भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर शनिवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आजतक से बातचीत की. इस बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि एग्रीकल्चर और डेयरी प्रोडक्ट्स पर अमेरिका को कोई छूट नहीं दी गई है. एक भी ऐसी वस्तु नहीं खोली गई है, जो किसानों के हित में नहीं है.
इसमें डेयरी और एग्रीकल्चर, जीएम प्रोडक्ट्स, अनाज, चावल, ज्वार, बाजारा , मक्का, रागी, पोल्ट्री, मूंग दालें और अन्य चीजें शामिल हैं. इसके अलावा, अमेरिका हमसे बड़ी मात्रा में केला इम्पोर्ट करेगा, जिसपर अमेरिका ने जीरो टैरिफ लगाया है.
पीयूष गोयल ने आगे कहा कि ग्रीन पी, काबूली चना, मूंग दाल पर कोई छूट नहीं दी गई है. जिन चीजों का हम उत्पादन नहीं करते हैं और उसे हम ज्यादा मात्रा में बाहर से मंगाते हैं, उसपर भी हमने कैलिब्रेटेड तरीके से छूट दी है.
सोयाबीन तेल, दालें क्या बोले पीयूष गोयल?
सोयाबीन तेल, दालें और सेब के इम्पोर्ट को लेकर सवाल पर पीयूष गोयल ने कहा कि सोयाबीन तेल हम पहले से ही अमेरिका से आयात करते रहे हैं. दाल भी हम अमेरिका से पहले से ही मंगा रहे हैं. यह सभी चीजें कांग्रेस के टाइम से आयात हो रही हैं. हालांकि हम उसपर भी कोटा दे रहे हैं. हमने सोयाबीन पर टैरिफ छूट नहीं दी है, बल्कि सोयाबीन ऑयल पर टैरिफ छूट दी है.
सेब पर कितनी छूट?
गोयल ने सेब को लेकर भी कहा कि सेब पर भी 80 रुपये का इम्पोर्ट प्राइस रखा गया है. इसके ऊपर 20 रुपये का टैरिफ लागू है यानी कि हमारे किसानों को 100 रुपये की सुरक्षा दी गई है. इसके बाद भी हमने अमेरिका को कोटा के तहत ही आयात करने की मंजूरी दी है. जितना पहले सेब आयात किया जाता था, उससे कम अमेरिका को कोटा दिया गया है.
अमेरिका से ट्री-नट्स क्यों?
एग्रीकल्चर सेक्टर में भारत ने अखरोट, पिस्ता जैसी ट्री नट्स चीजों को टैरिफ से राहत दी है, जिसपर पीयूष गोयल ने कहा कि हम पिस्ता, अखरोट, काजू और बादाम जैसी ट्री-नट्स चीजें भारत में बहुत ज्यादा नहीं उगाते हैं. हम ये चीजें अलग-अलग देशों से आयात करते हैं. ऐसे में अगर थोड़ी ज्यादा मात्रा में अमेरिका से आ जाएं तो आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हम इन चीजों को यूज के अलावा ज्यादा मात्रा में दूसरे देशों को एक्सपोर्ट भी करते हैं.
भारत के किसानों में बहुत पोटेशियल
गोयल ने कहा कि किसानों के लिए सभी प्रोडक्ट्स को प्रोटेक्ट किया गया है. अभी किसान और मछुआरों द्वारा 5 लाख करोड़ से ज्यादा के प्रोडक्ट्स दूसरे देशों में भेजे जाते हैं. कुछ सालों में इसकी क्षमता बढ़कर दोगुनी हो जाएगी. भारत के किसानों में बहुत पोटेशियल है, भारत की गुणवत्ता अन्य देशों की तुलना में अधिक है. यही कारण है कि भारत की चीजों की डिमांड ज्यादा रहती है.
आजतक बिजनेस डेस्क