'मोबाइल और माइक लेकर कोई बन रहा रिपोर्टर', दिल्ली हाई कोर्ट ने जताई चिंता

दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल पत्रकारिता पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि आज मोबाइल और माइक्रोफोन रखने वाला लगभग हर व्यक्ति खुद को रिपोर्टर बताने लगा है. हाई कोर्ट ने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए कहा कि इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार को ऐसा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करना चाहिए, जो मीडिया की आजादी बनाए रखते हुए पेशेवर जवाबदेही, नैतिक मानकों और नागरिक अधिकारों की भी रक्षा सुनिश्चित करे.

Advertisement
डिजिटल मीडिया पर दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सरकार को दी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की सलाह. (सांकेतिक तस्वीर) डिजिटल मीडिया पर दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सरकार को दी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की सलाह. (सांकेतिक तस्वीर)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:20 PM IST

दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्रकारिता और मीडिया की बदलती तस्वीर पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि आज के दौर में मोबाइल फोन और माइक्रोफोन रखने वाला लगभग हर व्यक्ति खुद को रिपोर्टर बताने लगा है. हाई कोर्ट ने माना कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है, लेकिन इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार को एक संतुलित और प्रभावी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार करना चाहिए.

Advertisement

जस्टिस गिरीश कठपालिया की एकल पीठ ने यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक यूट्यूब चैनल के लिए काम करने वाले दो फ्रीलांस पत्रकारों पर कथित हमले के आरोपियों को नियमित जमानत दी गई. हाई कोर्ट ने कहा कि डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के विस्तार के साथ पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदला है. ऐसे में कई लोग बिना किसी पेशेवर प्रशिक्षण, नैतिक समझ या जवाबदेही के खुद को पत्रकार बताकर रिपोर्टिंग करने लगते हैं.

कोर्ट ने कहा कि केवल मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड कर लेना या हाथ में माइक्रोफोन लेकर घटनास्थल पर पहुंच जाना किसी व्यक्ति को जिम्मेदार पत्रकार नहीं बना देता. पत्रकारिता केवल खबर जुटाने का माध्यम नहीं, बल्कि उससे जुड़ी नैतिक जिम्मेदारियां, तथ्यपरकता और कानून के प्रति जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. हाई कोर्ट ने कहा कि विधायिका को ऐसा कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार करना चाहिए, जो एक ओर प्रेस और मीडिया की स्वतंत्रता को पूरी तरह सुरक्षित रखे, वहीं दूसरी ओर पेशेवर जवाबदेही, उच्च नैतिक मानकों, कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों का भी संरक्षण सुनिश्चित करे.

Advertisement

यह भी पढ़ें: दिल्ली दंगे: शरजील इमाम की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब, अगली सुनवाई इस दिन

यह मामला पिछले वर्ष 2025 में दिल्ली के सीमापुरी इलाके का है. आरोप है कि एक कथित अवैध रूप से बने उपासना स्थल का वीडियो बिना आवश्यक अनुमति के शूट कर रहे दो फ्रीलांस पत्रकारों पर भीड़ ने हमला कर दिया था. हमले के दौरान उनके कैमरे की बैटरी और मोबाइल फोन भी छीन लिए गए थे. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आबिद अली और फुरकान को गिरफ्तार किया था. इसी मामले में आरोपियों की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी. 

हालांकि, फैसले के दौरान हाई कोर्ट ने डिजिटल पत्रकारिता के बढ़ते दायरे, उसकी चुनौतियों और जिम्मेदार मीडिया व्यवस्था की आवश्यकता पर भी विस्तार से अपनी टिप्पणी दर्ज की. कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग स्वतंत्र रूप से कंटेंट और समाचार प्रसारित कर रहे हैं, जिससे पत्रकारिता के मानकों और जवाबदेही पर लगातार बहस चल रही है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »