राम मंदिर चंदा चोरी: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा, 2019 के फैसले की अनदेखी का आरोप

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर निर्मोही अखाड़ा सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. याचिका में 2019 के फैसले के सही तरीके से पालन न होने का दावा करते हुए ट्रस्ट के पुनर्गठन और उसके वित्तीय लेन-देन की जांच समेत कई निर्देश जारी करने की मांग की गई है.

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राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा. (File Photo) राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा. (File Photo)

सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 18 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:08 PM IST

राम मंदिर ट्रस्ट के गठन, उसके कामकाज और वित्तीय लेन-देन को लेकर एक बार फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. निर्मोही अखाड़े ने याचिका दाखिल कर कहा है कि 2019 के ऐतिहासिक फैसले को करीब सात साल बाद भी उसकी मूल भावना के मुताबिक लागू नहीं किया गया. अखाड़े का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अदालत के फैसले का पूरी तरह पालन नहीं किया, जिसकी वजह से आज यह स्थिति बनी है.

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याचिका में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यशैली और गठन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. निर्मोही अखाड़े का कहना है कि सार्वजनिक ट्रस्ट की जगह इसे एक निजी ट्रस्ट की तरह बना दिया गया है. इसके साथ आशंका जताई गई है कि ट्रस्ट के कुछ सदस्य भ्रष्टाचार में शामिल हो सकते हैं. इन तमाम तरह के विवादों से इस पवित्र स्थल की गरिमा और छवि को काफी नुकसान पहुंचा है.

ट्रस्ट को लेकर क्या मांगें उठीं?

निर्मोही अखाड़े ने दलील दी है कि किसी भी मंदिर की व्यवस्था शेबैत यानी पारंपरिक सेवादार के बिना पूरी नहीं मानी जा सकती. याचिका के मुताबिक मौजूदा ट्रस्ट में ऐसे लोगों को शामिल कर लिया गया है, जिनका श्रीराम जन्मभूमि से कोई ऐतिहासिक, धार्मिक या कानूनी संबंध नहीं है. इसी वजह से अखाड़े ने मांग की है कि पूरे ट्रस्ट का पुनर्गठन कर उसे सार्वजनिक ट्रस्ट बनाया जाए, जिसमें उन्हें उचित भूमिका मिले.

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बात सिर्फ मैनेजमेंट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पैसों के हिसाब-किताब को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया है. याचिका में ट्रस्ट के सभी वित्तीय लेन-देन का एक निष्पक्ष फॉरेंसिक ऑडिट कराने की अपील की गई है. इसके साथ ही 2019 के फैसले के पालन की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाने की बात कही गई है, ताकि ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हो सकें.

धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर भी अखाड़े ने अपनी बात मजबूती से रखी है. उनका कहना है कि रामलला की पूजा, सेवा और भोग पूरी तरह से रामानंदी संप्रदाय की परंपरा के अनुसार ही कराए जाएं. इसके अलावा परिसर में श्रीराम लला विराजमान की मूल प्रतिमाओं को फिर से स्थापित करने की मांग भी की गई है. अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर सबकी नजर टिकी है.
 

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