मिजोरम में आतंकवाद का अंत, अंतिम विद्रोही गुट ने डाले हथियार, CM बोले- अब हमारा राज्य पूरी तरह शांत

मिजोरम में आखिरी उग्रवादी गुट के आत्मसमर्पण के साथ राज्य को पूरी तरह शांत घोषित किया गया. दशकों से जारी संघर्ष का अंत हुआ. सरकार ने संवाद और विकास के जरिए समाधान निकाला. अब प्रशासन का फोकस स्थायी शांति, पुनर्वास और सामाजिक एकता को मजबूत करने पर है.

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मिजोरम में 80 के दशक में उग्रवाद की शुरुआत हुई थी. (Photo: Screengrab) मिजोरम में 80 के दशक में उग्रवाद की शुरुआत हुई थी. (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:40 PM IST

मिजोरम ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. राज्य का आखिरी सक्रिय उग्रवादी संगठन हथियार डालकर मुख्यधारा में लौट आया. मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने घोषणा की कि इसके साथ ही मिजोरम अब पूरी तरह “उग्रवाद-मुक्त” राज्य बन गया है.

यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम उस समय सामने आया जब हमार पीपुल्स कन्वेंशन (डेमोक्रेटिक) यानी एचपीसी(डी) के ललह्मिंगथांगा सनाटे के नेतृत्व वाले एक धड़े ने आइजोल के पास सेसावंग में आयोजित ‘होमकमिंग और आर्म्स लेइंग’ समारोह में अपने हथियार सरकार को सौंप दिए. यह वही गुट था, जिसे मिजोरम का आखिरी सक्रिय उग्रवादी संगठन माना जाता था.

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सरकार और इस संगठन के बीच 14 अप्रैल को हुए शांति समझौते के बाद यह आत्मसमर्पण हुआ, जिसने राज्य में दशकों पुराने उग्रवाद के अध्याय को लगभग समाप्त कर दिया. मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस मौके पर कहा कि मिजोरम में जब भी शांति की बात होती थी, तब HPC(D) का साया बना रहता था, लेकिन अब राज्य सच्चे अर्थों में शांतिपूर्ण हो गया है.

उन्होंने सभी मिजो समुदायों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी उप-जनजाति की अलग पहचान से ऊपर “मिजो” होने की पहचान सबसे महत्वपूर्ण है. उनका कहना था कि स्थायी शांति और विकास केवल एकता से ही संभव है.

गृह मंत्री के. सपडांगा ने इस दिन को “ऐतिहासिक” बताते हुए मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की और उन्हें “शांति का प्रतीक” बताया. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास और उनकी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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80 के दशक में शुरु हुआ था उग्रवाद

दरअसल, हमार पीपुल्स कन्वेंशन ने 1980 के दशक में मिजोरम के उत्तरी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में हमार समुदाय के लिए छठी अनुसूची के तहत स्वायत्त जिला परिषद की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था. 1987 में यह आंदोलन उग्रवाद में बदल गया.

1994 में एक शांति समझौते के बाद स्थिति काफी हद तक सुधरी, लेकिन असंतुष्ट धड़े ने एचपीसी (D) बनाकर फिर से हथियार उठा लिए. बाद में 2018 में एक और गुट ने सरकार के साथ समझौता कर लिया, लेकिन सनाते गुट मुख्यधारा से बाहर बना रहा.

आखिरकार, 2024 से शुरू हुई बातचीत और बैकचैनल प्रयासों के जरिए सरकार इस गुट को भी मुख्यधारा में लाने में सफल रही. सनाते ने भी माना कि मौजूदा सरकार के विकास कार्यों और बदले राजनीतिक माहौल ने उन्हें हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित किया.

मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा कि मिजोरम अब दोबारा उग्रवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और सभी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि अल्पकालिक फायदे के लिए किसी भी तरह के विवाद और हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए. इस ऐतिहासिक आत्मसमर्पण के साथ मिजोरम ने न केवल एक लंबे संघर्ष का अंत किया है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी शांति और संवाद के जरिए समाधान का एक मजबूत उदाहरण पेश किया है.

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(PTI इनपुट्स के साथ)

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