राज्यसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के एक प्रत्याशी की हार के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा JMM ने अपनी रणनीति की समीक्षा शुरू कर दी है. पार्टी ने दावा किया है कि उसके सभी विधायक एकजुट रहे और गठबंधन के निर्देश पर शत-प्रतिशत मतदान किया.
JMM के महासचिव विनोद पांडेय ने कहा कि पार्टी के सभी 34 विधायकों ने गठबंधन के दोनों प्रत्याशियों के पक्ष में वोट डाला. वह खुद पार्टी एजेंट के रूप में पूरे मतदान के दौरान मतदान केंद्र में मौजूद थे और पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे थे.
पांडेय के मुताबिक, चुनाव से पहले CM हेमंत सोरेन ने गठबंधन दलों की कई बैठकें ली थीं. मतदान की रणनीति बनाई गई थी और विधायकों को प्रोसेस समझाने के लिए मॉक ड्रिल भी कराई गई थी. इतनी तैयारी के बावजूद एक प्रत्याशी की हार अपेक्षा के अनुरूप नहीं है.
झारखंड की दो राज्यसभा सीट में से एक पर जेएमएम और दूसरी पर कांग्रेस ने अपना उम्मीवार उतारा था. इसमें जेएमएम के बैद्यनाथ राम तो जीत गए लेकिन कांग्रेस के प्रणव झा निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी से हार गए. नाथवानी को एनडीए ने समर्थन दिया था. क्रॉस वोटिंग के चलते परिमल नाथवानी इस सीट पर जीत सके. इस हार के लिए कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन के आरजेडी और सीपीएम (एल) लिबरेशन को जिम्मेदार ठहराया था.
गठबंधन में होगी पोस्टमॉर्टम
महासचिव ने साफ किया कि अब महागठबंधन स्तर पर राज्यसभा नतीजे की समीक्षा होगी. देखा जाएगा कि किन कारणों से अपेक्षित नतीजा नहीं मिला. ताकि भविष्य में इन कमियों को दूर कर BJP के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत बनाया जा सके.
JMM का जोर इस बात पर रहा कि पार्टी के अंदर कोई क्रॉस-वोटिंग नहीं हुई. अब गेंद गठबंधन के दूसरे घटक दलों के पाले में है कि हार की असली वजह क्या रही.
सत्यजीत कुमार