'ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी...', 370 पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्यों भड़के उमर अब्दुल्ला

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने की प्रक्रिया को सही करार देते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया है. कोर्ट ने माना है कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था. इस फैसले पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है

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उमर अब्दुल्ला ने कहा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हूं निराश उमर अब्दुल्ला ने कहा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हूं निराश

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 4:23 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने आज ऐतिहासिक फैसला देते हुए पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के सरकार के फैसले को बरकरार रखा. कोर्ट ने कहा कि अगले साल 30 सितंबर तक विधानसभा चुनाव कराने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए. कोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 370 एक अस्थाई प्रावधान था. जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. जम्मू कश्मीर के पास कोई आंतरिक संप्रभुता नहीं थी.

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चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 370 एक अस्थायी प्रावधान था और राष्ट्रपति के पास इसे रद्द करने की शक्ति है. शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाए.

गुलाम नबी आजाद ने फैसले पर जताई नाखुशी

कोर्ट के इस फैसले पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आज़ाद पार्टी के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद की भी प्रतिक्रिया आई है. आजाद ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करना एक गलती थी और इसे लेकर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों से भी पूछा जाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से हमारी आखिरी उम्मीद थी, फैसले से जम्मू-कश्मीर के लोग खुश नहीं हैं.'

ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी- अब्दुल्ला

वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि फैसले से निराश हूं लेकिन हतोत्साहित नहीं हूं. संघर्ष जारी रहेगा. यहां तक पहुंचने में बीजेपी को दशकों लग गए. हम लंबी दौड़ के लिए भी तैयार हैं. गुलाम नबी आजाद के बयान पर चुटकी लेते हुए उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, 'आज़ाद साहब सचमुच आज़ाद हैं. वह अपने पार्टी कार्यालय में आने के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि हममें से कुछ लोग अपने-अपने गेट पर जंजीरों से बंद हैं. गुपकर रोड पर मीडिया कर्मियों को हमसे कोई प्रतिक्रिया लेने की अनुमति नहीं दी जा रही है.मदर ऑफ डेमोक्रेसी? मतलब ऐसी तैसी डेमोक्रेसी.'

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