भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर देश के प्रमुख किसान संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), उसके नॉन-पॉलिटिकल धड़े और ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) समेत कई किसान समूहों ने इस समझौते को भारतीय कृषि और डेयरी सेक्टर के लिए गंभीर खतरा बताया है.
शनिवार को जारी बयान और ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान SKM नेताओं ने आरोप लगाया कि यह ट्रेड डील भारतीय कृषि को अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनियों के सामने आत्मसमर्पण करने जैसा है. उन्होंने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की है.
SKM ने साफ किया कि सरकार का यह दावा कि कृषि और डेयरी सेक्टर को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से बाहर रखा गया है, पूरी तरह गलत है. भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत ने अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों पर लगाए गए नॉन-टैरिफ बैरियर्स खत्म करने पर सहमति जताई है, जिससे घरेलू किसान बड़ा नुकसान उठाएंगे.
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AIKS नेता कृष्णा प्रसाद ने कहा कि इस समझौते के बाद सूखे पशु आहार, रेड सोरघम, सोयाबीन तेल जैसे उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिया जाएगा. उनका मानना है कि ये डील अमेरिका और यूरोपीय देशों की सुस्त होती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए की जा रही है, न कि भारत के किसानों के लाभ के लिए.
किसान नेता दर्शन पाल और BKU के राकेश टिकैत ने भी इस समझौते का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि पहले से कम आय और कर्ज के बोझ तले दबे किसान इस डील से और अधिक प्रभावित होंगे. उन्होंने गांवों में बढ़ते सवालों की ओर ध्यान दिलाते हुए किसानों से आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है.
SKM और अन्य किसान संगठनों ने 12 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी आम हड़ताल का समर्थन किया है. उस दिन पूरे देश में प्रदर्शन और अमेरिकी और भारतीय प्रधानमंत्रियों के पुतले जलाए जाएंगे. किसान संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इंडिया-यूएस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को आगे बढ़ाया गया तो व्यापक स्तर पर संयुक्त जन आंदोलन होगा.
आशुतोष मिश्रा