'इथेनॉल प्रोडक्शन से मेरा कोई फायदा नहीं', आरोपों पर नितिन गडकरी की सफाई

इंडिया टुडे टीवी को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हितों के टकराव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. साथ ही यह साफ किया कि उनके परिवार का चीनी व्यवसाय सरकार की इथेनॉल नीति लागू होने से बहुत पहले का है.

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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी. (फाइल फोटो) केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी. (फाइल फोटो)

श्वेता सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:44 PM IST

इथेनॉल ब्लेंडिंग की नीति को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है. इंडिया टुडे टीवी से खास बातचीत में उन्होंने केंद्र सरकार की इस नीति का बचाव किया. गडकरी ने कहा कि इथेनॉल प्रोडक्शन में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 0.07 फीसदी है. इतनी कम हिस्सेदारी होने से उन्हें कोई निजी फायदा नहीं होता. अपने ऊपर लगे इन आरोपों को एक साजिश बताया. उन्होंने चुनौती भी दी कि अगर E20 ईंधन से किसी पेट्रोल वाहन को नुकसान हुआ है, तो उसका सबूत सामने लाया जाए.

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इस खास बातचीत में नितिन गडकरी ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर लगाए जा रहे निजी हितों के आरोप पूरी तरह गलत हैं. उनका कहना है कि उनके परिवार का चीनी कारोबार सरकार की इथेनॉल नीति आने से पहले का है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इथेनॉल प्रोडक्शन में उनका सिर्फ 0.07 फीसदी हिस्सा है. इतनी छोटी हिस्सेदारी से उन्हें किसी भी तरह का बड़ा आर्थिक फायदा नहीं हो सकता.

E20 पेट्रोल पर उठे सवालों का दिया जवाब

गडकरी ने E20 पेट्रोल को लेकर हो रही आलोचना को भी सिरे से खारिज किया. उनका कहना है कि अब तक कोई भी यह साबित नहीं कर पाया है कि E20 ईंधन की वजह से किसी पेट्रोल वाहन को कोई नुकसान हुआ हो. इसके साथ ही आलोचकों से साफ तौर पर कहा गया कि अगर किसी के पास ऐसा कोई ठोस सबूत मौजूद है, तो उसे सबके सामने लाना चाहिए.

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पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया को समझाते हुए गडकरी ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग की नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं है. उनके मुताबिक, इस पूरी योजना पर पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वैज्ञानिक संस्थानों के साथ लंबी चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला लिया गया. इसलिए इसे किसी एक व्यक्ति की मर्जी से जोड़कर देखना बिल्कुल भी सही नहीं है.

बातचीत के दौरान परिवहन मंत्री गडकरी ने बताया कि इस नीति को शुरू करने के पीछे कुछ बेहद अहम मकसद हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इससे देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी. साथ ही कच्चे तेल के आयात की कमी से प्रदूषण में भी बड़ी कमी आएगी. इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा, जिन्हें गन्ने जैसी फसलों से पहले के मुकाबले बेहतर आमदनी होगी. सरकार लंबे समय से साफ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है, यह पूरी योजना उसी का एक हिस्सा है.

साजिश का भी लगाया आरोप

अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए गडकरी ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर इथेनॉल नीति पर सवाल खड़े कर रहे हैं. उन्होंने इसे असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया. E20 पेट्रोल को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने कहा कि अगर किसी की गाड़ी इथेनॉल मिले ईंधन की वजह से खराब हुई है, तो वह डीलर के साथ-साथ उनके मंत्रालय में भी शिकायत दर्ज करा सकता है. हर शिकायत की जांच कराई जाएगी और अगर यह साबित होता है कि नुकसान E20 ईंधन की वजह से हुआ है, तो संबंधित व्यक्ति को उचित राहत भी दी जाएगी. गडकरी ने आलोचकों से यह भी पूछा कि क्या वे ऐसे दो लोगों का नाम बता सकते हैं, जिनकी पेट्रोल गाड़ी सिर्फ इथेनॉल की वजह से खराब हुई हो?

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वाहन कंपनियों और दूसरे देशों का भी दिया उदाहरण

इसी दौरान गडकरी ने कहा कि मारुति सुजुकी, टोयोटा, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी बड़ी वाहन कंपनियों ने अब तक E20 पेट्रोल से गाड़ियों के खराब होने की कोई शिकायत नहीं दी है. उन्होंने टोयोटा की एक हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जांच में खराबी की वजह इथेनॉल नहीं, बल्कि ईंधन में पानी की मिलावट निकली थी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि E20 कोई प्रयोग नहीं है. किसी भी वाहन को मंजूरी मिलने से पहले करीब चार साल तक उसकी टेस्टिंग होती है और उसे लाखों किलोमीटर तक चलाकर परखा जाता है. इसके अलावा, गडकरी ने बताया कि अमेरिका, ब्राजील, जापान, जर्मनी, थाईलैंड और स्वीडन जैसे कई देशों में भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल पहले से हो रहा है.
 

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