'इमरजेंसी के वक्त लड़ाई ने लोकतंत्र को जीवित रखा...', Emergency के 50 साल पूरा होने पर बोले अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर आयोजित एक सेमिनार में कहा कि इस काले दौर को देश कभी नहीं भूल सकता. उन्होंने कहा कि तानाशाही किसी को पसंद नहीं आई और इसी कारण देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी. उन्होंने संविधान की हत्या और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई को भी याद किया.

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अमित शाह अमित शाह

ऐश्वर्या पालीवाल / जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 24 जून 2025,
  • अपडेटेड 7:34 PM IST

नई दिल्ली में आयोजित एक सेमिनार में गृह मंत्री अमित शाह ने आपातकाल के 50 साल पूरे होने के अवसर पर अपने विचार साझा किए. उन्होंने इस मौके को देश के लोकतांत्रिक इतिहास का अहम पल बताते हुए कहा कि "जब किसी भी अच्छी या बुरी घटना को 50 साल हो जाते हैं, तो लोग उसे भूलने लगते हैं. याददाश्त धुंधली हो जाती है, लेकिन हमें आपातकाल जैसे काले अध्याय को कभी नहीं भूलना चाहिए."

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अमित शाह के मुताबिक, यह आपातकाल के समय की लड़ाई ही थी, जिसने भारत में लोकतंत्र को जीवित रखा और यह दर्शाया कि भारत की जनता कभी भी तानाशाही को स्वीकार नहीं करती.

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आपातकाल में लोकतंत्र का गला घोंटा गया!

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आपातकाल के दौरान न केवल लोकतंत्र का गला घोंटा गया, बल्कि हजारों परिवारों का जीवन भी प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा, "कई करियर तबाह हो गए, लोगों को जेलों में ठूंस दिया गया और अभिव्यक्ति की आज़ादी छीन ली गई."

अमित शाह ने बताया कि गृह मंत्रालय ने पिछले साल 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में नोटिफिकेशन जारी किया था, ताकि नई पीढ़ी को इस काले अध्याय की जानकारी रहे. अमित शाह ने कहा, "जब पीढ़ियां बदलती हैं, तो ऐसे विषयों पर संगोष्ठी आयोजित करना ज़रूरी हो जाता है, ताकि लोग इतिहास से सबक लें."

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1975 में लागू किया गया आपातकाल...

गृह मंत्री ने कहा कि "भारत लोकतंत्र की जननी है. हमारे संविधान निर्माताओं ने जनता की भावनाओं को शब्दों में व्यक्त किया है, लेकिन 1975 में लागू किया गया आपातकाल एक ऐसा समय था, जब लोकतंत्र की हत्या हुई." अमित शाह ने यह भी कहा कि "सिवाय तानाशाह और उनके करीबियों के, कोई भी उस दौर से खुश नहीं था. यही कारण रहा कि आपातकाल के बाद देश ने पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार चुनी."

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