खालिस्तान की मांग, भिंडरावाले का इतिहास और अब अमृतपाल सिंह की एंट्री... जानें हर सवाल का जवाब

खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस का एक्शन जारी है. बताया जा रहा है कि पुलिस अब तक उसके 6 समर्थकों को गिरफ्तार कर चुकी है. अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी या हिरासत में लेने को लेकर भी सस्पेंस बना हुआ है. ऐसे में जानना जरूरी है ये अमृतपाल कौन है? जरनैल सिंह भिंडरावाले से क्यों हो रही है उसकी तुलना? खालिस्तान को लेकर मांग क्या है?

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जरनैल सिंह भिंडरावाले और अमृतपाल सिंह. (फाइल फोटो) जरनैल सिंह भिंडरावाले और अमृतपाल सिंह. (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2023,
  • अपडेटेड 8:05 PM IST

'वारिस पंजाब दे' संगठन के मुखिया अमृतपाल सिंह के खिलाफ पंजाब पुलिस एक्शन में है. उसके साथियों की धरपकड़ की जा रही है और उसकी तलाश में छापेमारी जारी है. पंजाब में इसे लेकर हालात तनावपूर्ण हैं. कानून-व्यवस्था न बिगड़े इसलिए रविवार रात 12 बजे तक कई हिस्सों में इंटरनेट और एसएमएस बंद हैं. कई इलाकों में धारा-144 भी लागू कर दी गई है.

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अमृतपाल सिंह खालिस्तान समर्थक है. पिछले महीने उसके साथी लवप्रीत तूफान की गिरफ्तारी होने पर उसके समर्थकों ने अजनाला पुलिस थाने पर हमला कर दिया था.

अमृतपाल सिंह की तुलना जरनैल सिंह भिंडरावाले से की जाती है. उसे 'भिंडरावाले 2.0' भी कहा जाता है. अमृतपाल ने पिछले साल 29 सितंबर को मोगा जिले के रोडे गांव में 'वारिस पंजाब दे' की पहली वर्षगांठ मनाई. रोडे भिंडरावाले का ही पैतृक गांव है. 

1. अमृतपाल सिंह कौन है?

अमृतपाल 'वारिस पंजाब दे' संगठन का मुखिया है. उसकी उम्र 30 साल है. वो 12वीं की पढ़ाई के बाद दुबई चला गया था. इसी साल 10 फरवरी को एनआरआई लड़की किरणदीप कौर से उसने शादी की है. उस पर तीन केस दर्ज हैं.

2. भिंडरावाले से तुलना क्यों?

अमृतपाल को 'भिंडरावाले 2.0' कहा जाता है. भिंडरावाले की तरह ही वो खालिस्तान समर्थक है. भिंडरावाले की तरह ही नीली पगड़ी पहनता है.

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अमृतपाल सिंह. (फाइल फोटो- PTI)

3. भिंडरावाले कौन था?

जरनैल सिंह भिंडरावाले 2 जून 1947 को जन्मा. 30 साल की उम्र में दमदमी-टकसाल का अध्यक्ष बना. इसके बाद पंजाब में हिंसा बढ़ गई. 1982 में उसने स्वर्ण मंदिर को अपना ठिकाना बना लिया. पंजाब में हिंसा रोकने के लिए 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' लॉन्च किया गया.

4. ऑपरेशन ब्लू स्टार क्या था?

1984 में ये ऑपरेशन शुरू हुआ. 1 जून से ही सेना ने स्वर्ण मंदिर की घेराबंदी कर दी. 4 जून की शाम गोलीबारी शुरू हुई. अगले दिन सेना की बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक स्वर्ण मंदिर पहुंच गए. 6 जून को भिंडरावाले को ढेर कर दिया गया. यही ऑपरेशन ब्लूस्टार इंदिरा गांधी की हत्या की वजह बना.

5. कैसे हुई इंदिरा गांधी की हत्या?

स्वर्ण मंदिर पर इस कार्रवाई का देशभर में विरोध हुआ. उस समय केंद्र में इंदिरा गांधी की ही सरकार थी. 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या उनके दो सिख बॉडीगार्ड्स सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने कर दी. इसके बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क गए.

जरनैल सिंह भिंडरावाले की ये तस्वीर 1982 की है. (फाइल फोटो)

6. सिख विरोधी दंगे क्या थे?

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में सिख विरोधी दंगे भड़क गए. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अकेले दिल्ली में ही 2,733 सिखों को मौत के घाट उतार दिया गया. वहीं देशभर में 3,350 सिख मारे गए थे.

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7. खालिस्तान का विचार कहां जन्मा?

मार्च 1940 में डॉ. वीर सिंह भट्टी ने पहली बार 'खालिस्तान' शब्द का इस्तेमाल किया था. उन्होंने उस समय कुछ टैम्पलेट छपवाए थे, जिसमें सिखों के लिए 'खालिस्तान' नाम से अलग देश की मांग की गई थी. खालिस्तान मतलब- 'खालसाओं का देश.'

8. खालिस्तान की मांग क्यों?

31 दिसंबर 1929 को लाहौर में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ. इसमें मोतीलाल नेहरू ने 'पूर्ण स्वराज्य' की मांग की. कांग्रेस की मांग का तीन समूहों ने विरोध किया. पहला- मोहम्मद अली जिन्ना की मुस्लिम लीग. दूसरा- भीमराव अंबेडकर की अगुवाई वाला दलित समूह. और तीसरा- मास्टर तारा सिंह का शिरोमणि अकाली दल. तारा सिंह ने पहली बार सिखों के लिए अलग राज्य की मांग की थी.

9. आजादी के बाद क्या हुआ?

आजादी के बाद भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान अलग देश बन गया. इस बंटवारे ने पंजाब को भी दो हिस्सों में बांट दिया. एक हिस्सा पाकिस्तान के पास गया और दूसरा भारत में रहा. इसके बाद अकाली दल ने सिखों के लिए अलग राज्य की मांग और तेज कर दी. इसी मांग को लेकर 1947 में 'पंजाबी सूबा आंदोलन' शुरू हुआ.

ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर के पास तैनात जवान. (फाइल फोटो)

10. कैसे बना सिखों का अलग राज्य- पंजाब?

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अलग राज्य की मांग को लेकर 19 साल तक आंदोलन चलते रहे. आखिरकार 1966 में तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस मांग को मान लिया. इंदिरा गांधी की सरकार ने पंजाब को तीन हिस्सों में बांटा. सिखों के लिए पंजाब, हिंदी बोलने वालों के लिए हरियाणा और तीसरा हिस्सा चंडीगढ़.

11. तो क्या शांत हो गई खालिस्तान की मांग?

नहीं. पंजाब अलग प्रदेश बना तो फिर ज्यादा अधिकार की मांग उठने लगी. 1973 में अकाली दल ने पंजाब को ज्यादा अधिकार देने की मांग रख दी. पहले 1973 और फिर 1978 में अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पास किया, जिसमें पंजाब को ज्यादा अधिकार देने के कुछ सुझाव रखे गए थे. 

12. विदेश कैसे पहुंचा खालिस्तान आंदोलन?

जगजीत सिंह चौहान नाम के खालिस्तान समर्थक 1979 में ब्रिटेन गए. वहां जाकर उन्होंने 'खालिस्तान नेशनल काउंसिल' की स्थापना की. इसके बाद चौहान ने एक कैबिनेट बनाई और खुद को 'रिपब्लिक ऑफ खालिस्तान' का राष्ट्रपति घोषित कर दिया.

खालिस्तान की मांग को लेकर अभी भी कई चरमपंथी संगठन प्रदर्शन करते हैं. (फाइल फोटो- Getty Images)

13. विदेश से कौन चला रहा खालिस्तानी आंदोलन?

खालिस्तान का समर्थन करने वाले सरगना भारत से बाहर बैठे हुए हैं. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI भारत में अस्थिरता पैदा करने के लिए खालिस्तानी एलिमेंट को भड़काती रहती है. खालिस्तान कमांडो फोर्स का मुखिया परमजीत सिंह पंजवार 1994 से लाहौर में बैठा है. बब्बर खालसा इंटरनेशनल का प्रमुख वाधवा सिंह बब्बर भी लाहौर से ही काम करता है. जरनैल सिंह भिंडरावाले का भतीजा लखबीर सिंह रोडे लाहौर में बैठकर यूरोप और कनाडा में खालिस्तानी ताकतों को एकजुट करता है. सिख फॉर जस्टिस का संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू अमेरिका में है.

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14. खालिस्तान पर इनकी मांग क्या है?

सिखों के लिए अलग देश. अक्टूबर 2021 में सिख फॉर जस्टिस ने खालिस्तान का नक्शा जारी किया. इस नक्शे में सिर्फ पंजाब ही नहीं, बल्कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के कुछ जिलों को भी खालिस्तान का हिस्सा बताया गया. 

 

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