चुनाव में टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. लेकिन बहुमत के 118 विधायकों के आंकड़े को पार नहीं कर सकी. 234 सदस्यीय तमिलनाडु की विधानसभा में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं. विजय दो सीटों पर जीते हैं तो उनके एक सीट छोड़ते ही संख्याबल 107 रह जाएगी.

इससे पहले खबर थी कि विजय सात मई को शपथ लेंगे. उन्हें कांग्रेस का भी समर्थन मिला हुआ है. लेकिन सरकार बनाने के लिए पर्याप्त 118 संख्याबल नहीं होने से मामला फंसता नजर आ रहा है. ऐसे में शपथ ग्रहण के टलने के आसार हैं.

बता दें कि एआईएडीएमके की स्थापना 1972 में हुई थी. इसकी शुरुआत उस समय हुई थी, जब एमजी. रामचंद्रन को डीएमके से निष्कासित कर दिया गया था. इसके बाद एमजीआर ने अपनी नई पार्टी बनाई, जिसे AIADMK नाम दिया गया. यह पार्टी आगे चलकर तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ी ताकत के रूप में उभरी और डीएमके के साथ इसकी लंबी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हुई.

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