लुधियाना में चाइनीज धागे ने ली जान, स्कूल से लौट रहे छात्र का गला कटा

समराला इलाके में प्रतिबंधित 'चाइनीज धागे' (चीनी धागा या मांझा) की चपेट में आने से शनिवार को स्कूल से घर लौट रहे एक छात्र की जान ले ली. मृतक के दादा जसपाल सिंह ने बताया कि उनका पोता सुबह खुशी-खुशी स्कूल गया था, लेकिन लौटते वक्त प्रशासन की लापरवाही ने उसकी जान ली.

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लुधियाना में स्कूल से लौट रहे छात्र का चाइनीज धागे से कटा गला. (File photo: ITG) लुधियाना में स्कूल से लौट रहे छात्र का चाइनीज धागे से कटा गला. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • लुधियाना,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:31 PM IST

लुधियाना के समराला इलाके में प्रतिबंधित 'चाइनीज धागे' (चीनी धागा या मांझा) की चपेट में आने से शनिवार को स्कूल से घर लौट रहे एक छात्र की जान ले ली. हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर छात्र के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कि लिए भेज दिया है.

पुलिस ने बताया कि शनिवार को समराला बाईपास पर गांव भरतला (या चहलां) के पास स्कूल से घर लौट रहे छात्र की चाइनीज धागे गर्दन कटने की जानकारी मिली थी. मौके पर पहुंची टीम को पता चला कि स्थानीय लोगों घायल अवस्था में छात्र को अस्पताल ले गए हैं, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

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पुलिस ने बताया कि मृत छात्र की पहचान तरणजोत सिंह के रूप में हुई है. मृतक के शव को कब्जा ले लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है.

स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव भरतला के पास अचानक तरणजोत सिंह के गले में प्रतिबंधित चाइना डोर लिपट गई. धागा इतना तेज था कि छात्र के गले पर गहरा कट लग गया और वह लहूलुहान होकर सड़क पर गिर गया .

स्थानीय लोग उसे तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. वहीं, हादसे की खबर मिलते ही अस्पताल पहुंचे परिजनों में चीख-पुकार मच गई. अपने इकलौते बेटे के शव को देखकर मां सुध-बुध खो बैठी और बेहोश हो गईं.

खुले आम बिक रहा है चाइनीज मांझा

मृतक के दादा जसपाल सिंह ने बताया कि उनका पोता सुबह खुशी-खुशी स्कूल गया था, लेकिन लौटते वक्त प्रशासन की लापरवाही ने उसकी जान ले ली. घर के बाहर और अस्पताल में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई है और हर कोई इस घटना से स्तब्ध है.

मृतक के दादा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि समराला में चाइनीज धागा सरेआम बिक रहा है, लेकिन अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

उन्होंने बताया कि पहले भी कई लोग इस डोर की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं, फिर भी इसे पूरी तरह बंद करवाने के लिए कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए जा रहे हैं .

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर वक्त रहते इन घातक धागों की बिक्री पर लगाम लगाई गई होती, तो आज एक मासूम की जान नहीं जाती.

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