लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक बिल्डिंग में लगी आग ने दिल्ली मालवीय नगर हादसे की यादों को फिर से ताजा कर दिया. लखनऊ अग्निकांड की शुरुआती जांच में वही खामियां मिली हैं जो मालवीय नगर अग्निकांड में मिली थी. बिना फायर एनओसी के चल रहे इस तीन मंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं, जिसमें 15 छात्रों की जान चली गई और अब अधिकारी वैसी ही बहानेबाजी कर रहे हैं, जैसी दिल्ली में देखने को मिली थी. इसके साथ ही अब बिल्डिंग के को-ऑनर (सह-मालिक) सुरेंद्र शुक्ल का विवादित रिकॉर्ड भी सामने आया है.
हालांकि, इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. इस हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), बिजली विभाग और फायर ब्रिगेड के कुल चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर अब तक 4 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि फॉरेंसिक टीम ने भी मौके पर पहुंचकर अपनी जांच शुरू कर दी है.
सकरा रास्ता
शुरुआती जांच में पता चला है कि अलीगंज के इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में अंदर और बाहर आने-जाने के लिए केवल एक ही सकरा रास्ता और वैसी ही संकरी सीढ़ियां थीं. नियमों को ताक पर रखकर इस इकलौते रास्ते के ऊपर 7 पैनल, 2 एग्जॉस्ट फैन और इलेक्ट्रिक कंट्रोल पैनल लगा दिए गए थे, जिसने रास्ते को और छोटा कर दिया था. इस पूरी बिल्डिंग में कोई इमरजेंसी गेट नहीं था, जिससे आग लगने पर धुआं फैलने के कारण दूसरी मंजिल पर फंसे लड़के-लड़कियां बाहर नहीं निकल पाए.
अलीगंज जैसी ही गंभीर लापरवाही दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में लगी आग में भी सामने आई थी. वहां भी होटल के अंदर एंट्री-एग्जिट के लिए सिर्फ एक ही रास्ता उपलब्ध था. इसके अलावा हादसे के वक्त होटल के बेसमेंट में जो गेट बना हुआ था, उस पर ताला लगा हुआ था, जिसके कारण लोग समय रहते सुरक्षित बाहर नहीं निकल पाए थे.
रिहायशी नक्शा पास करवाकर बनाया कमर्शियल कॉम्प्लेक्स
बताया जा रहा है कि जमीन के मालिकों ने निर्माण कार्य शुरू कराने से पहले, रिहायशी बिल्डिंग का नक्शा पास करवा था, लेकिन उन्होंने यहां कमर्शियल कंपलेक्स का निर्माण कराया. और जब निर्माण के दौरान लखनऊ प्रधिकरण ने कार्रवाई की तो मालिक कोर्ट पहुंचे गए. इसके बाद बिल्डिंग की ध्वस्तीकरण के आदेश को निरस्त कर दिया गया. मालवीय नगर अग्निकांड में भी यही हालात थे, जहां होटल मालिक को सिर्फ 6 कमरे बनाने की अनुमति थी, लेकिन उसने नियमों को ताक पर रखते हुए 20 से ज्यादा कमरों का निर्माण करा लिया था.
बेसमेंट में अवैध कपड़ों का गोदाम
जांच में ये भी खुलासा हुआ है कि कांपलेक्स के बेसमेंट में गारमेंट्स (कपड़ों) का एक बड़ा गोदाम अवैध रूप से बनाया गया था. फायर विभाग ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद जब आग पर काबू पाया तो इस गोदाम के अंदर करीब एक फीट पानी भर गया, जिसे निकालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी.
CPMT पेपर लीक में आया को-ऑनर का नाम
इस भीषण हादसे में 15 छात्रों की मौत के बाद बिल्डिंग के सह-मालिक सुरेंद्र शुक्ल का पुराना विवादित रिकॉर्ड भी खुलकर सामने आ गया है. सुरेंद्र शुक्ल का नाम वर्ष 2015 के सीपीएमटी (PMT) पेपर लीक मामले में मुख्य रूप से उछला था. उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी बेटी को परीक्षा में पास कराने के लिए पेपर लीक की पूरी साजिश रची थी और परीक्षा केंद्र में बेटी को विशेष सुविधाएं दिलाने की कोशिश की थी.
सीपीएमटी पेपर लीक मामले में सुरेंद्र शुक्ल के खिलाफ तब एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन एसटीएफ (STF) की जांच में पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण उन्हें राहत मिल गई थी. सुरेंद्र शुक्ल और उनके भाई वीरेंद्र शुक्ल पर किसानों से कौड़ियों के भाव सस्ती जमीन खरीदकर बड़े पैमाने पर प्लॉटिंग करने और करोड़ों रुपये कमाने के आरोप लगते रहे हैं. इस अग्निकांड वाली इमारत के दूसरे मालिक वीरेंद्र शुक्ल ही बताए जा रहे हैं.
लवकेश बजाज का क्राइम रिकॉर्ड
इसी तरह मालवीय नगर अग्निकांड में आरोपी होटल के मालिक लवकेश बजाज पुराना क्राइम रिकॉर्ड मिला है. जांच में पुलिस को पता चला कि लवकेश को पहली बार 2025 में दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फर्जी भारतीय डॉक्यूमेंट्स- जिनमें पासपोर्ट और आधार कार्ड शामिल हैं, बनवाने के मामले में गिरफ्तार किया था. इन डॉक्यूमेंट्स के जरिए बांग्लादेशियों को राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रहने में मदद की गई थी.
वहीं, मुख्यमंत्री द्वारा गठित उच्चस्तरीय एसआईटी में पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव आईएएस (IAS) अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन आईपीएस (IPS) प्रवीण कुमार शामिल हैं. इस जांच समिति को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. ये विशेष समिति मुख्य रूप से भवन के मूल नक्शा, निर्माण में हुई अनियमितताओं, विद्युत लोड और प्रशासनिक लापरवाही के सभी तकनीकी पहलुओं की गहनता से जांच करेगी.
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