नई दिल्ली की विशेष अदालत ने हर्ष फायरिंग के दौरान एक महिला की जान लेने के मामले में बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को सजा सुनाते हुए सार्वजनिक प्रतिनिधियों द्वारा हथियारों के अवैध प्रदर्शन पर गंभीर और तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि एक सभ्य समाज में कानून के शासन के आगे न तो 'सिंघम' की जरूरत है और न ही 'पुष्पा' की. ऐसी हरकतें समाज में अवैध हथियार के चलन को बढ़ावा देती हैं.
विशेष जज विशाल गोगने की अदालत ने अपने 34 पन्नों के विस्तृत फैसले में साफ तौर पर कहा कि राजू कुमार सिंह पूरी तरह से सत्ता के नशे में चूर थे और वो केवल गोली चलाकर समाज में अपना दबदबा और रुतबा दिखाना चाहते थे. ऐसी गैर-जिम्मेदाराना हरकतें समाज में अवैध हथियारों के चलन को खतरनाक तरीके से बढ़ावा देती हैं और इन्हीं मुख्य वजहों से आज देश की राजनीति में बाहुबलियों का दखल लगातार बढ़ा है. राजू कुमार सिंह की हर्ष फायरिंग ने इन दोनों की ही सोच को बढ़ावा दिया है.
अदालत ने अपने फैसले में दोटूक शब्दों में कहा कि कानून राजू कुमार सिंह से अलग व्यवहार सिर्फ इसलिए नहीं कर सकता कि वह एक मौजूदा विधायक है. कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि सिर्फ इसलिए कि किसी दोषी ने पहले जन-सेवा की है, उसे नाममात्र की सजा नहीं दी जा सकती. सरकारी पद वो भी जनता के हाथों चुना हुआ पद, सम्मान और जनता के भरोसे का पद होता है. जब कोई जन-प्रतिनिधि ही गंभीर अपराध करता है तो ये भरोसा पूरी तरह धूमिल होता है और उसका उल्लंघन होता है.
वहीं, वारदात के बाद के घटनाक्रम पर कोर्ट ने कहा कि गोली चलने से घायल हुई महिला का खून भी डीजे डांस फ्लोर से राजू ने साफ करवाकर सबूत मिटाने की पूरी कोशिश की थी. इसके बाद वह कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नेपाल भागने की फिराक में था, लेकिन भारत-नेपाल की कुशीनगर बॉर्डर पर सतर्क सुरक्षाबलों उसे समय रहते दबोच लिया.
संजय शर्मा