पुलवामा जैसा हमला करने की कोशिश करने वाले 6 आरोपियों पर चलेगा मुकदमा, सुप्रीम कोर्ट से मिली हरी झंडी

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के द्वारा अप्रैल 2021 में आया फैसला रद्द कर दिया. तीन साल पहले आए उस फैसले में आरोपियों को अभियोजन शुरू करने में प्रक्रियात्मक चूक के कारण बरी करने के निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया गया था.

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 मई 2024,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाते हुए मार्च 2019 में जम्मू- कश्मीर के बनिहाल में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले पर विस्फोटक भरी कार से आत्मघाती हमला करने को तैयार देशद्रोह के आरोपी 6 कथित हिजबुल मुजाहिदीन आतंकवादी गुर्गों के खिलाफ मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया है. 

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एसवीएन भट्टी की बेंच ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के द्वारा अप्रैल 2021 में आया फैसला रद्द कर दिया. तीन साल पहले आए उस फैसले में इन आरोपियों को अभियोजन शुरू करने में प्रक्रियात्मक चूक के कारण बरी करने के निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया गया था. आतंक के 6 आरोपियों को ट्रायल कोर्ट ने बरी किया और उसकी ही हाईकोर्ट ने पुष्टि की थी.

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खतरनाक था मंसूबा

CRPF काफिले पर हमले की योजना और बरामद विस्फोटकों की तुलना जांच एजेंसी ने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए हमले से की थी. इसकी बारीकी से जांच की गई. उस पूरे घटनाक्रम के तार पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) तक जाते हैं. संगठन के प्रति यकीन के कारण ही एक आत्मघाती हमलावर ने 40 सीआरपीएफ कर्मियों को मार डाला था.

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अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रक्रियात्मक चूक का इलाज संभव है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करके गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने की छूट मिल गई है. 

फैसले में जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि यह अधिकारियों के लिए उचित मंजूरी देने के लिए खुला है, यह कानून के तहत अनिवार्य है. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने मामले में संघीय एजेंसी की पैरवी की थी.

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30 मार्च, 2019 को संदिग्ध JeM के इन गुर्गों ने जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर बनिहाल में सीआरपीएफ के काफिले पर विस्फोटक भरी कार से हमला करने की कोशिश की थी. दक्षिण कश्मीर के अमीन नाम के संदिग्ध ने कथित तौर पर 14 फरवरी के पुलवामा हमले की तर्ज पर बनिहाल में ही CRPF के काफिले पर विस्फोटक से भरी सैंट्रो कार से टक्कर मारने की कोशिश की थी.

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आतंकियों की योजना हुई थी फेल

पुलवामा जैसे हमले की योजना फेल होने पर उसमें सवार CRPF के जवान बच गए. बस को नुकसान सिर्फ पीछे की खिड़कियों के शीशे टूटने से हुआ. सिलेंडर फटने से कार में आग लग गई. अमीन मौके से एक गांव में भाग गया. अगले ही दिन सुरक्षा बलों ने उसे पकड़ लिया. इसके बाद, पांच अन्य आरोपियों- उमर शफी, आकिब शफी शाह, वसीम अहमद डार, हिलाल अहमद मंटू और शाहिद अहमद वानी को भी पकड़ लिया गया.

पुलवामा के बाद, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने CRPF काफिले पर इस नकलची हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को स्थानांतरित कर दी. NIA ने सितंबर 2019 में मामले में अपनी चार्जशीट दायर की. उसमें अमीन और पांच अन्य को सुरक्षाकर्मियों की हत्या की साजिश रचने और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोपी के रूप में नामित किया गया.

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हालांकि, मार्च 2020 में जम्मू-कश्मीर की एक स्पेशल कोर्ट ने अमीन को UAPA के साथ-साथ अन्य दंडात्मक आरोपों से मुक्त कर दिया. कोर्ट ने इस फैसले का आधार यह देखते हुए बनाया कि संबंधित जिला मजिस्ट्रेट सरकार से अनुमति के बिना मामले में शिकायत दर्ज नहीं कर सकते थे.

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अप्रैल 2021 में अपने फैसले से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने अमीन की दोषमुक्ति को बरकरार रखते हुए इस आदेश की पुष्टि की. फरवरी 2021 में NIA ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व कॉन्स्टेबल नवीद मुश्ताक शाह के खिलाफ एक पूरक आरोप पत्र दायर किया, जो बाद में एचएम में शामिल हो गए. उस दिन NIA के एक बयान के मुताबिक, जांच से पता चला कि आरोपी शाह अन्य आतंकवादियों रियाज अहमद नायकू, रईस अहमद खान और डॉ. सैफुल्ला मीर के साथ CRPF काफिले पर हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में सक्रिय रूप से शामिल था, जो सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में बाद में मारे गए. कश्मीर के मोस्ट वॉन्डेट आतंकवादियों में से एक और एचएम का कमांडर नाइकू, मई 2020 में पुलवामा में एक मुठभेड़ के दौरान मारा गया था.

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