दिल्ली के सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदलने के दावे अक्सर सुनने को मिलते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत क्या है? क्या राजधानी के सभी सरकारी स्कूल बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं? हमारे संवाददाता ने दिल्ली के दो सरकारी स्कूलों का रियलिटी चेक किया. पहला स्कूल जसोला विहार का, जहां एक पूरी इमारत को जर्जर घोषित कर बंद कर दिया गया है और अब उसके ध्वस्तीकरण की तैयारी चल रही है.
दूसरा स्कूल सागरपुर का, जहां आज भी बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन स्कूल की इमारत कई सवाल खड़े करती है. इसी बीच दिल्ली सरकार पहली बार राजधानी के सरकारी स्कूलों का 3D स्ट्रक्चरल ऑडिट करा रही है. दावा है कि अब दफ्तर में बैठे-बैठे किसी भी स्कूल की पूरी स्थिति देखी जा सकेगी.
दिल्ली के जसोला विहार स्थित सरकारी स्कूल पहुंचने पर हमारे संवाददाता ने देखा कि ऊपर से देखने पर सब कुछ सामान्य लग सकता है, लेकिन जैसे ही हम स्कूल परिसर के अंदर पहुंचे, एक ऐसी इमारत दिखाई देती है, जिसे अब असुरक्षित घोषित किया जा चुका है. इस इमारत के बाहर साफ शब्दों में चेतावनी लिखी गई है कि अंदर जाना मना है, क्योंकि बिल्डिंग अब बच्चों और स्टाफ के लिए सुरक्षित नहीं माना गया. ये स्कूल 2008 में शीला दीक्षित सरकार के दौरान बनाया गया था.
स्कूल प्रशासन के मुताबिक, इस इमारत में करीब 21 कमरे और 17 क्लासरूम थे. बिल्डिंग के जर्जर होने के बाद इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है और अब इसके ध्वस्तीकरण की तैयारी चल रही है. हालांकि, पूरे स्कूल को बंद नहीं किया गया है. स्कूल के बाकी ब्लॉकों में पढ़ाई पहले की तरह जारी है, जबकि इस बंद इमारत में पढ़ने वाले बच्चों को दूसरे हिस्से में शिफ्ट कर दिया गया हैं, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. यही नहीं राहत की बात ये है कि इस बिल्डिंग में पढ़ने वाले बच्चों को दूसरे ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया है… लेकिन सवाल ये भी है कि अगर समय रहते इसकी पहचान नहीं होती तो हालात कितने गंभीर हो सकते थे.
इसके बाद हमारे संवाददाता दिल्ली के सागरपुर स्थित दूसरे सरकारी स्कूल पहुंचे, जहां तस्वीर थोड़ी अलग थी स्कूल में पढ़ाई आज भी जारी है… लेकिन इमारत की हालत कई जगह चिंता बढ़ाती है. दीवारों में दरारें… कई जगह उखड़ी हुई टाइलें… टूट-फूट के निशान और कई हिस्से ऐसे, जिन्हें देखकर सुरक्षा को लेकर सवाल उठना लाजिमी है. आज स्कूल में छुट्टी होने की वजह से बच्चे कैमरे में नहीं दिखे… लेकिन क्लासरूम और स्कूल परिसर की हालत बहुत कुछ बयां कर रही है.
सवाल इस बात पर उठाता है, जब बिल्डिंग का निर्माण किया जाता है. तब सरकारों की तरफ से दावा किया जाता है कि स्ट्रक्चर इतना मजबूत है, सालों साल चलेगा. लेकिन सागरपुर का ये स्कूल 2017 में आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल के दौरान बनकर तैयार हुआ था और महज 8 सालों में जर्जर हो गया... यहां बच्चे रोज पढ़ने आते हैं, लेकिन स्कूल की इमारत के कई हिस्सों में टूट-फूट साफ दिखाई देती है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन स्कूलों में बच्चे हर रोज कई घंटे बिताते हैं… वहां सुरक्षा के मानकों पर लगातार निगरानी कितनी जरूरी है.
यही वजह है कि अब दिल्ली सरकार राजधानी के सरकारी स्कूलों का बड़े पैमाने पर स्ट्रक्चरल ऑडिट करा रही है, लेकिन इस बार तरीका पारंपरिक नहीं… बल्कि पूरी तरह तकनीक आधारित है.
कैसे हो रहा है ऑडिट
दिल्ली के सरकारी स्कूलों का 3D स्ट्रक्चरल ऑडिट किया जा रहा है. इस प्रक्रिया में स्कूल की पूरी इमारत को डिजिटल रूप में स्कैन किया जा रहा है. यानी अब सिर्फ कागजी रिपोर्ट नहीं, बल्कि स्कूल का पूरा डिजिटल मॉडल तैयार होगा, जिसमें भवन की स्थिति दीवारे कमरे टॉयलेट पानी की व्यवस्था और दूसरी बुनियादी सुविधाओं तक की जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगी.
दावा है कि अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर ही किसी भी स्कूल की मौजूदा स्थिति देख सकेंगे और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे.
क्या बोले शिक्षा मंत्री
दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आजतक से बातचीत मे बताया हम 3D स्ट्रक्चर ऑडिट कर रहे हैं, जिससे हम यहीं बैठे एक बटन से स्कूलों की दीवारों तक का हाल जान लेंगे. ये शायद अपनी तरह का पहला 3D स्ट्रक्चरल ऑडिट है, स्कूलों को लेकर. हमारी सरकार नहीं चाहती कि बच्चों की सुरक्षा से किसी प्रकार का कोई खिलवाड़ हो पूरे प्लान के तहत उनको सेफ जगह में शिफ्ट कर दिया गया है... शिक्षा का मॉडल का ढोल पीटने वाले आम आदमी पार्टी सरकार हकीकत अब सामने आ रही है. कैसे सेमी स्ट्रक्चर के नाम पर बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया.
दिल्ली सरकार का दावा है कि ये व्यवस्था पहली बार लागू की जा रही है, जिससे किसी भी भवन की खराब स्थिति वक्त रहते सामने आ सकेगी और बड़े हादसों से बचाव किया जा सकेगा.
सुशांत मेहरा