CJP तो बना ली लेकिन 'कॉकरोच' चुनाव चिह्न मिलना मुश्किल, जानें चुनाव आयोग के नियम

कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई है. चुनाव लड़ने के लिए पार्टी को पहले चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. सबसे बड़ी चुनौती इसके चुनाव चिन्ह को लेकर है, क्योंकि ECI के नियम नए पशु-आधारित प्रतीक की अनुमति नहीं देते.

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5 दिन पुरानी कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर मचाई राजनीतिक हलचल (Photo: Instagram/cockroachjantaparty) 5 दिन पुरानी कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर मचाई राजनीतिक हलचल (Photo: Instagram/cockroachjantaparty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:40 PM IST

"कॉकरोच जनता पार्टी" यानी CJP नाम की एक पार्टी सिर्फ 5 दिन पहले ऑनलाइन बनाई गई. इसे अभिजीत दिपके नाम के एक शख्स ने बनाया है, जो अमेरिका के बोस्टान शहर से इसे चला रहे हैं. यह पार्टी अपने मजेदार और सरकार-विरोधी अंदाज की वजह से सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो गई.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर इसने BJP को पीछे छोड़ दिया, जो कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है. तृणमूल कांग्रेस के दो सांसद भी इसमें शामिल हो गए हैं, हालांकि यह सब सोशल मीडिया पर ही हुआ है. CJP का X अकाउंट भारत में गुरुवार को बंद कर दिया गया.

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अब सवाल उठा है कि अगर यह पार्टी कभी सच में चुनाव लड़ना चाहे, तो क्या उसे कॉकरोच का चुनाव चिन्ह मिलेगा? और क्या उसे मोबाइल फोन का चिन्ह मिलेगा, जिसकी उसने मांग की है?

इसे समझने के लिए भारत में चुनाव चिन्ह के नियम जानने होंगे. भारत में चुनाव चिन्ह भारतीय चुनाव आयोग (ECI) तय करती है. चिन्ह दो तरह के होते हैं. एक होते हैं "आरक्षित प्रतीक" जो बड़ी और मान्यता-प्राप्त पार्टियों को मिलते हैं, जैसे BJP का कमल और AAP का झाड़ू. 

दूसरे होते हैं "मुफ्त प्रतीक" जो नई और छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को दिए जाते हैं. इनकी एक लंबी सूची है जिसमें 100 से ज्यादा चिन्ह हैं, जैसे ताला-चाबी, एयर कंडीशनर, लैपटॉप, शतरंज का बोर्ड, CCTV कैमरा, नेल कटर वगैरह.

CJP को पहले ECI में पार्टी के तौर पर रजिस्टर करवाना होगा, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की सेक्शन 29A के तहत होता है. उसके बाद ही वो चुनाव चिन्ह मांग सकती है.

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अब बात कॉकरोच की. एक रजिस्टर्ड पार्टी ECI के सामने अपनी पसंद के 3 नए चिन्ह भी प्रस्ताव कर सकती है. लेकिन 1968 के चुनाव चिह्न आदेश में एक साफ नियम है कि नया चिन्ह किसी पक्षी या जानवर जैसा नहीं होना चाहिए. कॉकरोच एक जानवर है, इसलिए यह नियम CJP के रास्ते में आता है. हालांकि यह भी दिलचस्प है कि ECI यह तय करेगी कि वो तिलचट्टे को "जानवर" की श्रेणी में रखती है या नहीं. यही सबसे बड़ा मोड़ है इस पूरे मामले में.

यह नियम 1991 से लागू है. उस समय पशु अधिकार कार्यकर्ता ने शिकायत की थी कि चुनाव प्रचार के दौरान असली जानवरों को घुमाया जाता है और उन पर जुल्म होता है. 2012 में ECI ने पार्टियों को कहा भी था कि चुनाव प्रचार में जानवरों का इस्तेमाल न करें. इसीलिए नए जानवर वाले चिन्ह देना बंद कर दिए गए. लेकिन जो पुरानी पार्टियां पहले से ऐसे चिन्ह लेकर बैठी थीं जैसे BSP का हाथी और फॉरवर्ड ब्लॉक का शेर, उन्हें छूट मिली हुई है.

मोबाइल फोन के बारे में भी CJP को झटका लग सकता है. CJP ने कहा है कि उसका चुनाव चिन्ह मोबाइल फोन होगा. लेकिन ECI की मुफ्त प्रतीक की सूची में मोबाइल फोन है ही नहीं. सूची में लैंडलाइन फोन और मोबाइल चार्जर जरूर हैं, पर मोबाइल फोन का नाम नहीं है.

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कुल मिलाकर, CJP अभी सिर्फ सोशल मीडिया पर चमक रही है. चुनाव की दुनिया में आना इतना आसान नहीं होगा, और तिलचट्टे का चिन्ह लेना तो और भी मुश्किल है.

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