संसद के मानसून सत्र से पहले संसदीय कार्य मंत्रालय ने फ्लोर लीडर्स की बैठक बुलाई है. किरेन रिजिजू ने TMC के बागी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को इस बैठक में शामिल होने के लिए न्योता भेजा है. सुदीप बंद्योपाध्याय उन 20 TMC सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने का फैसला किया था. उनके साथ NCPI की चीफ व्हिप डॉ. काकोली घोष को भी बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. इस बैठक में मानसून सत्र के दौरान उठने वाले अहम मुद्दों और विधायी कामकाज पर चर्चा होगी.
किरेन रिजिजू ने अपने पत्र में कहा है कि लोकसभा और राज्यसभा के सभी राजनीतिक दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक में आगामी मानसून सत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और विधायी कामकाज पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने सभी दलों से संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग की अपील की है.
बैठक में कई राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है. माना जा रहा है कि जंतर-मंतर से सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने का मामला विपक्ष उठा सकता है. इसके अलावा अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन का मुद्दा भी बैठक और मानसून सत्र के दौरान चर्चा में रह सकता है. समाजवादी पार्टी पहले ही इस मुद्दे पर संसद में सरकार को घेरने की बात कह चुकी है.
सरकार पेश करेगी पांच नए विधेयक
सरकार ने मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले पांच नए बिलों की सूची जारी की है. इनमें जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बदलाव, आयकर कानून में संशोधन, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव, MSME सेक्टर से जुड़े कानून में बदलाव और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में संशोधन वाला बिल शामिल है.
संसद भवन एनेक्सी में होगी बैठक
फ्लोर लीडर्स की यह बैठक रविवार, 19 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी के मुख्य समिति कक्ष में होगी. इसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ मानसून सत्र के कामकाज को लेकर चर्चा की जाएगी. इस बैठक में सुदीप बंदोपाध्याय के साथ उनकी पार्टी की मुख्य सचेतक डॉ. काकोली घोष को भी बुलाया गया है.
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा. सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों और मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. इससे पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक को सरकार और विपक्षी दलों के बीच समन्वय बनाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि मानसून सत्र में सदनों की कार्यवाही बिना किसी रुकावट के चले और सभी जरूरी विधायी काम पूरे किए जा सकें
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