नीट मुद्दे पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में पत्थरबाजी हुई है. पुलिस ने बताया कि टॉलस्टॉय मार्ग पर प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और सुरक्षाकर्मियों पर पत्थर फेंके, जिससे कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए. घायलों में कनॉट प्लेस के ACP विवेक भगत शामिल हैं. ये घटना दिल्ली के टॉलस्टॉय मार्ग के पास हुई है. पुलिस के मुताबिक RAF और पुलिस की टीम तय जगह पर रोजाना की तरह तैनात थी तभी अचानक पथराव होने लगा. RAF और पुलिस एक्टिव हुई तो ताबड़तोड़ बड़े बड़े पत्थर पुलिस और RAF की टीम पर बरसाए गए. कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथ में डंडे थे जो पुलिस पर चलाए गए. भीड़ को काबू में करने के लिए RAF की टीम ने हल्का बल प्रयोग किया. पुलिस ने 2-3 आंसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को काबू में किया.
बता दें कि NEET पेपर लीक के मुद्दे पर चल रहा प्रदर्शन दिल्ली के जंतर-मंतर पर अभी भी जारी है. पुलिस का दावा है कि टॉलस्टाय मार्ग पर उग्र प्रोटेस्टर ने पुलिस पार्टी पर पत्थर फेंके, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. हालांकि ये घटना क्यों हुई? प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी क्यों की. इसकी जानकारी अबतक सामने नहीं आई है.
पुलिस के मुताबिक जंतर-मंतर पर जमा भीड़ कुछ दूर आगे चल के टॉलस्टॉय मार्ग पर आ गई और पथराव किया. बोतल फेंके. प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए RAF की टीम ने हल्का बल प्रयोग किया.
दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कनॉट प्लेस में टॉलस्टॉय मार्ग के पास रात करीब 8:30 बजे कुछ उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थर और बोतलें फेंकीं, जिससे कनॉट प्लेस के ACP विवेक भगत घायल हो गए. सीनियर अधिकारी उन्हें RML अस्पताल ले गए.
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि बुधवार को उग्र भीड़ ने शाम को एक पुलिसकर्मी को लिंच करने की कोशिश की. भीड़ ने चारों तरह से घेरा और पुलिस वाले को पटक पटक के मारा. मारपीट के दौरान गाली गलौज करके भीड़ को उकसाया जा रहा था.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक बुधवार दिन भर की हिंसा में 5 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. इनमें 2 एसीपी, 2 इंस्पेक्टर और एक पुलिस जवान है. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से तलवारें और खुखरी भी लहराई गई हैं.
बता दें कि बुधवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की रफ्तार और नारेबाजी और भी बढ़ गई. बुधवार देश भर से प्रदर्शनकारियों के नए समूह वहां पहुंच रहे थे; इनमें से कई लोग बस और ट्रेन से रात भर का सफ़र करके आए थे.
'चलो संसद' मार्च के दो दिन बाद भी धरने में नए लोग शामिल हो रहे थे; कई लोग रात भर सफ़र करने के बाद पीठ पर बैग और मुड़े हुए बैनर लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंच रहे थे. जैसे-जैसे और समूह भीड़ में शामिल होते गए वॉलंटियर्स ने उन्हें बैठने की जगह की ओर भेजा और पीने का पानी और खाने के पैकेट बांटे.
स्कूल यूनिफ़ॉर्म पहने बच्चे, कॉलेज के छात्र, ऑफ़िस जाने वाले लोग और बुज़ुर्ग प्रदर्शनकारी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे. कुछ लोग सड़क पर बैठकर मंच से हो रहे भाषण सुन रहे थे, जबकि कुछ अन्य पुलिस बैरिकेड्स के पास जमा होकर नारे लगा रहे थे और अपने सिर के ऊपर प्लेकार्ड उठाए हुए थे.
अरविंद ओझा