उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि महिलाओं को आईएएस अधिकारी या शिक्षक बनने से पहले एक 'कुशल मां' बनना चाहिए. उन्होंने कानपुर की छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही. राज्यपाल ने परिवार की जिम्मेदारियों और संस्कारों पर जोर देते हुए कहा कि पेशेवर सफलता परिवार की कीमत पर नहीं मिलनी चाहिए.
राज्यपाल ने कहा कि बेटियों को शादी के बाद पढ़ाई नहीं छोड़नी चाहिए और अपने ज्ञान का इस्तेमाल देश के निर्माण में करना चाहिए. उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चों का दाखिला करा देना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि बच्चे कॉलेज में क्या कर रहे हैं.
समारोह में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के हॉस्टलों के पास नशे की समस्या पर भी चिंता जताई. उन्होंने बताया कि जांच टीम ने पाया कि फूड डिलीवरी के डिब्बों के जरिए नशीले पदार्थ पहुंचाए जा रहे थे, जिसे प्रशासन ने तुरंत रोक दिया. राज्यपाल ने महिलाओं के खिलाफ अपराध और घरेलू हिंसा को गिरते नैतिक मूल्यों से जोड़ते हुए कहा कि सिर्फ डिग्री बांटने से समाज नहीं सुधरेगा.
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इस समारोह में 1 लाख 7 हजार 713 छात्रों को डिग्री दी गई, जिसमें करीब 82 प्रतिशत पदक लड़कियों ने जीते. बीएससी एग्रीकल्चर की छात्रा प्रिया यादव को सबसे ज्यादा अंक लाने पर चांसलर गोल्ड मेडल सहित पांच पदक मिले. राज्यपाल ने डिजिलॉकर के जरिए डिजिटल डिग्री वितरण की भी शुरुआत की, जिससे एक लाख से ज्यादा छात्रों को डिग्री ऑनलाइन मिल सकेगी.
राज्यपाल ट्रेन से कानपुर पहुंचीं, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खर्च कम करने के संदेश से जोड़ा गया. इससे पहले लखनऊ में भी उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य, मासिक धर्म, गर्भावस्था और बाल विवाह रोकने जैसे मुद्दों पर बात की थी. एक दिन पहले उन्होंने छात्रों को शादी से पहले आत्मनिर्भर बनने की सलाह भी दी थी.
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