राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच अब उस मोड़ पर पहुंच गई है, जहां पुलिस को लग रहा है कि कई बड़े राज सिर्फ कागजों से नहीं, बल्कि आरोपियों के आमने-सामने बैठने से खुलेंगे. यही वजह है कि अयोध्या पुलिस जेल में बंद तीन आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है.
पुलिस का कहना है कि इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए सिर्फ दस्तावेज काफी नहीं हैं. अब यह समझना जरूरी है कि कथित गड़बड़ी का पूरा प्लान कैसे बना, किसने किसे क्या जिम्मेदारी दी और आखिर चढ़ावे से जुड़े पैसों का पूरा रास्ता क्या था. इस केस में रविवार को पुलिस टीम जेल पहुंची थी. वहां बंद पांच आरोपियों से पूछताछ की गई. जांच अधिकारियों के मुताबिक, उस पूछताछ में कुछ ऐसे इनपुट मिले, जिनके बाद लगा कि तीन आरोपियों से पुलिस कस्टडी में विस्तार से पूछताछ करना जरूरी है.
इसके बाद जांच अधिकारी ने अदालत में सात दिन की पुलिस रिमांड की मांग की. कोर्ट को बताया गया कि जांच अभी ऐसे पड़ाव पर है, जहां आरोपियों से हिरासत में पूछताछ किए बिना कई सवालों के जवाब नहीं मिल पाएंगे. सुनवाई के बाद पुलिस रिमांड की प्रक्रिया आगे बढ़ी और टीम जेल पहुंचकर तीनों आरोपियों को अपने साथ ले आई.
किन सवालों के जवाब तलाश रही है पुलिस?
अब जांच का फोकस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि कथित गड़बड़ी हुई या नहीं. पुलिस यह भी जानना चाहती है कि पूरी योजना किसने बनाई? तीनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका क्या थी? क्या इस मामले में और लोग भी शामिल हैं? पैसों का इस्तेमाल कहां हुआ? क्या किसी और तक भी रकम पहुंची?
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सूत्रों के मुताबिक, पुलिस जरूरत पड़ने पर आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ कर सकती है. ताकि उनके बयानों का मिलान किया जा सके. माना जा रहा है कि रिमांड के दौरान मिलने वाली जानकारी के आधार पर नए नाम सामने आ सकते हैं. अगर पूछताछ में ठोस सुराग मिले तो आगे और गिरफ्तारियां या बरामदगी भी हो सकती है. फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस की कस्टडी में हैं और आने वाले कुछ दिन इस पूरे मामले के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं.
मयंक शुक्ला