20 साल बाद सिक्किम में दिखा दुर्लभ मिश्मी टाकिन का झुंड, कैमरे में कैद हुआ अनोखा नजारा

सिक्किम के टिंगडा रिजर्व फॉरेस्ट में 20 साल बाद दुर्लभ मिश्मी टाकिन का 8 सदस्यों वाला झुंड कैमरे में कैद हुआ है. IUCN रेड लिस्ट में शामिल इस प्रजाति की मौजूदगी को संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता माना जा रहा है.

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IUCN की रेड लिस्ट में शामिल मिश्मी टाकिन सिक्किम में देखा गया.(Photo:Screengrab/PSTamangGolay) IUCN की रेड लिस्ट में शामिल मिश्मी टाकिन सिक्किम में देखा गया.(Photo:Screengrab/PSTamangGolay)

aajtak.in

  • गंगटोक,
  • 21 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:32 PM IST

उत्तरी सिक्किम में 20 साल बाद दुर्लभ मिश्मी टाकिन का झुंड कैमरे में कैद हुआ. वन विभाग की गश्ती टीम ने काबुचेन क्षेत्र में 8 मिश्मी टाकिनों को एक साथ रिकॉर्ड किया. इसे इलाके में अब तक का सबसे बड़ा झुंड माना जा रहा है. बकरी और हिरण जैसी दिखने वाली यह विलुप्तप्राय प्रजाति पूर्वी हिमालय में पाई जाती है. 

वन और पर्यावरण विभाग ने बताया, यह फुटेज टिंगडा रिजर्व फॉरेस्ट के बाकुचेन इलाके में नियमित गश्त के दौरान रिकॉर्ड किया गया था. अधिकारियों ने 8 मिश्मी टाकिन (Budorcas taxicolor) के झुंड को देखा, यह इस इलाके में अब तक रिकॉर्ड किया गया इस प्रजाति का सबसे बड़ा समूह है. इसे IUCN की रेड लिस्ट में 'वल्नरेबल' यानी खतरे में पड़ी प्रजाति के रूप में शामिल किया गया है.

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विभाग ने कहा कि यह घटना इसलिए भी खास है, क्योंकि सिक्किम मिश्मी टाकिन के प्राकृतिक क्षेत्र का सबसे पश्चिमी हिस्सा माना जाता है और यहां इसके बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध रही है.

विभाग ने कहा, "फुटेज में आठ जानवरों का झुंड दिखाई दे रहा है, जो इस इलाके में अब तक रिकॉर्ड किया गया टकिन का सबसे बड़ा समूह है." देखें VIDEO:- 

मिश्मी टाकिन पूर्वी हिमालय में रहने वाला एक बड़ा पहाड़ी खुर वाला जानवर है. यह अपने मजबूत शरीर, घने बालों और खराब मौसम में भी जीवित रहने की क्षमता के लिए जाना जाता है.

यह घने जंगलों वाली घाटियों से लेकर 4500 मीटर की ऊंचाई तक के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों में रहता है. इस प्रजाति की त्वचा से एक तैलीय पदार्थ निकलता है, जो इसे बारिश और कड़ाके की ठंड से बचाने में मदद करता है.

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वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि एक साथ 8 टाकिनों का दिखना इस बात का संकेत है कि इलाके का प्राकृतिक वातावरण और जंगल अभी भी स्वस्थ हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ जानवरों का संरक्षण जैव विविधता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है.

वन विभाग ने इस उपलब्धि का श्रेय लगातार किए जा रहे संरक्षण कार्यों और जंगलों की सुरक्षा को दिया है. अधिकारियों का कहना है कि इस वीडियो से मिश्मी टाकिन की आबादी और उसके फैलाव के बारे में नई जानकारी मिलेगी, जिससे संरक्षण और रिसर्च को मदद मिलेगी.

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