देश में आगामी जनगणना और मतदाता सूचियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं. दिल्ली में मंगलवार से बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) सभी मतदाताओं के घर-घर जाकर संपर्क करेंगे और उन्हें गणना फॉर्म सौंपेंगे.
दूसरी तरफ, केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक, भारत के महापंजीयक सिलेक्टेड क्षेत्रों में जनगणना के दूसरे चरण यानी 'जनसंख्या गणना'का प्री-टेस्ट आयोजित करने जा रहे हैं.
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार की मानें तो राजधानी में इस समय कुल 1 करोड़ 45 लाख 10 हजार 298 मतदाता रजिस्टर्ड हैं. दिल्ली में फिलहाल कुल 13 हजार 33 पोलिंग बूथ और इतने ही बूथ लेवल अफसर हैं. इन बूथों के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों ने 32 हजार 429 पोलिंग एजेंट्स तैनात किए हैं.
उम्र और वर्ग के हिसाब से दिल्ली के मतदाताओं की डिटेल्स
पुरुष और महिला: कुल मतदाताओं में 77 लाख 11 हजार 132 पुरुष और 67 लाख 98 हजार 142 महिला मतदाता हैं.
थर्ड जेंडर: दिल्ली में तीसरे लिंग (थर्ड जेंडर) के मतदाताओं की संख्या 1,024 है.
युवा और बुजुर्ग: 18 से 19 आयु वर्ग में 3 लाख 29 हजार 130 युवा वोटर हैं, जबकि 100 साल से ज्यादा उम्र वाले बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या 192 है.
दिव्यांग और प्रवासी: शारीरिक रूप से दिव्यांग श्रेणी में 76 हजार 155 मतदाता और विदेशों में रहने वाले 713 मतदाता रजिस्टर्ड हैं.
6 जुलाई से जनगणना का प्री-टेस्ट
चुनिंदा सैंपल क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का प्री-टेस्ट 6 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक किया जाएगा. इसके बाद 19 जुलाई से 20 जुलाई 2026 तक एक 'पुनरीक्षण दौर' चलाया जाएगा. आम जनता के लिए 1 जुलाई से 5 जुलाई 2026 तक स्वयं-गणना का विकल्प भी मौजूद रहेगा.
आजादी के बाद से ये देश की आठवीं जनगणना है. ये प्रक्रिया दो चरणों में पूरी हो रही है. पहले चरण को 'मकान सूचीकरण और आवास जनगणना' कहा जाता है. इसके लिए जमीनी दौरे कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 16 अप्रैल से ही शुरू हो चुके हैं और ये प्रक्रिया 30 सितंबर तक जारी रहेगी.
अगले साल शुरू होगा दूसरा चरण
बर्फबारी वाले क्षेत्रों को छोड़कर, पूरे देश में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण अगले साल फरवरी में शुरू हो सकता है. इस दौरान हर परिवार से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक स्थिति, प्रवासन और प्रजनन क्षमता से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे.
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इसी दूसरे चरण के तहत देश में जातिगत जनगणना भी की जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इसी साल 30 अप्रैल को जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने का फैसला लिया था. बता दें कि देश में आखिरी बार व्यापक स्तर पर जाति आधारित गणना ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1881 और 1931 के बीच की गई थी.
संजय शर्मा