महिलाओं के पास होगा 24 सप्ताह गर्भपात कराने का अधिकार! लोकसभा से भी विधेयक मंजूर

देश की महिलाओं को अब अपनी आवश्यकता के अनुरूप 24 सप्ताह तक भी गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा. मंगलवार को राज्यसभा ने ‘गर्भ का चिकित्सकीय समापन संशोधन विधेयक 2020’ पारित किया था. शुक्रवार को लोकसभा ने भी इस विधेयक को राज्यसभा द्वारा सुझाए गए संशोधनों के साथ मंजूरी दे दी.

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महिलाओं को मिलेगा गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार (सांकेतिक फोटो) महिलाओं को मिलेगा गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार (सांकेतिक फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 8:33 PM IST
  • नेपाल, ब्रिटेन, अन्य में 20 सप्ताह बाद गर्भपात की अनुमति
  • दुष्कर्म पीड़ित, नाबालिगों को भी गर्भपात का अधिकार
  • 50 साल पुरानी कमियों को दूर करने की कोशिश

देश की महिलाओं को अब अपनी आवश्यकता के अनुरूप  24 सप्ताह तक भी गर्भपात कराने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा. मंगलवार को राज्यसभा ने ‘गर्भ का चिकित्सकीय समापन संशोधन विधेयक 2020’ पारित किया था. शुक्रवार को लोकसभा ने भी इस विधेयक को राज्यसभा द्वारा सुझाए गए संशोधनों के साथ मंजूरी दे दी.

अब गर्भपात की ऊपरी सीमा 24 सप्ताह
सरकार इसे पहले लोकसभा से पारित करा चुकी थी, लेकिन इसमें राज्यसभा ने कुछ संशोधन सुझाए थे जिनके साथ लोकसभा ने आज इसे मंजूरी दे दी. इसके बाद अब आवश्यकता पड़ने पर देश में किसी भी महिला के लिए 24 सप्ताह तक गर्भपात कराना संभव होगा. अभी इसकी ऊपरी सीमा 20 सप्ताह है.

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इन महिलाओं को भी गर्भपात कराने का अधिकार
नए कानून में ‘विशेष श्रेणी’ जोड़ी गई है, जिसके तहत दुष्कर्म पीड़ित, नि:शक्त, परिवार में दुष्कर्म की पीड़ित, बलात्कार पीड़ित और नाबालिगों यानी ‘किसी भी महिला और उसके साथी’ को गर्भपात कराने के लिए सहमति देने अधिकार होगा. 

क्यों थी जरूरत इस विधेयक की
अक्सर देखा गया है कि गर्भधारण में 20वें सप्ताह के बाद ही कई तरह की अवांछित स्थितियां सामने आती हैं. ऐसे में गर्भपात कराना सुरक्षित नहीं होता. दुनिया के कई देशों में 20 सप्ताह के बाद भी गर्भपात कराने की अनुमति है ताकि गर्भधारण के दौरान पैदा होने वाली अवांछित स्थितियों के बारे में पूरी जानकारी हासिल कर डॉक्टर उचित फैसला ले सके.

कहां-कहां 20 सप्ताह बाद गर्भपात की अनुमति
फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और यहां तक की नेपाल भी महिलाओं को 20 सप्ताह के बाद गर्भपात कराने की अनुमति देता है. जबकि कनाडा, जर्मनी और वियतनाम समेत 23 देश महिलाओं को कभी भी गर्भपात कराने की अनुमति देते हैं.

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स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने दिया जवाब
राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा के जवाब में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि ये एक प्रगतिशील विधेयक है जो महिलाओं को मदद करने वाला होगा. कुछ सदस्यों के विधेयक से महिलाओं की गरिमा को नुकसान पहुंचने की चिंता जताने पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि हमारी सरकार ऐसा कोई भी कानून नहीं लाएगी जो महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाए.

50 साल पुरानी कमियों को दूर करने की कोशिश
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि इस विधेयक के जरिए 50 साल पुराने कानून की कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है. इसे विभिन्न देशों के गर्भपात से संबंधित कानूनों का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है.

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