राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में क्यों घिरे थे चंपत राय और अनिल मिश्रा? इस्तीफे की Inside Story

राम मंदिर ट्रस्ट में करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच तेज होने के बाद ट्रस्ट के दो सबसे बड़े चेहरों महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद छोड़ दिए. SIT जांच, FIR, गिरफ्तारियां और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच आखिर इस्तीफे तक बात कैसे पहुंची? जानिए पूरी कहानी.

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चंपत राय (बाएं), अनिल मिश्रा (दाएं). (Photo- ITG) चंपत राय (बाएं), अनिल मिश्रा (दाएं). (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:07 PM IST

अयोध्या के राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावा चोरी की जांच अब ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों तक पहुंच गई है. स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच, कर्मचारियों की गिरफ्तारी और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. दोनों को अभी तक FIR में आरोपी नहीं बनाया गया है, लेकिन जांच की आंच उनके प्रशासनिक कामकाज तक पहुंच चुकी है और अब उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा.

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विपक्ष (सपा और आप सहित) का यह स्पष्ट आरोप था कि चंपत राय और अनिल मिश्र, जो पूरे चंदे और चढ़ावे के प्रबंधन और व्यवस्था के मुखिया थे, आखिर इतने बड़े घोटाले से कैसे अनजान रह सकते हैं. विपक्षी नेताओं का कहना था कि जब तक ये दोनों अपनी कुर्सियों पर बैठे रहेंगे, तब तक निष्पक्ष जांच की बात पूरी तरह बेमानी है और जांच की आड़ में सिर्फ 'छोटी मछलियों' को बलि का बकरा बनाकर 'बड़ी मछलियों' को बचाने की साजिश रची जा रही है.

चंपत राय कौन हैं और राम मंदिर में क्या रोल था?

चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता हैं और राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव के रूप में पूरे प्रशासनिक ढांचे, वित्तीय व्यवस्था, भूमि संबंधी मामलों और मंदिर की रोजाना की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक उनकी भूमिका बेहद अहम रही है.

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लेकिन अब वही चंपत राय कई सवालों के घेरे में हैं. आरोप है कि मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये के चढ़ावे की चोरी हुई. SIT जांच के दौरान सामने आया कि उनके करीबी और ड्राइवर रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव कथित रूप से इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा था. जांच में यह भी आरोप सामने आए कि कुछ श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए महंगे चांदी के सामान और अन्य कीमती चढ़ावे का आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं बनाया गया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड और खर्च का ब्यौरा मांगा था. इसी बीच SIT ने कई दौर की पूछताछ की और चंपत राय से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय निगरानी को लेकर सवाल किए. हालांकि उन्होंने लगातार कहा कि ट्रस्ट की ऑडिट प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी तरह की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई.

SIT जांच में क्या सामने आया?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT की शुरुआती जांच के आधार पर FIR दर्ज की गई. इसके बाद आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. इनमें चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव, कैश काउंटिंग प्रभारी अनुकल्प मिश्रा और नकदी गिनने वाले कई कर्मचारी शामिल हैं.

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जांच एजेंसियों के मुताबिक, मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा बदलाव देखने को मिला. कई कर्मचारियों की संपत्ति और बैंक खातों की जांच की जा रही है. बताया गया कि SIT की आंतरिक रिपोर्ट में कुल 17 लोगों को जांच के दायरे में रखा गया, जिनमें चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के नाम भी शामिल थे. हालांकि, आधिकारिक FIR में दोनों के नाम आरोपी के तौर पर दर्ज नहीं हैं.

बढ़ते राजनीतिक दबाव, विपक्ष के हमलों और जांच को निष्पक्ष बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए उन्होंने महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया. अखिलेश यादव से लेकर अरविंद केजरीवाल तक यह आरोप लगा रहे थे कि बड़ी मछलियों को बचाया जा रहा है. सपा प्रमुख भी लगातार इस मामले की आलोचना कर रहे थे. इसी दबाव की वजह से उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.

डॉ. अनिल मिश्रा पर क्यों उठे सवाल?

डॉ. अनिल मिश्रा अयोध्या के सीनियर डॉक्टर होने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं. वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल हैं. ट्रस्ट में उन्हें मंदिर के चढ़ावे, कैश की गिनती, सुरक्षित भंडारण और बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी.

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यही वजह है कि जब करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी सामने आई तो जांच एजेंसियों ने उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए. जांच के दौरान यह सामने आया कि कैश काउंटिंग हॉल के संचालन और कर्मचारियों की निगरानी उनकी जिम्मेदारी वाले दायरे में थी. SIT ने उनसे करीब चार घंटे तक पूछताछ की और कैश काउंटिंग की प्रक्रिया, बैंकिंग व्यवस्था और गिरफ्तार कर्मचारियों से उनके संबंधों को लेकर सवाल किए.

यह भी पढ़ें: चंपत राय और अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा... चंदा चोरी विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट छोड़ा

जांच में यह भी सामने आया कि हर रोज लाखों रुपये कैश गिनने के लिए निजी कर्मचारियों की बड़ी टीम तैनात थी. इसी व्यवस्था के दौरान कथित तौर पर कैश और कीमती चढ़ावे की चोरी होती रही. कुछ कर्मचारियों पर पैसे और चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सामने आए.

इसके अलावा पुराने भूमि सौदों को लेकर भी डॉ. अनिल मिश्रा का नाम एक बार फिर चर्चा में आया. मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि राम मंदिर निर्माण के दौरान कुछ जमीनों की खरीद में वे गवाह के रूप में शामिल थे, जिनकी कीमत को लेकर पहले भी विवाद उठ चुका था.

हालांकि SIT ने अब तक डॉ. अनिल मिश्रा को क्लीन चिट नहीं दी है, लेकिन उन्हें भी FIR में आरोपी नहीं बनाया गया है. जांच अभी जारी है और एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं.

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दोनों नेताओं के इस्तीफे को जांच को निष्पक्ष बनाए रखने और ट्रस्ट की साख बचाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि अभी तक दोनों के खिलाफ कोई आपराधिक आरोप तय नहीं हुए हैं और न ही उन्हें आधिकारिक तौर पर आरोपी बनाया गया है.

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