किसान आंदोलन: मासूमों के लिए सिंधु बॉर्डर बना एक अनूठा मेला

सिंधु बॉर्डर पर सैकड़ों ट्रैक्टर और दर्जनों लंगर का जमावड़ा है. आंदोलन ने आसपास के गांव के बच्चों के लिए जिंदगी बेहद रोचक बना दी है. आलम यह है कि यहां के लंगरों में आपको कुंडली गांव के बच्चे छोटे-छोटे झुंड में नजर आ जाएंगे. 

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मासूमों के लिए सिंधु बॉर्डर बना एक अनूठा मेला मासूमों के लिए सिंधु बॉर्डर बना एक अनूठा मेला

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 04 दिसंबर 2020,
  • अपडेटेड 11:09 PM IST
  • कुंडली गांव के बच्चे छोटे-छोटे झुंड में पहुंचते हैं
  • 'यहां पीएम मोदी से लड़ाई लड़ी जा रही है'
  • आंदोलन बच्चों के लिए किसी सपने से कम नहीं

केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में सिंधु बॉर्डर पर नौ दिनों से किसान डेरा डाले हुए हैं. यहां पर सैकड़ों ट्रैक्टर और दर्जनों लंगर का जमावड़ा है. आंदोलन ने आसपास के गांव के बच्चों के लिए जिंदगी बेहद रोचक बना दी है. आलम यह है कि यहां के लंगरों में आपको कुंडली गांव के बच्चे छोटे-छोटे झुंड में नजर आ जाएंगे. 

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कोरोना काल में उनके लिए यह मेला बेहद रोमांचक है. एक तरफ जहां बड़े-बड़े पहियों वाले ट्रैक्टर पर लंबी-लंबी दाढ़ी वाले बाबा हैं तो वहीं दूसरी ओर पेट पूजा के लिए मुंह में पानी ला देने वाले व्यंजन भी. राबिया अपनी दोस्त इरम और लक्ष्मी के साथ रोज यहां घूमने आती है और मनपसंद खाना खाती है. हालांकि, उसको मालूम नहीं कि आखिर यह मजमा क्यों लगा है? वो कहती है कि हम मम्मी से पूछकर आए हैं. रोज आते हैं. यहां पर सब लोग खाने को देते हैं.  

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नन्हे संदीप के लिए तो यह अद्भुत मेला है. गांव में कभी-कभी ही ट्रैक्टर पर बैठने का मौका मिलता है पर यहां तो ट्रैक्टरों की रेल बन चली है. वो दोपहर को हाथ में खाली झोला लिए आता है. पेटभर के खाता है और फिर अपनी पोटली में बिस्कुट और संतरे भरकर ले जाता है. वो कहता है कि मैंने यहां पर चार पहियों वाला सरदार देखा... मेरे झोले में बिस्कुट और पानी भरा है.

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हेमा को लगता है कि जो जमघट लगा वो कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए लगा है. वो कहती है कि ये सरदार जी लोग ने लगाया है, क्योंकि इससे कोरोना खत्म हो जाएगा. रवि भी अपने दोस्तों के साथ यहां पहुंचा. पूछो तो मासूमियत से कहता है कि यहां लड़ाई चल रही है. मोदी जी से लड़ाई हो गई है... इसलिए यहां पर ट्रैक्टर खड़े हैं ... सरदार लोग को जगह नहीं दे रहे हैं इसलिए. यह आंदोलन इन बच्चों के लिए किसी सपने से कम नहीं. सच में यहां पर इंसानियत और जिंदादिली की मिसाल नए किस्से गढ़ रही है. 


 

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