शंघाई एयरपोर्ट पर भारतीय महिला संग दुर्व्यवहार, भारत ने चीन के समक्ष जताया कड़ा विरोध

सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत ने शंघाई पुडोंग हवाई अड्डे पर ट्रांजिट हॉल्ट के दौरान अरुणाचल प्रदेश की एक महिला को हिरासत में लिए जाने और उसका भारतीय पासपोर्ट अमान्य बताए जाने पर बीजिंग के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भारत ने इस घटना को द्विपक्षीय संबंधों में बाधा करार दिया है.

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भारत ने चीन के समक्ष जताया कड़ा विरोध. (photo: ITG) भारत ने चीन के समक्ष जताया कड़ा विरोध. (photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 नवंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:56 PM IST

अरुणाचल प्रदेश की एक भारतीय महिला को शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर ट्रांजिट के दौरान रोका गया और उनके पासपोर्ट को "अमान्य" बताने की घटना पर भारत ने बीजिंग के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है. भारत ने चीन के इस व्यवहार को 'अनावश्यक बाधा' करार दिया है, ऐसे वक्त में जब दोनों देश संबंधों को सामान्य करने पर काम कर रहे हैं.

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सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत ने शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर ट्रांजिट हॉल्ट के दौरान अरुणाचल प्रदेश की एक महिला को हिरासत में लिए जाने और उसका भारतीय पासपोर्ट 'अमान्य बताए जाने पर बीजिंग के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है. उन्होंने कहा कि चीन का ये व्यवहार ऐसे वक्त में 'अनावश्यक बाधा' है, जब दोनों देश सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए काम कर रहे हैं.

भारत ने नई दिल्ली और बीजिंग में दिया आपत्ति पत्र

सूत्रों के अनुसार, घटना के दिन बीजिंग और नई दिल्ली दोनों जगहों पर आपत्ति पत्र जारी किया गया, जबकि शंघाई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने स्थानीय स्तर पर हस्तक्षेप किया और फंसे हुए यात्री को पूरी सहायता प्रदान की.

अधिकारियों ने चीन को बताया कि यात्री को 'बेतुके आधार' पर हिरासत में लिया गया था और दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और इसके निवासियों को भारतीय पासपोर्ट रखने और उस पर यात्रा करने का पूरा अधिकार है. भारत ने ये भी कहा कि चीनी अधिकारियों की कार्रवाई ने शिकागो और मॉन्ट्रियल सम्मेलनों समेत अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानदंडों का उल्लंघन किया है.

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द्विपक्षीय संबंधों में बाधा है व्यवहार

सरकारी सूत्रों ने कहा कि इस तरह का आचरण द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के व्यापक प्रयास में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न करता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने इस घटना को भारत की संप्रभुता और अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों का सीधा अपमान बताया तथा बीजिंग से जवाबदेही, मुआवजा और आश्वासन मांगा कि राज्य के यात्रियों के साथ ऐसा व्यवहार दोबारा नहीं होगा.

नागरिक का उड़ाया मजाक

प्रेमा वांगजोम थोंगडोक ने आरोप लगाया था कि 21 नवंबर को लंदन से जापान जाते समय शंघाई से गुजरते समय उन्हें लगभग 18 घंटे तक हिरासत में रखा गया, परेशान किया गया और उनका मजाक उड़ाया गया.

उन्होंने कहा कि आव्रजन अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट को केवल इसलिए अमान्य घोषित कर दिया, क्योंकि उनका जन्मस्थान अरुणाचल प्रदेश सूचीबद्ध था और कथित तौर पर उनसे कहा गया था कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है.

पहले पूरी की इमिग्रेशन प्रक्रिया

उन्होंने बताया कि शुरुआती इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने अलग ले जाकर काउंटर पर वापस भेज दिया और बार-बार कहा कि उनका पासपोर्ट स्वीकार नहीं किया जा सकता.

थोंगडोक ने आरोप लगाया कि अधिकारियों और चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस के कर्मचारियों ने उनका मजाक उड़ाया, उन्हें चीनी पासपोर्ट के लिए आवेदन करने का सुझाव दिया और स्पष्ट जानकारी, सुविधाएं या भोजन देने से मना कर दिया.

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उन्होंने आगे दावा किया कि उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया, वैध जापानी वीजा होने के बावजूद उन्हें आगे की उड़ान में चढ़ने से रोक दिया गया, तथा चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस का नया टिकट खरीदने के लिए दबाव डाला गया, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान हुआ.

अंत में उन्होंने बताया कि पारगमन क्षेत्र तक सीमित होने तथा टिकट बुक करने या सेवाओं का इस्तेमाल करने में असमर्थ होने के कारण, अंततः उन्होंने भारतीय वाणिज्य दूतावास से संपर्क किया, जिसने उन्हें देर रात प्रस्थान के लिए सहायता प्रदान की.

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