'ओबामा के पास क्या अनुभव था?' राहुल गांधी की योग्यता पर सवाल उठने पर शशि थरूर का करारा जवाब

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के राजनीतिक अनुभव और विदेश नीति की समझ पर सवाल उठाने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा को सोशल मीडिया पर जवाब दिया.

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शशि थरूर ने कहा- राहुल गांधी एक दशक से अधिक समय से एक राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं. (Photo: ITG) शशि थरूर ने कहा- राहुल गांधी एक दशक से अधिक समय से एक राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:11 PM IST

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को अपने वरिष्ठ पार्टी सहयोगी राहुल गांधी का बचाव करते हुए प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक रामचंद्र गुहा की आलोचना का जवाब दिया. गुहा ने राहुल गांधी के राजनीतिक अनुभव और उनकी राजनीतिक यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनके पास प्रधानमंत्री बनने के लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुभव की कमी है. उन्होंने विदेश नीति की कुशलता को लेकर भी सवाल उठाए थे.

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गुहा ने हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू में राहुल गांधी की भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा करने की योग्यता पर सवाल उठाया, विशेष रूप से गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने के लिए उनके पारंपरिक प्रशासनिक अनुभव और विदेश नीति की कुशलता की कमी बताई. उन्होंने पूछा कि गांधी को उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत शालीनता के अलावा इस पद के लिए क्या योग्य बनाता है.

वहीं, इस मामले पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदाहरणों का हवाला दिया. थरूर ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए पूर्व कार्यकारी पद या विदेश नीति का अनुभव होना जरूरी नहीं है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, 'कम ऑन रामचंद्र गुहा, ये तो कुछ ज़्यादा ही हो रहा है. जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश का राष्ट्रपति बराक ओबामा बने, तब इलिनोइस से पहली बार सीनेटर बने बराक ओबामा को विश्व मामलों का कितना अनुभव था, जबकि वह देश कई वैश्विक मुद्दों में उलझा हुआ था? और तो और, भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संभालने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री को कितना अंतरराष्ट्रीय अनुभव था?'

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उन्होंने आगे तर्क दिया कि राहुल गांधी एक दशक से अधिक समय से एक राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और उनके दुनिया भर के नेताओं के साथ संपर्क हैं और उनकी पार्टी के अंदर और बाहर सलाहकारों की कोई कमी नहीं है.

उन्होंने कहा, 'कोई भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री अकेले संकटों का सामना नहीं करता, इसीलिए तो वह सरकार का मुखिया होता है. मुझे लगता है कि इस बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया विवाद को अब समाप्त करने का समय आ गया है.'

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