झारखंड विधानसभा बुधवार को बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी जंग का अखाड़ा बन गई है. एनडीए समर्थित राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस ने रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई और नामांकन रद्द करने की मांग की, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया. इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने विधानसभा के बाहर और अंदर जोरदार नारेबाजी की.
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग अब 'बीजेपी का इलेक्शन कमीशन' बनकर काम कर रहा है. पार्टी ने आरओ पर बीजेपी के एजेंट की भूमिका निभाने और उनके कार्यालय को 'बीजेपी दफ्तर' बनाने का आरोप लगाया.
'रिटर्निंग ऑफिसर का दफ्तर..'
इस बारे में 'आजतक' से विशेष बातचीत में राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे ने आरोप लगाया कि विधानसभा के सचिव और राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर पूरी तरह भाजपा के दबाव में काम कर रहे थे. उन्होंने कहा कि आरओ का दफ्तर इस दौरान पूरी तरह से भाजपा का दफ्तर बना हुआ था. कांग्रेस के शीर्ष नेता और देश के जाने-माने वकील सलमान खुर्शीद को दोपहर 1 बजे बहस करने का वक्त दिया गया था, लेकिन उन्हें अपनी बात रखने की इजाजत ही नहीं दी गई.
मंत्रियों को रोकने पर फूटा गुस्सा
इस हंगामे के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर के बाहर तैनात मार्शलों का आचरण बेहद खराब रहा. मार्शलों के इस रवैये के कारण ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर गुस्से में दिखे. इन सभी मंत्रियों को आरओ कार्यालय के अंदर जाने तक की इजाजत नहीं दी गई. दूसरी तरफ, सुनवाई खत्म होने के बाद भी बीजेपी के विधायक लगातार आरओ दफ्तर में जाकर अधिकारियों से मिलते रहे और उन पर फैसला पक्ष में लेने का दबाव बनाते रहे.
मार्शलों पर मनमानी का आरोप
कांग्रेस कोटे से मंत्री दीपिका पांडे ने इस बेहद महत्वपूर्ण दिन पर विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की अनुपस्थिति पर भी गहरे सवाल खड़े किए.
उन्होंने कहा कि आरओ दफ्तर के अंदर क्या चल रहा था, ये तो समझ में आता है कि वहां भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों पर कार्य हो रहा होगा, लेकिन अगर विधानसभा में बाहर स्पीकर मौजूद होते तो मार्शलों की इतनी हिम्मत नहीं होती. मार्शलों ने स्पीकर की गैर-मौजूदगी में चुनिंदा और पक्षपाती लोगों को ही दफ्तर के अंदर जाने दिया.
बीजेपी व्हिप चीप ने जारी की सफाई
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे ने जिस भाजपा विधायक यानी पार्टी के चीफ व्हिप पर सीधे तौर पर दबाव बनाने का आरोप लगाया, उनसे जब 'आजतक' ने संपर्क कर बातचीत की तो उन्होंने अपनी सफाई दी. बीजेपी के चीफ व्हिप ने कहा कि वह राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी की तरफ से उनका प्रतिनिधित्व कर रहे थे. उम्मीदवार का प्रतिनिधि होने के नाते ही उन्हें नियमों के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर में जाने की पूरी कानूनी इजाजत थी.
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान केवल कांग्रेस ही नहीं, बल्कि बीजेपी के कार्यकर्ता भी भारी संख्या में विधानसभा के अंदर तक पहुंच गए और उन्होंने जमकर नारेबाजी की. इस राजनीतिक लड़ाई में बीजेपी ने भी सत्ताधारी दल पर पलटवार किया.
बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार में शामिल होने का धौंस दिखाकर कांग्रेस के लोग रिटर्निंग ऑफिसर (RO) पर गलत तरीके से फैसला लेने और उम्मीदवार का पर्चा खारिज करने का भारी दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे.
कांग्रेस-जेएमएम के पास है पर्याप्त संख्याबल
मंत्री दीपिका पांडे ने 'आजतक' को आश्वस्त किया कि 10 जून के इस पूरे प्रकरण से कांग्रेस पार्टी के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है. राज्य की हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार को कुल 56 विधायकों का मजबूत समर्थन हासिल है. उन्होंने पूरा विश्वास जताया कि अगर सभी विधायक एकजुट होकर वोट डालते हैं तो कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार प्रणव झा और जेएमएम के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम दोनों की ही जीत पूरी तरह सुनिश्चित है, क्योंकि एक प्रत्याशी को जीतने के लिए सिर्फ 28 वोटों की ही जरूरत है.
कोर्ट जा सकती है कांग्रेस
ग्रामीण विकास मंत्री ने आगे की रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि चूंकि वर्तमान में चुनाव की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, इसलिए वो अभी इसमें बाधा नहीं डालेंगे. लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा परिमल नाथवानी के पक्ष में लिए गए इस गलत निर्णय के खिलाफ कांग्रेस पार्टी राज्यसभा चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी. उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्रवाई को पूरी तरह से दोहरा मापदंड करार दिया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है.
इस सवाल पर कि पूरे विरोध प्रदर्शन के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) कहीं जमीन पर साथ क्यों नहीं दिखा, दीपिका पांडे ने स्थिति साफ की. उन्होंने कहा कि बीजेपी जानबूझकर कांग्रेस और जेएमएम के गठबंधन के बीच दरार पैदा करने की नाकाम कोशिश कर रही है. चूंकि नामांकन पत्र पर कानूनी ऑब्जेक्शन कांग्रेस की तरफ से दर्ज कराया गया था, इसलिए मैदान में भी वही आगे थी. उन्होंने साफ किया कि शाम को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस (PC) में जेएमएम भी पूरी तरह उनके साथ खड़ी थी.
क्या हैं कांग्रेस की आपत्ति
कांग्रेस ने याद दिलाया कि कैसे मध्य प्रदेश में चुनाव आयोग ने भारी तत्परता दिखाते हुए कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन तुरंत रद्द कर दिया था, जबकि झारखंड में कई बड़ी त्रुटियों के बावजूद नाथवानी का नॉमिनेशन स्वीकार कर लिया गया.
कांग्रेस ने नाथवानी के नामांकन पर निम्नलिखित मुख्य आपत्तियां उठाई थीं.
उम्मीदवार द्वारा नो ड्यूज सर्टिफिकेट (No Dues Certificate) जमा नहीं किया गया था.
शेयर होल्डिंग और वित्तीय फायदों से जुड़ी अहम जानकारियों का खुलासा नहीं किया गया.
उम्मीदवार के नामांकन पत्र और आधिकारिक मतदाता सूची में अलग-अलग नाम दर्ज थे.
फॉर्म 26 में आश्रितों और कुछ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के कॉलम को खाली छोड़ दिया गया था.
सत्यजीत कुमार