क्या दार्जिलिंग में भी बन रहे जोशीमठ जैसे हालात? जांच के लिए दौरा कर सकती है एक्सपर्ट की टीम

उत्तराखंड में कई जिलों में जमीन दरकने की घटनाएं देखने को मिल रही हैं. पर्यावरणविदों का कहना है कि राज्य में विकास के नाम पर बेहिसाब तोड़फोड़ करने से ऐसे हालात बने हैं. अब ऐसी घटनाएं पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में देखने को मिल रही हैं. फिलहाल वहां का प्रशासन अलर्ट हो गया है.

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दार्जिलिंग में पिछले कुछ सालों में बढ़ गई हैं भूस्खलन की घटनाएं (फाइल फोटो) दार्जिलिंग में पिछले कुछ सालों में बढ़ गई हैं भूस्खलन की घटनाएं (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 7:30 PM IST

उत्तराखंड जैसी जमीन दरकने की घटनाएं अब दूसरे पहाड़ी राज्यों में भी देखने को मिल रही हैं. पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के कुछ गांवों में ऐसी घटनाएं देखी गई थीं. अब पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में जोशीमठ जैसे हालात बनने की आशंका जताई जा रही है. दरअसल पिछले एक दशक में दार्जिलिंग के कई स्थानों पर बड़े पैमाने पर भू-स्खलन (लैंडस्लाइड) देखने को मिले हैं. इस टूरिस्ट प्लेस में लगातार हाईराइज, बड़े शॉपिंग मॉल बन रहे हैं. अब यहां का प्रशासन इस बात से लेकर परेशान है. उत्तरबंग संवाद की रिपोर्ट के मुताबिक, दार्जिलिंग के हालात का जायजा लेने के लिए एक्सपर्ट की एक टीम दौरा कर सकती है.

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सीएम ममता ने भी जताई थी चिंता

कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रानीगंज को लेकर भी बयान दिया था. रानीगंज में भी लैंडस्लाइड होते रहती है. कोयला खदान वाले इस इलाके में भी जोशीमठ जैसे हालात ना हो जाएं इसलिए चिंता जाहिर की थी.

बता दें कि बंगाल में दार्जिलिंग एक बड़ा पर्यटन स्थल है. दार्जिलिंग के साथ साथ कलिम्पोंग, कर्सियांग जैसे पहाड़ी इलाके हैं, जो उत्तर बंगाल में टूरिज्म के बड़े सेंटर हैं. हर साल लाखों की संख्या में यहां पर्यटक पहुंचते हैं.

हिमाचल में भी कई जगह दरक रही जमीन

पिछले दिनों हिमाचल के मंडी जिला के गांवों में जोशीमठ जैसी दरारें देखने को मिलीं. जिले के थलौट गांव से गुजर रहे मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सुरंग बन रही है. गांव के निवासी चांद ने बताया कि जब सुरंग के लिए ब्लास्टिंग की जा रही थी, तो गांव के सारे घर कांपने लगते थे. उसके बाद सुरंग को सड़क से जोड़ने के लिए खुदाई की गई जिसके कारण तीन महीने पहले घरों में दरारें पड़नी शुरू हो गईं. यहां हर घर में दरारे हैं लेकिन प्रशासन ने केवल तीन घरों को ही असुरक्षित घोषित कर उन्हें खाली करने को कहा है, लेकिन मुआवजे के रूप में कुछ नहीं दिया गया.

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इतना ही नहीं हिमाचल के कबाइली जिले किन्नौर में हर साल 40 से 50 बार लैंडस्लाइड आते हैं. इन लैंडस्लाइडस के लिए किन्नौर के कई क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगें और सड़क बनाने के लिए की जा रही ब्लास्टिंग जिम्मेवार मानी जा रही है. किन्नौर के 30 फीसदी इलाके में दरारें आ चुकी हैं.

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